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UP उपचुनाव 2019: फ़तह तो हो गई लेकिन दरक रहा आज़म खान का रामपुर किला !

UP उपचुनाव 2019: फ़तह तो हो गई लेकिन दरक रहा आज़म खान का रामपुर किला !

अपने किले को बचाने में कामयाब दिख रहे आजम खान

अपने किले को बचाने में कामयाब दिख रहे आजम खान

चुनावी नतीजों पर गौर करें तो यही दिखाई दे रहा है. यदि ऐसे ही चलता रहा तो रामपुर (Rampur) में आज़म खान (Azam Khan) का अभेद्य किला ढ़ह जाएगा. चुनाव दर चुनाव आज़म खान को मिलने वाले वोटों की संख्या में गिरावट उनके लिए इसी खतरे की ओर इशारा कर रहा है.

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लखनऊ/रामपुर. विधानसभा के पिछले पांच चुनावों के विश्लेषण में लगातार आज़म खान को मिलने वाले वोटों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा सकती है. इस बार के उपचुनाव में उनकी पत्नी तज़ीन फात्मा भले ही जीत गई हों लेकिन उनकी जीत का अंतर इस बार बेहद कम हो गया है. साल 2000 के बाद से हुए अभी तक के सभी चुनावों में ये मार्जिन सबसे कम है. महज 7716 वोटों की लीड से तज़ीन फात्मा ने जीत दर्ज की है.

मज़बूत हो रही है बीजेपी!
सिर्फ एक बार 2012 के विधानसभा चुनाव में ही आज़म खान को सपा की लहर की वजह से बड़ी लीड मिली थी. आइये रामपुर में हुए पिछले पांच विधानसभा के चुनावी नतीजों का विश्लेषण करें. इससे पता चलता है कि यहां जैसे-जैसे बीजेपी के पांव मजबूत हो रहे हैं वैसे-वैसे आज़म खान के कमज़ोर. वैसे तो बीजेपी यहां हमेशा बेहद कमज़ोर रही लेकिन 1991 के चुनाव में उसने पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. हमेशा तीसरे-चौथे स्थान पर रहने वाले बीजेपी एकाएक दूसरे नम्बर पर आ गई. तब बीजेपी के जोगेश चन्द्र अरोरा ने आज़म खान के पसीने छुड़ा दिए थे. आज़म महज 2634 वोटों से जीत पाए थे. ये वो दौर था जब पूरे प्रदेश में राम मंदिर का आंदोलन चरम पर था.

साल 2000 के बाद पहला चुनाव 2002 में हुआ. इसमें आज़म खान को जितने वोट मिले उससे कम वोट उन्हें अगले चुनाव यानी 2007 में मिले. उनकी जीत का अंतर पांच सालों में चार हजार घट गया. 2012 का चुनाव आज़म खान के लिए संजीवनी लेकर आया. उनकी जीत का अंतर जो अब तक गिर रहा था अचानक बढ़ गया और लीड हो गयी 63 हजार लेकिन, ये आखिरी मौका था जब उन्हें लीड मिली. अगला चुनाव 2017 में हुआ. इसमें आज़म खान की जीत का अंतर 17 हजार गिर गया. और अब 2019 का उपचुनाव.

इसमें तो आज़म खान की पत्नी की जीत का अंतर पिछले चुनाव के मुकाबले 39 हजार कम हो गया है. जीत का अंतर जो 2012 में 46 हजार था 2019 में महज 7716 रह गया. दूसरी तरफ बीजेपी को भले ही ये सीट अभी तक नहीं मिली हो लेकिन उसके पैर रामपुर में लगातार मजबूत हो रहे हैं. 1991 के बाद से दूसरी बार 2017 में भाजपा ने इस सीट पर सेकेण्ड पोल किया था. 2019 में भी भाजपा इस सीट को आज़म खान से छीन नहीं पाई लेकिन डर तो जरूर पैदा कर दिया है. 2017 के चुनाव में भाजपा को रामपुर में 55 हजार 258 वोट मिले थे. इस उपचुनाव में उसे 71 हजार 327 वोट मिले हैं. यानी ढ़ाई सालों में भाजपा ने 16 हजार से ज्यादा वोट जोड़े हैं. यदि रामपुर में यही राजनीतिक हालात रहे तो परिणाम कभी भी उलटफेर वाले हो सकते हैं.

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Tags: Azam Khan, BJP, Rampur news, Samajwadi party

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