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साइकिल चोरी होने से बुझ गया था बुजुर्ग का चूल्हा, फिर थानेदार ने लौटाई उसकी जिंदगी में खुशी

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एक बुजुर्ग साइकिल (Bicycle) पर गुब्बारे बेचता था. यही उसकी रोजी रोटी का जरिया थी. साइकिल चोरी हो गई. उसका रोजगार छिन गया. थाने पहुंचकर उसने गुहार लगाई. इसके बाद थानेदार (SHO) ने उसे नई साइकिल गिफ्ट (Gift) की उसकी जिंदगी में दोबारा खुशी लौटा दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 6:53 PM IST
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आगरा. पैंसठ वर्ष के बंगालीराम अपनी आंखों में आंसू भरकर अछनेरा थाने पहुंचते हैं. थाने में पुलिसिया रौब में बैठे इंस्पेक्टर (Inspector) उदयवीर बूढ़े असहाय से व्यक्ति को दूर से ही आते देख रहे थे. बंगालीराम ने अपनी दर्द भरी आवाज में गुहार लगाई, हमारी साइकिल (Bicycle) चोरी हो गई सरकार ! मैं गुब्बारे बेचता हूं. साइकिल ही उनकी रोज की रोटी का जरिया थी.

इंस्पेक्टर ने उनसे रिपोर्ट लिखाने को कहा तो वह रोने लगा. इससे क्या होगा हुजूर. साइकिल आज नहीं मिली तो घर में चूल्हा नहीं जलेगा. इस बात ने जैसे अपने कड़क स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले थानेदार के दिल पर गहरी चोट कर दी. वह पिघल वह पिघल गए. इसके बाद उन्होंने वृद्ध को थाने में बैठाया. खातिरदारी की और बाजार से नई साइकिल मंगाकर गिफ्ट कर दी.

बताया गया है कि 65 वर्षीय बंगालीराम के कोई संतान नहीं है. उनके पास एक पुरानी साइकिल थी. जिसके सहारे वे खाने का इंतजाम करते थे. फेरी लगाकर रोजाना गुब्बारे बेचने जाते थे. दो दिन पहले उनकी साइकिल चोरी हो गई. अछनेरा के मोहल्ला भरनी निवासी बंगालीराम रविवार को रोजाना की तरह साइकिल से गुब्बारे बेचने गए थे.




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शाम के समय उन्होंने गली के बाहर साइकिल खड़ी कर दी. गुब्बारे बेचने वह अंदर गली में चले गए. लौटकर गली के बाहर आए तो साइकिल वहां से गायब थी. बताते हैं कि बंगालीराम इसी साइकिल से अलग-अलग गांवों में घूमकर गुब्बारे बेचते थे. गुब्बारे बिकने से जो कुछ कमाई होती थी उसी से घर पर खाना बन जाता था. उनकी कोई संतान नहीं है.

साइकिल चोरी की जानकारी होते ही उनके होश उड़ गए. रोते हुए वे अछनेरा थाने पहुंचे इंस्पेक्टर अछनेरा उदयवीर के सामने पहुंचते ही रोते हुए उन्होंने घटना की जानकारी दी. इंस्पेक्टर ने मुंशी को बुलाकर मुकदमा दर्ज करने को कहा. मैं गुब्बारे बेचता हूं. साइकिल ही उनकी रोज की रोटी का जरिया थी. इंस्पेक्टर ने उनसे रिपोर्ट लिखाने को कहा तो वह रोने लगा. इससे क्या होगा हुजूर. साइकिल आज नहीं मिली तो घर में चूल्हा नहीं जलेगा. इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह उनकी बात सुनकर खुद ही भावुक हो गए. उन्होंने उनको बैठाया. खातिरदारी की. तब तक थाने से सिपाहियों को भेजकर नई साइकिल मंगवा ली. इसकी भनक बुजुर्ग को नहीं लगने दी.

एक घंटे में जब नई साइकिल आ गई तब उन्हें आफिस से बाहर बुलाया. साइकिल बुजुर्ग के हाथ में सौंपकर कहा कि अब आप इससे गुब्बारे बेचिए. यह देखकर बुजुर्ग की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए. स्थानीय लोगों ने इंस्पेक्टर की इस दरियादिली की खूब तारीफ की है.
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