यूं ही नहीं OBC से SC में आने को तैयार हुईं ये 17 जातियां!

क्या ओबीसी छोड़कर अनुसूचित जाति में शामिल हो पाएंगे कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द और राजभर?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 3:19 PM IST
यूं ही नहीं OBC से SC में आने को तैयार हुईं ये 17 जातियां!
योगी सरकार ने 17 जातियों को एससी में शामिल कर दिया है (प्रतीकात्मक फोटो)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 3:19 PM IST
उत्तर प्रदेश सरकार ने कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर सहित प्रदेश की 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखने का निर्णय लिया है. इसे लेकर शासनादेश जारी हो गया है. लेकिन विवाद भी हो रहा है. तर्क दिया जा रहा है कि कोर्ट में जाकर सरकार का यह प्रस्ताव खारिज हो जाएगा. कोर्ट में जो भी हो लेकिन इतना तो तय है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसका विरोध कम से कम वो जातियां तो नहीं कर रहीं जिन्हें दूसरी श्रेणी में डाला जा रहा है. क्योंकि इसमें सरकार के साथ-साथ इन जातियों का भी लाभ जुड़ा हुआ है. लाभ लेने की यही लालच विरोध नहीं करने देती.

दलित नेता ओपी धामा कहते हैं कि ओबीसी से इस कटेगरी में आने पर किसी जाति के लोग इसलिए विरोध नहीं करते क्योंकि वो पहले से ज्यादा अधिकार संपन्न हो जाते हैं. अनुसूचित जाति में आने पर उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तीनों लाभ ओबीसी के मुकाबले कहीं बहुत ज्यादा मिलते हैं. हालांकि पूर्व सांसद और दलित नेता उदित राज ने कहा कि जिन जातियों को एससी में शामिल करने का फैसला लिया गया है वो कहीं की नहीं रहेंगी. न इधर की न उधर की.

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राजनीतिक लाभ

इन जातियों की राजनीति में भागीदारी बहुत कम है, लेकिन अब इन्हें चुनाव में आरक्षण का लाभ मिलेगा. यूपी में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा जबकि 403 विधानसभाओं में से 86 रिजर्व हैं. इनमें इन जातियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा. जबकि ओबीसी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं. यह बड़ा फायदा है.


सामाजिक लाभ
इस समय अगर कोई सवर्ण ओबीसी की पिटाई करता है तो उस पर पुलिस सामान्य धाराओं में कार्रवाई करती है, लेकिन अनुसूचित जाति के व्यक्ति की पिटाई या फिर उसे अपशब्द कहने पर एससी एक्ट (SC ST Atrocities Act) लगेगा. इसके तहत आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी होगी. अगर पुलिस प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है तो पीड़ित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटा सकता है. चूंकि इस आयोग को ज्यूडिशियल पावर प्राप्त है, इसलिए इसके आदेशों की अवहेलना करने से अधिकारी बचते हैं.


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आरक्षण का लाभ
ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण है, लेकिन इसमें तीन हजार से अधिक जातियां हैं. इसलिए उसका लाभ मिल नहीं पाता. लेकिन अनुसूचित जाति में इसके मुकाबले काफी कम जातियां हैं और आरक्षण 21 फीसदी इसलिए इसका लाभ सभी को मिल पाता है. सभी सरकारी संस्थानों में उन्हें एससी आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा, जिससे उनका तेजी से विकास होगा.


फीस में छूट
दलित नेता धामा का कहना है कि अनुसूचित जातियों के छात्रों को ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं में कोई शुल्क नहीं देना पड़ता, जबकि ओबीसी छात्रों से अधिकांश जगहों पर सामान्य के बराबर ही शुल्क लिया जाता है. स्कूल, कॉलेजों में फीस नाम मात्र की है. स्कॉलरशिप भी मिलती है.  केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए देश भर में लगभग 10 हजार डे बोर्डिंग स्कूल बनाए हैं.


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निशुल्‍क कोचिंग
संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और विभिन्‍न रेलवे भर्ती बोर्डों तथा राज्‍य लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित गुप-ए, बी पदों, बैंकों, बीमा कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा संचालित अधिकारी ग्रेड की परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग सुविधा मिलती है.

जो अखिलेश-मायावती नहीं कर पाए क्या वो योगी कर पाएंगे?
करीब दो दशक से इन 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं. क्योंकि ये पिछड़ों में भी सबसे ज्यादा पिछड़े हैं. इन जातियों की न तो राजनीति में भागीदारी है और न ही इनके अधिकारी ही बनते हैं. पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी और बसपा सरकारों में भी इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल तो किया गया, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया था.  देखना यह है कि क्या योगी सरकार इस काम को पूरा कर पाएगी?

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थावरचंद गहलोत ने बताई प्रक्रिया

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि किसी जाति को किसी अन्य जाति वर्ग में डालने का काम संसद का है. अगर यूपी सरकार ने इन जातियों को ओबीसी से एससी में लाना चाहती है तो उसके लिए प्रक्रिया है. राज्य सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव भेजेगी तो हम उस पर विचार करेंगे.  अभी जो आदेश जारी किया गया है वह संवैधानिक नहीं है, क्योंकि अगर कोई कोर्ट में जाएगा तो वह आदेश निरस्त होगा.

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First published: July 3, 2019, 3:12 PM IST
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