Home /News /uttar-pradesh /

गौरैया बचाने का जुनून, घरों में बनाता है घोंसले

गौरैया बचाने का जुनून, घरों में बनाता है घोंसले

यूं तो तमाम सामाजिक संगठन लुप्त हो रही गौरैया को बचाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन सुल्तानपुर में एक ऐसा जीव प्रेमी है जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही इन्हें बचाने के नाम कर दी है। पिछले सात सालों से प्रकृति के इस पक्षी को बचाने के प्रयास में लगा यह जीव प्रेमी जगह-जगह घूम कर लोगों को न केवल जागरुक करता है, बल्कि उनके घरों में घोंसले भी लगाता है।

यूं तो तमाम सामाजिक संगठन लुप्त हो रही गौरैया को बचाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन सुल्तानपुर में एक ऐसा जीव प्रेमी है जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही इन्हें बचाने के नाम कर दी है। पिछले सात सालों से प्रकृति के इस पक्षी को बचाने के प्रयास में लगा यह जीव प्रेमी जगह-जगह घूम कर लोगों को न केवल जागरुक करता है, बल्कि उनके घरों में घोंसले भी लगाता है।

यूं तो तमाम सामाजिक संगठन लुप्त हो रही गौरैया को बचाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन सुल्तानपुर में एक ऐसा जीव प्रेमी है जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही इन्हें बचाने के नाम कर दी है। पिछले सात सालों से प्रकृति के इस पक्षी को बचाने के प्रयास में लगा यह जीव प्रेमी जगह-जगह घूम कर लोगों को न केवल जागरुक करता है, बल्कि उनके घरों में घोंसले भी लगाता है।

अधिक पढ़ें ...
    यूं तो तमाम सामाजिक संगठन लुप्त हो रही गौरैया को बचाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन सुल्तानपुर में एक ऐसा जीव प्रेमी है जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही इन्हें बचाने के नाम कर दी है। पिछले सात सालों से प्रकृति के इस पक्षी को बचाने के प्रयास में लगा यह जीव प्रेमी जगह-जगह घूम कर लोगों को न केवल जागरुक करता है, बल्कि उनके घरों में घोंसले भी लगाता है।

    अपने हाथ से एक खास ढंग से तैयार कर एक हजार से ज्यादा घोंसले प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में लगा चुके इस जीव प्रेमी ने अपने इस काम को मिशन का रूप दे दिया है। नगर के पीडब्ल्‍यूडी कार्यालय के नजदीक रहने वाले प्रकाश विजय ने पिछले सात सालों से बेजुबान गौरैया को बचाने के लिए मुहीम छेड़ रखी है।

    वर्ष 2007 में भोपाल गए प्रकाश जब होटल के कमरे में लेटे हुए थे। तब अचानक छत के पंखे में फंस कर एक गौरैया को मरते देख इनका मन द्रवित हो गया। बस उसी दिन से इन्होंने उसे बचाने की ठानी और एक मुहिम छेड़ दी। वापस आए तो दिल बदल चुका था। काफी सोच विचार के बाद इन्होंने महसूस किया कि पेड़ों के लगातार कटान और मकानों के पक्के बन जाने से गौरैया के घोंसले कम होते जा रहे हैं, जिसके चलते आंगनों में फुदकने वाली गौरैया लुप्त होती जा रही हैं।

    प्रकाश ने इनकी वापसी के लिए घोंसले लगाने का फैसला किया और एक खास ढंग की डाई तैयार कर प्लास्टर ऑफ पेरिस के घोंसले बना कर उन्हें जगह-जगह लगाना शुरू कर दिया। कई वर्षों तक प्रकाश ने इस तरह के घोंसले लगाए, लेकिन खर्च ज्यादा आने से इन्होंने अब लकड़ी के घोंसले बनाने शुरू कर दिए। घोंसले लगाने के बदले यह किसी से कुछ लेते नहीं हैं, लेकिन मकान मालिक से इस घोंसले की देखरेख और इसमें एक बर्तन में रखे पानी को नियमित बदलने का वादा जरूर लेते हैं। वह चाहते हैं कि अगर गौरैया इसमें अपना ठिकाना बनाए तो उसे कोई दिक्कत ना हो।

    लखनऊ, जौनपुर, प्रतापगढ़, अमेठी और फैजाबाद समेत आधे दर्जन से ज्यादा जिलों में उन्होंने हजारों घोंसले लगाए हैं। गौरैया बचाने के लिए वह स्कूल, कॉलेजों में जाकर छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों को जागरूक भी करते हैं। इनके इस जूनून और मिशन के चलते नगर के एक प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था भारत भर्ती ने इन्हें पुरस्कृत भी किया है।

    अपने मिशन में पूरी तरह रमे प्रकाश विजय कहते हैं कि अब उनकी मेहनत रंग लाने लगी है। अब लुप्त हो चुकी गौरैया वापस आने लगी हैं। लखनऊ के ताजा सर्वे जिसमें खुलासा हुआ कि इस साल गौरैया की तादाद बढ़ी है। इस बात से प्रकाश काफी उत्‍साहित हैं। दूसरे उनकी खुशी तब और दुगुनी हो गई जब बीते शुक्रवार को गौरैया दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गौरैया बचाने की लोगों से अपील की।

     

    आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर