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अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 18 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है बहस, CJI ने दी मध्यस्थता की भी इजाजत

News18Hindi
Updated: September 18, 2019, 5:19 PM IST
अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 18 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है बहस, CJI ने दी मध्यस्थता की भी इजाजत
अयोध्या विवाद में 17 नवंबर तक आ सकता है फैसला

दशकों पुराने राम जन्मभूमि (Ram Janambhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) प्रॉपर्टी विवाद में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो सकती है. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Chief Justice of India Ranjan Gogoi) ने इसके संकेत दिए.

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  • Last Updated: September 18, 2019, 5:19 PM IST
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नई दिल्ली. दशकों पुराने राम जन्मभूमि (Ram Janambhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) प्रॉपर्टी विवाद (Property Dispute) में जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है. हिंदू पक्ष की सुनवाई के बाद अब मुस्लिम पक्ष की जिरह भी पूरी होने वाली है. बताया जाता है कि 18 अक्टूबर तक अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हो सकती है और जल्द ही इस मामले में कोई बड़ा फैसला आ सकता है.

दशकों पुराने राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद प्रॉपर्टी विवाद में फैसला नवंबर से पहले आ सकता है. मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Chief Justice of India Ranjan Gogoi) ने इसके संकेत दिए.


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सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सभी पक्षों से पूछा कि वो कितने-कितने दिन में अपनी बहस पूरी कर लेंगे. संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर एक बार सभी पक्ष ये बता देते है कि वो कितना समय लेंगे तो हमें भी पता चल जाएगा कि फैसला लिखने के लिए कितना समय मिलेगा.

बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इसी साल 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. लिहाजा संविधान पीठ दशकों पुराने इस विवाद पर इससे पहले फैसला सुना सकती है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा था कि  विवादित स्थल से मिले खंभों पर पाए गए निशानों से यह साबित नहीं हो सकता की वो इस्लामिक नहीं है. धवन ने कहा कि मस्जिदें केवल मुसलमानों द्वारा ही नहीं बनाई गई थीं. ताजमहल का निर्माण अकेले मुसलमानों ने नहीं किया था. इसमें मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के मजदूर शामिल थे.

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अयोध्या मुद्दे को लेकर दोनों समुदायों के बीच बीते 70 वर्षों से विवाद चला आ रहा है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.


सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के दरवाजे खुले छोड़े
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राम-जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले से संबद्ध पक्ष यदि इसे मध्यस्थता के जरिए सुलझाना चाहते हैं, तो वे अब भी ऐसा कर सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि उसे उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला का पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि कुछ पक्षों ने उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया पुन: आरंभ करने के लिए पत्र लिखा है. कलीफुल्ला ने मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की अगुवाई की थी. पीठ ने कहा कि भूमि विवाद मामले में रोजाना के आधार पर कार्यवाही बहुत आगे पहुंच गई है और यह जारी रहेगी. हालांकि अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति कलीफुल्ला की अगुवाई में मध्यस्थता प्रक्रिया अब भी जारी रह सकती है और उसकी कार्यवाही गोपनीय रखी जाएगी.

6 अगस्त से इस मामले में रोजाना सुनवाई की जा रही है
शीर्ष अदालत ने न्यायमूर्ति कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाली मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट का संज्ञान लिया था. समिति ने करीब चार महीने फैजाबाद में विभिन्न पक्षों से बातचीत की लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला. इसके बाद ही न्यायालय ने छह अगस्त से इस मामले की रोजाना सुनवाई करने का निश्चय किया. शीर्ष अदालत ने इस विवाद को सर्वमान्य समाधान के उद्देश्य से आठ मार्च को मध्यस्थता के लिए भेजा था और इसे आठ सप्ताह में अपनी कार्यवाही पूरी करनी थी. समिति को आशा थी कि इस विवाद का समाधान निकल आयेगा, इसलिए न्यायालय ने इसका कार्यकाल 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया था. शीर्ष अदालत ने समिति की 18 जुलाई तक की कार्यवाही की प्रगति के बारे में रिपोर्ट का अवलोकन किया और इसके बाद ही नियमित सुनवाई करने का निश्चय किया.

 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट इस समय अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले में दिए गए आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही है.

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First published: September 18, 2019, 10:58 AM IST
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