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सरकारी स्कूलों में बच्चों की स्टेशनरी खरीदने में खा गए करोड़ों, बीएसए के खिलाफ FIR

 उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट में अधिकारियों ने जमकर बंदरबांट किया है. (सांकेतिक तस्वीर)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट में अधिकारियों ने जमकर बंदरबांट किया है. (सांकेतिक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश शासन की प्रारम्भिक जांच में उन्नाव में घोटाले की परत खुलकर सामने आने के बाद तत्कालीन बीएसए (BSA) व आपूर्तिकर्ता एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. साथ ही एक अज्ञात के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है.

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उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव (Unnao) में बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) के प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट (Composit Grant) में अधिकारियों ने जमकर बंदरबांट किया है. 9 करोड़ से अधिक के बजट में हुए खेल का अब पर्दाफाश हो रहा है. शासन की प्रारम्भिक जांच में घोटाले की परत खुलकर सामने आने के बाद बीएसए व आपूर्तिकर्ता एजेंसी मेसर्स मां वैष्णो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. साथ ही एक अज्ञात के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है. एफआईआर के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. आपको बता दें कि पूरे मामले को लेकर सपा एमएलसी और प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने ये मुद्दा उठाया था और शासन में शिकायत दर्ज करवाई थी. मामले में सपा एमएलसी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा था, जिसके बाद शासन ने पूरे मामले की जांच करवाई थी.

जांच में पाई गई बड़े स्तर पर अनियमितता

जानकारी के अनुसार जांच में कंपोजिट ग्रांट में की खरीदारी में बड़े स्तर पर अनियमितता पाई गई. जांच टीम में शासन को मामले की रिपोर्ट सौंपी तो राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा विजय किरण आनंद ने रविवार को बीएसए बीके शर्मा व आपूर्तिकर्ता एजेंसी मां वैष्णो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए. मामले में उन्नाव के प्रभारी बीएसए राकेश कुमार ने सोमवार देर शाम उन्नाव सदर कोतवाली में तहरीर दी. जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. उधर बीएसए के खिलाफ मुकदमा दर्ज होते ही शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कहा जा रहा है कि मामले में कई खंड शिक्षा अधिकारी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं.



स्कूलों में स्टेशनरी, डस्टबिन और खेल सामग्री खरीदने में खेल
बता दें स्कूलों में स्टेशनरी, डस्टबिन व खेल सामग्री खरीददारी में लाखों का खेल करने का आरोप है. मध्यान्ह भोजन विकास प्राधिकरण लखनऊ के डिप्टी डायरेक्टर उदय भान सिंह के नेतृत्व में टीम पहुंची थी. टीम ने कंपोजिट ग्रांट के तहत स्कूलों में खरीदी गई सामग्री को जांचा. टीम ने शिक्षकों से खरीद मामले में गहनता से पूछताछ की थी. कंपोजिट ग्रांट बेसिक शिक्षा के अंतर्गत विद्यालयों में धनराशि प्रेषित की गई थी. इसमें जनपद स्तर के द्वारा जिलाधिकारी द्वारा एक समिति गठित की थी. उस समिति की संस्तुति पर और राज्य परियोजना कार्यालय के द्वारा जांच टीम गठित हुई थी.

जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है: प्रभारी बीएसए

मामले में डीआईओएस व प्रभारी बीएसए राकेश कुमार ने बताया कि जांच आख्या के आधार पर तत्कालीन शिक्षा बेसिक अधिकारी और एक फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है. जो धनराशि विद्यालयों में प्रेषित की गई है उस धन राशि का सदुपयोग नहीं हो पाया है. जांच में यह भी सामने आया है कि जो सामग्री क्रय की गई है, वह बाजार मूल्य से अधिक मूल्य पर की गई है.

बता दें प्राइमरी स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट ₹500 की मिलती है. यह 5000 में स्कूलों को दी जा रही है. वहीं जो 1000 की कंपोजिट ग्रांट होती है उसे 10,000 रुपए में आवंटित किया जा रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह जो 4000 और 9000 का गैप है यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है. यह बड़ा सवाल था.

(रिपोर्ट: अनुज गुप्ता)

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