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फांसी से पहले निर्भया के दोषियों को सुनाया जाए गरुड़ पुराण, उन्नाव के जेल सुधारक ने तिहाड़ भेजा पत्र

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 15, 2020, 6:46 PM IST
फांसी से पहले निर्भया के दोषियों को सुनाया जाए गरुड़ पुराण, उन्नाव के जेल सुधारक ने तिहाड़ भेजा पत्र
निर्भया केस के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी होने वाली है. (फाइल फोटो)

जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन ने बताया कि फांसी से पहले निर्भया के गुनहगारों को गरुड़ पुराण सुनाने के लिए उन्होंने डीजी कारागार संजीव गोयल को पत्र लिखा है. उन्होंने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है. अधिकारियों ने बताया है कि होम मिनिस्ट्री से पत्राचार किया गया है. आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव (Unnao) से दिल्ली के निर्भया केस (Nirbhaya Case) के दोषियों को फांसी पर चढ़ाए जाने से पहले गरुड़ पुराण (Garuna Purana) सुनाने को लेकर एक पत्र तिहाड़ भेजा गया है. दरअसल जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन ने गरुड़ पुराण सुनाने की तैयारी की है. इसके लिए उन्होंने तिहाड़ जेल प्रशासन को पत्र भी लिखा है. उन्होंने बताया कि डीजी कारागार संजीव गोयल को पत्र लिखा है. उन्होंने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है. अधिकारियों ने बताया है कि होम मिनिस्ट्री से पत्राचार किया गया है. आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

गरुड़ पुराण में मृत्यु के मानसिक भय से मुक्ति और आत्मा की सद्गति की आस्था का हवाला देकर जेल सुधारक प्रदीप रघुनंदन ने महानिदेशक तिहाड़ कारागार से इसकी अनुमति मांगी है. प्रदीप रघुनंदन की मानें तो उन्हें आश्वासन तो मिल चुका है, लेकिन अभी तक लिखित आदेश नहीं आया है. लिखित आदेश आते ही वह तिहाड़ जेल पहुंचेंगे.

जेल सुधारक प्रदीप रघुनंदन ने भेजा है प्रस्ताव

बता दें, दिल्ली की निर्भया को इंसाफ मिलने वाला है. पीड़िता के चारों गुनहगारों को जल्द ही फांसी दिया जाना सुनिश्चित हुआ है. जहां बचाव पक्ष दोषियों की सजा टालने की कोशिश में लगा है तो वहीं फांसी की तैयारी में तिहाड़ जेल प्रशासन जुटा है. वहीं उन्नाव की जिला कारागार में जेल सुधारक प्रदीप रघुनंदन ने तिहाड़ जेल प्रशासन के सामने गरुड़ पुराण सुनाने का प्रस्ताव रखा है.

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जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन ने गरुण पुराण सुनाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन को पत्र लिखा है.


14 साल से यूपी और उत्तराखंड की जेलों में बंदियों को अपराध मुक्त करने के लिए प्रयासरत

बता दें, 14 साल से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कारागार में बंदियों को अपराध मुक्त करने के लिए प्रयासरत जेल सुधारक प्रदीप रघुनंदन बताते हैं कि निर्भया के दोषियों को विधि संहिता के तहत फांसी की सजा दी गई है और उनको दंड दिया जाना सुनिश्चित है. हमने तिहाड़ जेल प्रशासन से मांग की है कि भारतीय धर्म के अनुसार जो व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त होता है, उसके मानसिक भय को समाप्त करने के लिए गरुड़ पुराण सुनाए जाने की व्यवस्था है. इस पुराण के 16 अध्याय हैं, 17 अध्याय में इसके महत्व के बारे में बताया गया है.पहले इसमें 17000 श्लोक थे, अब वह घटकर 9000 हो गए हैं. उन्होंने कहा कि कोशिश है कि जो मानसिक प्रताड़ना व मानसिक भय उन चारों दोषियों के मन व मस्तिष्क में है, उसे दूर किया जाए. मृत्यु के उपरांत आत्मा की शांति प्रदान करने के लिए गरुड़ पुराण सुनाए जाने की व्यवस्था है. उनके शरीर ने जो कर्म किया है, भारतीय विधि व्यवस्था के तहत दंड सुनिश्चित किया जा चुका है. उनका आगे का जन्म जैसा कि भारती रीति-रिवाज के अनुसार आत्मा पुनर्जन्म लेती है. वह पुनः इस तरह के आचरण न हो इन सारे मानसिक स्थितियों से बचाने के लिए गरुड़ पुराण सुनाया जाता है. जिसकी तिहाड़ जेल प्रशासन से मांग की है.

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जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन ने भेजा पत्र


कई जेलों में रेडियो जॉकी भी रह चुके हैं

प्रदीप कहते हैं कि वैसे तो गरुड़ पुराण पाठ में 9 से 10 दिन का समय लगता है लेकिन यह मामला अलग है, इसलिए 2 से 3 दिन में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. बता दें कि उन्नाव जिला कारागार के जेल सुधारक डॉक्टर प्रदीप रघुनंदन ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कई जेलों में रेडियो जॉकी, जेल स्टूडियो, बंदियों के मनोरंजन और स्वास्थ्य सुधार के लिए कैरम, चेस और आउटडोर में फुटबॉल की व्यवस्था करवाई है, और कैदियों में सुधार के लिए इस तरह के कार्यक्रम चलाते रहते हैं.

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First published: January 15, 2020, 5:32 PM IST
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