अगस्त के आखिरी सप्ताह तक पूरा होगा रामलला मंदिर की बुनियाद के निर्माण का काम

रामलला मंदिर की बुनियाद स्थल पर पूजा करते श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य व अन्य लोग.

Ram Mandir in Ayodhya: राम मंदिर निर्माण समिति ने आज को टीम के साथ रामजन्मभूमि परिसर में निर्माण की तैयारियों का जायजा लिया है. अब आगे बैठक में टेस्ट पाइलिंग की जांच से संबंधित रिपोर्ट के साथ मंदिर की नींव की मजबूती के लिए गहन विचार-विमर्श होगा.

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अयोध्या. अयोध्या (Ayodhya) में रामलला मंदिर निर्माण (Ram Mandir) के लिए राम जन्मभूमि परिसर में आज श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने रामलला के मंदिर निर्माण के लिए नींव पूजन किया. सबसे पहले ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने गणेश वंदना (Ganesh Vandana) की और फिर राम लला की भूमि पर फ़ावड़ा चलाने तथा मशीनों को दौड़ाने के लिए क्षमा मांगी.

राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बुनियाद की भूमि पूजन के बाद पत्रकार वार्ता की और उसमें रामलला के परिसर में हुई पूजन और निधि समर्पण अभियान को लेकर एकत्रित हुए निधि समर्पण के बारे में जानकारी दी. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि पूरे देश में निधि समर्पण अभियान का ऑडिट चल रहा है. लेकिन, जो आंकड़ा अनुमानित है वह 3000 करोड़ रुपए को पार कर चुका है. साथ ही उन्होंने दानदाताओं को यह विश्वास दिलाया कि समर्पण अभियान पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया गया और इसके परिणाम बहुत ही अच्छे रहे.

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नींव भरने में लगेंगा चार महीने का वक्त

उन्होंने कहा कि उम्मीद से 4 गुना ज्यादा लोगों ने निधि समर्पण किया है. वहीं राम जन्मभूमि परिसर में रामलला के मंदिर निर्माण के लिए बुनियाद भरने के लिए पूजन किया गया है, जिस पर चंपत राय ने बताया कि आईआईटी के विशेषज्ञों के द्वारा शोध किया गया था जिसमें 40 फुट नीचे तक की मिट्टी मलवा थी जिसको विशेषज्ञों की सलाह पर हटवाया गया और दूसरी मिट्टी मिली है, जिस पर रामलला के मंदिर निर्माण के लिए नींव भराई का काम किया जाएगा. इस काम में लगभग 4 से 5 महीने लगेंगे. बुनियाद के लिए खोदे गए स्थल पर 1 फीट की भलाई की जाएगी और रोलर से दबाया जाएगा. इस प्रकार खोदे गए भूखंड पर बुनियाद भरने का काम शुरू होगा और जिसमें 4 से 5 महीने लगेंगे.
विशेषज्ञों की सलाह से हो रहा नींव का काम

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बुनियाद पूजन के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि नींव डालने के लिए विशेषज्ञों ने सुझाव दिए थे. उन विशेषज्ञों में आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर, आईआईटी गुवाहाटी के डायरेक्टर, आईआईटी चेन्नई,  मुंबई के प्रोफेसर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट सेंटर के डायरेक्टर, टाटा और लार्सन टूब्रो के इंजीनियरों ने सामूहिक मंथन किया है. नेशनल जियो इंस्टीट्यूट रिसर्च हैदराबाद एनजीआरआई के डायरेक्टर उनकी तकनीकी टीम ने आठ 10 दिन यहीं पर कैंप किया. अध्ययन किया और सलाह दी कि जमीन के नीचे 40 फीट तक बहुत बड़ा मलवा है जिसको फाउंडेशन के उपयोग में नहीं लिया जा सकता है.

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इसके बाद मकर संक्रांति से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया. एक बहुत लंबा चौड़ा क्षेत्र है 30 फुट गहराई तक जाने के बाद कुछ तुलनात्मक साफ-सुथरी मिट्टी दिखने लगी प्रधानमंत्री ने जिस सतह पर बैठकर भूमि पूजन किया था उस सतह से लगभग 12 मीटर गहराई में अर्थात 40 फ़ीट नीचे साफ मिट्टी मिली. आज उस लेवल को सबने देखा और माना कि यह मिट्टी सांफ़ है. मलवा कुछ भी नहीं है तो उसका लेवलिंग मशीनों के द्वारा रोलर के द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है.

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