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चंदौली के दोनों सिंघम को मिला सिल्वर मेडल, जानें DSP अनिरुद्ध सिंह और अनिल राय की पूरी कहानी

चंदौली के दोनों सिंघम को मिला सिल्वर मेडल, जानें DSP अनिरुद्ध सिंह और अनिल राय की पूरी कहानी

अनिरुद्ध सिंह ने पुलिस महकमे में अपनी पहचान सिंघम के रूप में भी बनाई. उन्होंने पुलिस में नौकरी के साथ-साथ फिल्मों और वेब सीरीज में भी काम किया.

अनिरुद्ध सिंह ने पुलिस महकमे में अपनी पहचान सिंघम के रूप में भी बनाई. उन्होंने पुलिस में नौकरी के साथ-साथ फिल्मों और वेब सीरीज में भी काम किया.

अनिरुद्ध सिंह ने पुलिस महकमे में अपनी पहचान सिंघम के रूप में भी बनाई. उन्होंने पुलिस में नौकरी के साथ-साथ फिल्मों और वेब सीरीज में भी काम किया. अनिरुद्ध के फिल्मों में काम करने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. अनिल राय ने वर्ष 2005 में वाराणसी के लक्सा थाने में नियुक्ति के दौरान चर्चित अपराधी मनोज सिंह को मुठभेड़ में मारा गिराया और एके-47 बरामद की थी. इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था और ये दारोगा से इंस्पेक्टर बनाए गए.

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चंदौली. गणतंत्रता दिवस (Republic Day 2022) पर चंदौली जिले के दो डिप्टी एसपी को ऑपरेशनल कार्य के लिए पुलिस महानिदेशक ने सिल्वर मेडल (Silver Medal)  प्रशंसा चिह्न दिया है. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिह्न और सराहनीय सेवा सम्मान चिह्न की सूची जारी की है. इसमें चंदौली जिले से सकलडीहा के सीओ अनिरुद्ध सिंह (Anirudh Singh) और सीओ सिटी अनिल राय (Anil Rai) को बढ़िया कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशंसा चिह्न प्रदान किया गया है.

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में पहचान
अनिरुद्ध सिंह उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के रहने वाले हैं. इनकी पढ़ाई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से हुई और 2001 में इन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर नौकरी ज्वाइन की. उनकी पहली पोस्टिंग वाराणसी में थी. इसके बाद वाराणसी, जौनपुर, चंदौली सहित कई जिलों में नौकरी की. अनिरुद्ध सिंह को इस दौरान एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में ख्याति मिली.

2007 में अनिरुद्ध सिंह ने उत्तर प्रदेश के खूंखार और एक लाख के इनामिया नक्सली संजय कोल का एनकाउंटर किया था. उसके बाद अनिरुद्ध सिंह काफी सुर्खियों में आए थे. इस एनकाउंटर के बाद 2010 में अनिरुद्ध सिंह को आउट आफ टर्न प्रमोशन मिला और सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पर प्रमोट हुए.

रियल हीरो से रील हीरो का सफर
अनिरुद्ध सिंह ने पुलिस महकमे में अपनी पहचान सिंघम के रूप में भी बनाई. उन्होंने पुलिस में नौकरी के साथ-साथ फिल्मों और वेब सीरीज में भी काम किया. अनिरुद्ध के फिल्मों में काम करने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. दरअसल वाराणसी कैंट में पोस्टिंग के दौरान गंस ऑफ बनारस फिल्म की शूटिंग चल रही थी. वाराणसी के नदेसर इलाके में फिल्म की शूटिंग चल रही थी और शूटिंग देखने आए लोगों की काफी भीड़ जमा थी, जो बेकाबू हो रही थी. इसी दौरान इंस्पेक्टर अनिरुद्ध सिंह वहां पहुंचे और भीड़ को काबू में किया. फिल्मी हीरो जैसे लुक वाले इस पुलिस ऑफिसर को देखकर वहां मौजूद फिल्म के निर्देशक शेखर सूरी ने उन्हें पुलिस ऑफिसर का रोल ऑफर किया.

