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उन्नाव गैंगरेप: आरोपी MLA कुलदीप सिंह सेंगर पर 16 दिसंबर को फैसला सुनाएगी दिल्ली की स्पेशल कोर्ट

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 10, 2019, 5:53 PM IST
उन्नाव गैंगरेप: आरोपी MLA कुलदीप सिंह सेंगर पर 16 दिसंबर को फैसला सुनाएगी दिल्ली की स्पेशल कोर्ट
उन्नाव गैंगरेप के मामले में दिल्ली की अदालत 16 दिसंबर को फैसला सुनाएगी. मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर मुख्य आरोपी हैं.

उन्नाव गैंगरेप (Unnao Gangrape) के मामले में दिल्ली की एक अदालत 16 दिसंबर को फैसला सुनाएगी. इस मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) मुख्य आरोपी हैं.

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नई दिल्ली. उन्नाव गैंगरेप (Unnao Gangrape) के मामले में दिल्ली की एक अदालत 16 दिसंबर को फैसला सुनाएगी. इस मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं. कोर्ट ने मंगलवार को मामले की सुनवाई पूरी कर ली है. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि वह मामले में अपना फैसला 16 दिसम्बर को सुनाएंगे.

बता दें कि, उन्नाव गैंगरेप केस के मुख्य आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर तिहाड़ जेल में बंद हैं. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 2017 में उन्नाव में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ अगस्त महीने में ही आरोप तय किए थे. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सेंगर के साथी शशि सिंह के खिलाफ भी नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में आरोप तय किए हैं.



दिल्ली की एक अदालत दर्ज कर चुकी है पीड़िता के चाचा का बयानइससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने बहुचर्चित उन्नाव रेप केस की पीड़िता के चाचा का बयान 28 अगस्त 2019 को दर्ज किया था. बयान की रिकॉर्डिंग अधूरी रही जो फिर 2 सितंबर 2019 को होनी थी. पीड़िता के चाचा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के एक जेल से लाकर दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है. उन्हें 19 साल पुराने एक मामले में दोषी ठहराया गया था और दस साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.

जानबूझकर आरोपियों के रूप में नहीं लिया सेंगर और उनके भाई का नाम
इससे पहले 10 अगस्त को उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के वकील ने दिल्ली की अदालत को बताया था कि पीड़िता के पिता की हत्या मामले में सीबीआई ने ‘जानबूझकर’ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई का नाम आरोपियों के रूप में नहीं लिया.

सीबीआई ने आरोप से किया था इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी किए जाने की समय सीमा 45 दिन तय की थी और इसी के अनुपालन में दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति से कोर्ट के अवकाश पर भी जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने विशेष सुनवाई की थी और उसी दौरान यह दलील दी गई थी. सीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ लोक अभियोजक अशोक भारतेन्दु ने इस आरोप से इनकार किया था और कहा था कि जांच अधिकारी (आईओ) ने मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ सबूत इकट्टा किए हैं और उनका कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था.

न्यायिक हिरासत में हो गई थी गैंगरेप पीड़िता के पिता की मौत
सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया था कि बलात्कार पीड़िता की मां और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए ठहरने की समुचित व्यवस्था की गई थी. मामले में केंद्रीय एजेंसी ने जिन तीन पुलिस अधिकारियों के नाम आरोपियों के रूप में लिए थे उनमें माखी के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, उप निरीक्षक कामता प्रसाद और कॉन्स्टेबल आमिर खान शामिल हैं. अन्य आरोपियों में शैलेन्द्र सिंह, विनीत मिश्रा, वीरेंद्र सिंह, शशि प्रताप सिंह और राम शरण सिंह शामिल हैं. बलात्कार पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी.

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First published: December 10, 2019, 4:59 PM IST
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