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उन्नाव लोकसभा क्षेत्र: स्वतंत्रता सेनानी विश्वंभर दयालु त्रिपाठी की जमीन पर दोबारा जीतेंगे साक्षी महाराज?

साक्षी महाराज उन्नाव से वर्तमान सांसद हैं. विश्वंभर दयालु त्रिपाठी की पहचना बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में की जाती है.

साक्षी महाराज उन्नाव से वर्तमान सांसद हैं. विश्वंभर दयालु त्रिपाठी की पहचना बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में की जाती है.

यूपी की राजनीति में उन्नाव लोकसभा क्षेत्र को जिस नेता की वजह से याद किया जाता है वो विश्वंभर दयालु त्रिपाठी.

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    यूपी की राजनीति में उन्नाव लोकसभा क्षेत्र को जिस नेता की वजह से याद किया जाता है वो विश्वंभर दयालु त्रिपाठी. ब्रिटिश काल में एक बेहतरीन वकील होने के साथ-साथ वो कांग्रेस के बड़े नेताओं में से एक थे. वो संविधान सभा के सदस्य भी थे. आजादी के बाद शुरुआती दो लोकसभा चुनाव में उन्नाव से सांसद बनकर विश्वंभर त्रिपाठी संसद पहुंचे थे. उन्हें शुचिता की राजनीति की ऐसा पुरोधा माना जाता है जिन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ किसानों के हित के लिए मोर्चा खोल दिया था.

    वर्तमान समय में इस सीट से सांसद बीजेपी के साक्षी महाराज हैं. 2019 की चुनावी लड़ाई में भी साक्षी महाराज को पार्टी ने इस बार यहां से टिकट दिया है. यहां इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. साक्षी महाराज के सामने गठबंधन के उम्मीदवार हैं बाहुबली छवि के अरुण शंकर शुक्ला हैं तो कांग्रेस से पूर्व सांसद अन्नू टंडन हैं. साक्षी महाराज इस सीट पर 2014 में पहली बार चुनाव लड़ने पहुंचे थे. इससे पहले वो बगल की फर्रूखाबाद सीट से सांसद थे.

    उन्नाव का चुनावी इतिहास

    उन्नाव लोकसभा सीट पर अभी तक हुए कुल 17 लोकसभा चुनाव में 9 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है. आजादी के बाद लंबे समय तक पार्टी का दबदबा इस सीट पर कायम रहा. विश्वंभर दयालु त्रिपाठी के बाद यहां से लीलाधर अस्थाना, कृष्णदेव त्रिपाठी और जियाउर रहमान अंसारी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत कर संसद पहुंचते रहे. पहली बार जनता पार्टी के राघवेंद्र सिंह ने यहां गैर कांग्रेसी प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी. बाद में यह सीट फिर कांग्रेस जियाउर रहमान अंसारी ने वापस ले ली और 1980 और 84 के चुनाव में जीत दर्ज की. 1889 में जब वीपी सिंह की आंधी चल रही थी तो जनता दल के टिकट पर यहां से अनवर अहमद ने जीत हासिल की. 90 के दशक में राम मंदिर की लहर पर सवार बीजेपी के देवी बख्श सिंह ने तीन बार ( 1991, 1996, 1998 ) कब्जा जमाया. 1999 में समाजवादी पार्टी के दीपक कुमार ने यहां जीत पाई तो 2004 में बीएसपी के बृजेश पाठक जीते जो अब राज्य बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. 2009 में यहां से कांग्रेस की अन्नू टंडन ने बाजी मारी थी जो इस बार भी चुनाव मैदान में हैं.

    अन्नू टंडन


    रिकॉर्ड

    उन्नाव लोकसभा क्षेत्र देश का चौथा सबसे अधिक मतदाताओं वाला लोकसभा क्षेत्र है. 2008 के परिसीमन के बाद उन्नाव जिले की छह विधानसभा सीटों पुरवा, भगवंतनगर, मोहान, सफीपुर, बांगरमऊ और सदर को मिलाकर एक जिले की लोकसभा बना दी गई थी. इस लोकसभा सीट पर ठाकुर मतदाताओं का अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है.

    उन्नाव जिले को महाकवि निराला के मूल जिले के तौर भी जाना जाता है. हालांकि निराला ने कभी इसे अपनी कर्मभूमि नहीं बनाया लेकिन अवध और उसके आस-पास के इलाकों में उन्नाव की पहचान निराला की धरती के तौर पर भी की जाती है.

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