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कोरोना के चलते इस साल फिर नहीं लगेगा नौचंदी का मेला, सरकार के फैसले का व्यापारियों ने किया विरोध

कोरोना के चलते नौचंदी मेला लगातार दूसरी बार भी नहीं लगेगा. (फाइल फोटो)

कोरोना के चलते नौचंदी मेला लगातार दूसरी बार भी नहीं लगेगा. (फाइल फोटो)

मेरठ (Meerut) में बढ़ते कोरोना संक्रमितों (Corona Infected) की संख्या को देखते हुये कलेक्टर ने ऐतिहासिक नौचंदी मेले (Nauchandi Fair) को इस साल भी नहीं लगाने का आदेश दिया है. सरकार के इस फैसले से मंदिर के पूजारी और व्यापारी (Merchant) नाराज है और फैसले का विरोध कर रहे हैं.

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मेरठ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का ऐतिहासिक नौचंदी मेला (Nauchandi Fair) इस साल भी नहीं लगेगा. मेरठ (Meerut) के जिलाधिकारी के बालाजी ने कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के बढ़ते मामलों को देखते हुए नौचंदी मेला आयोजित नहीं करने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद नौचंदी मेले के चाहने वालों मंदिर के पुजारी और दुकानदारों में निराशा है. लोग यूपी के मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं कि जब कोरोनाकाल में हरिद्वारर में कुम्भ मेला लग सकता है तो विश्व प्रसिद्ध नौचंदी मेला क्यों नहीं लग सकता.

यूपी का ऐतिहासिक नौचंदी मेला देश-विदेश में अपनी पहचान रखता है, लेकिन इस साल भी कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर नौचंदी मेला नहीं लगेगा. मेरठ जिला प्रशासन यह अहम निर्णय लिया है. मेरठ के जिलाधिकारी के. बालाजी का कहना है कि कोरोना के मामले मेरठ में भी लगातार बढ़ते जा रहे थे. ऐसे में मेला लगाया जाएगा तो केस और बढ़ सकते हैं. लेकिन, जिला प्रशासन के इस फैसले से लोगों में निराशा है.

नौचण्डी देवी मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा का कहना है कि जब उत्तराखंड में कुम्भ मेला लग सकता है, तो नौचंदी मेला क्यों नहीं. पुजारी का कहना है कि लगातार दूसरे वर्ष सैकड़ों साल पुरानी परंपरा टूट रही है. जो ठीक नहीं है. पुजारी जी यूपी के सीएम से गुहार लगा रहे हैं कि भले ही मेला सिर्फ नौ दिन का लगे, लेकिन इस बार परंपरा नहीं टूटनी चाहिए.



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पिछले वर्ष भी कोरोना की वजह से ऐतिहासिक नौचंदी मेला नहीं लग पाया था. मेरठ का ऐतिहासिक नौचंदी मेला हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी कहा जाता है. इस मेले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते रहे हैं. लगातार दूसरे वर्ष नौचंदी मेला नहीं लगाने के निर्णय से लोगों में निराशा है. दुकानदारों का कहना है कि ये मेला उनकी रोजी-रोटी का जरिया भी है. लिहाजा उनसे मेला स्थल का ये सूनापन देखा नहीं जा रहा हैं. वहीं मेले में आने वाले बच्चे भी मेला न लगने से मायूस हैं. न्यूज़ 18 की टीम ने जब मेला स्थल का जायजा लिया तो यहां सिर्फ और सिर्फ वीरानी नजर आई. जो स्थान आजकल रोशनी से नहाया हुआ नजर आता था वो आज जानवरों का तबेला बना हुआ है.

नौचंदी मेले का सैकड़ों वर्ष पुराना इतिहास है. सैकड़ों वर्ष पुरानी परम्परा पिछले वर्ष पहली बार कोरोना की वजह से टूटी थी, लेकिन इस बार लगातार दूसरे वर्ष भी कोरोना के बढ़ते मरीजों के कारण प्रशासन को ये कड़ा निर्णय लेना पड़ा है. लेकिन अब इस निर्णय पर लोग सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि कोविड गाइडलाइंस का पालन करते हुए मेला लगाया जाए, क्योंकि ये मेला सिर्फ मेला नहीं बल्कि इसकी भी जड़ें कुम्भ मेले की ही तरह धार्मिक भावनाओं से जुड़ी हैं.
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