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उन्नाव दुष्कर्म कांड: सदन से सलाखों के पीछे पहुंचने वाले दोषी विधायक सेंगर की कहानी

उन्नाव गैंगरेप केस में दोषी 
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का ऐसा रहा है सियासी सफर.
उन्नाव गैंगरेप केस में दोषी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का ऐसा रहा है सियासी सफर.

वैसे राजनीतिक जीवन की बात करें तो कुलदीप सिंह सेंगर ने कांग्रेस से राजनीति शुरू की थी. लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार विधानसभा चुनाव जीतकर कद्दावर नेता की हैसियत बनाई. उन्होंने लगातार पार्टियां बदलीं लेकिन जीत हमेशा उनके साथ ही रही.

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उन्नाव. उन्नाव दुष्कर्म केस (Unnao Rape Case) जिस तरह से एक-एक कर सीढ़ियां चढ़ता हुआ ‌आखिर न्याय तक पहुंच ही गया, उस तरह से रेप के दोषी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भी राजनीतिक कद एक समय में ऐसे ही सीढ़ियां चढ़ा था. उम्रकैद की सजा पाए सेंगर को कभी उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायकों में गिना जाता था. ठाकुरों का साथ और 4 बार विधायक रहने का तमगा लिए अपने दबदबे के लिए मशहूर सेंगर आखिर अब अपने गुनाहाें की सजा भुगतने को तैयार हैं लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वो राजनीति में खुद तो पैर जमाए बैठा ही था, अपने परिवार के लोगों के भी पैर अपने रसूख के दम पर जमवा रहा था.

कुलदीप सिंह सेंगर ने माखी गांव की ग्राम पंचायत से सियासत की शुरुआत की. ये कुलदीप सिंह सेंगर का ननिहाल है, जहां वह बचपन से पले-बढ़े. माखी गांव उन्नाव जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल है. एक बार गांव के प्रधान चुन लिए जाने के बाद उन्होंने यूथ कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा. इसके बाद कुलदीप सेंगर ने करीब-करीब सभी पार्टियों में अपनी पैठ बना ली. दूसरे दलों में अपनी अच्छी पैठ और संबंधों के बूते कुलदीप वो लगातार चार बार विधायक का चुनाव जीते.

2002 में पहली बार बसपा के टिकट पर बने विधायक
कुलदीप सिंह 1996 में पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए. वर्ष 2002 में कुलदीप सिंह सेंगर ने कांग्रेस छोड़ बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुने गए. 2007 के विधानसभा चुनाव से पहले बाहुबली छवि बनाने की वजह से बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके बाद कुलदीप सेंगर ने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने.
सपा प्रत्याशी के खिलाफ पत्नी को पंचायत चुनाव लड़ाया और फिर पहुंचे बीजेपी


कुलदीप सिंह सेंगर ने साल 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर भगवंतनगर से चुनाव लड़ा, वहां से भी आसानी से विधायक निर्वाचित हुए. लेकिन इसके बाद 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत करके जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को मैदान में उतार दिया. सपा में रहते हुए उन्होंने पार्टी के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ पत्नी को न सिर्फ चुनाव लड़ाया बल्कि जीत भी दिला दी. इसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर जनवरी 2017 में भाजपा में शामिल हो गए. और बांगरमऊ से जीत हासिल की.

खुद के साथ परिवार के सदस्यों काे भी जिताया चुनाव
वहीं परिवार की बात करें तो कुलदीप के बाद माखी गांव से 5 साल के दो कार्यकाल में उनकी माता चुन्नी देवी प्रधान रहीं. मौजूदा समय में उनके भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह माखी से ग्राम प्रधान हैं. कुलदीप के छोटे भाई मनोज सिंह 2005 से 2010 तक मियागंज ब्लॉक के प्रमुख रहे. उनको ब्लाक प्रमुख बनवाने में भी उनकी भूमिका रही.

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