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अनिरुद्ध सिंह को अचानक यकीन नहीं हुआ कि ऐसा भी हो सकता है, लेकिन जब फिल्म के निर्देशक शेखर सूरी ने अनिरुद्ध से इस फिल्म में पुलिस ऑफिसर का रोल निभाने को लेकर काफी अनुरोध किया तो अपने अधिकारियों से इजाजत लेकर अनिरुद्ध ने इस फिल्म में पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभाई. इस फिल्म के बाद अनिरुद्ध सिंह ने साउथ की एक फिल्म डॉक्टर चक्रवर्ती में भी पुलिस ऑफिसर का रोल अदा किया. साथ ही साथ वेब सीरीज ‘दी रेडलैंड’ में भी एक्टिंग की.

बदायूं से ट्रांसफर होकर चंदौली आए हैं अनिरुद्ध सिंह
अपने सख्त तेवर के लिए जाने जाने वाले अनिरुद्ध सिंह की पोस्टिंग जहां-जहां भी रही वहां यह काफी चर्चा में रहे. 2019 में अनिरुद्ध सिंह को प्रमोशन मिला और यह डिप्टी एसपी हो गए. डिप्टी एसपी के रूप में पहली पोस्टिंग वाराणसी में थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनका ट्रांसफर बदायूं हो गया.

बदायूं में अनिरुद्ध सिंह ने पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ तमाम तरह की सोशल एक्टिविटीज भी की. इन्होंने तकरीबन ढाई हजार ऐसे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जो मुख्यतः अवैध शराब का कारोबार करते थे और चोरी आदि की घटनाओं में शामिल रहा करते थे. इसमें बावरिया गैंग के लोग भी शामिल थे.

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अपराधियों के हलक से AK47 निकाल लाए थे सीओ अनिल राय
सीओ अनिल राय को पिछले एक साल में किए गए उनके बेहतरीन कार्य के आधार पर इस सम्मान के लिए चुना गया है. साल 2021 में चंदौली जिले में पोस्टिंग के दौरान अधिवक्ताओं का आंदोलन एक बड़ी समस्या थी, लेकिन उन्होंने इस मामले में मध्यस्थता करते हुए बड़े ही अच्छे तरीके हैंडल किया. इसके अलावा शराब तस्करी, गो तस्करी, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के अलावा क्राइम कंट्रोल पर भी बेहतरीन काम किया, जिसके चलते सीओ सदर अनिल राय को 26 जनवरी दे मेडल से सम्मानित किया गया.

अनिल राय ने वर्ष 2005 में वाराणसी के लक्सा थाने में नियुक्ति के दौरान चर्चित अपराधी मनोज सिंह को मुठभेड़ में मारा गिराया और एके-47 बरामद की थी.

सीओ अनिल राय नौकरी के शुरुआती दिनों में अयोध्या में तैनात थे. रामजन्म भूमि विवाद के दौरान अयोध्या में तैनाती के दौरान वह चर्चा में आए. बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद यह इकलौते सब इंस्पेक्टर हैं, जो अयोध्या में तैनात रहे और जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अनिल राय अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. लंबे समय तक वाराणसी के विभिन्न थानों में प्रभारी रहे इस सीओ की वहां तूती बोलती थी.

अपराधी से बरामद की थी एके -47
अनिल राय ने वर्ष 2005 में वाराणसी के लक्सा थाने में नियुक्ति के दौरान चर्चित अपराधी मनोज सिंह को मुठभेड़ में मारा गिराया और एके-47 बरामद की थी. इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था और ये दारोगा से इंस्पेक्टर बनाए गए.

मूल रूप से बलिया जिले के रहने वाले अनिल राय जीआरपी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज आदि स्थानों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. जबकि वाराणस में लक्सा, सिगरा, जैतपुरा समेत अन्य थानों पर बतौर प्रभारी रह चुके हैं. अनिल राय की बतौर सीओ सदर जिले में तैनाती के बाद कानून-व्यवस्था मजबूत हुई. अपराध और अपराधियों पर भी प्रभावी कार्रवाई की गई.

Tags: Chandauli News, Republic day, UP police

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