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UP में घटे नहीं बढ़ रहे हैं महिलाओं के खिलाफ होने वाले ये अपराध

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Updated: December 9, 2019, 12:04 PM IST
UP में घटे नहीं बढ़ रहे हैं महिलाओं के खिलाफ होने वाले ये अपराध
यूपी विधानसभा और एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि यूपी में अपराध बढ़ रहा है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

मार्च 2018 में विधायक (MLA) नाहिद हसन ने विधानसभा में महिलाओं की सुरक्षा (Women Security) की सुरक्षा से जुड़ा सवाल उठाया था. सवाल के जबाव में जो आंकड़े आए वो बेहद चौंकाने वाले हैं.

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  • Last Updated: December 9, 2019, 12:04 PM IST
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश (UP) में रेप-गैंगरेप (Rape-Gangrape) की घटना हो या एसिड अटैक (Acid Attack). दहेज हत्या के चलते मौत हो या फिर अपहरण और छेड़खानी, महिलाओं और लड़कियों से जुड़े अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. एनसीआरबी के आंकड़ों में गैंगरेप और एसिड अटैक के मामले में तो यूपी देशभर में अव्वल है, लेकिन लड़कियों के अपहरण का आंकड़ा भी कोई छोटा नहीं है. दहेज हत्या के आरोप में मौत का आंकड़ा हजारों में पहुंच चुका है. इसकी तस्दीक यूपी विधानसभा में हुए सवाल-जवाब और एनसीआरबी के आंकड़ों से होती है.

एक साल में दोगुनी हो गईं छेड़खानी की घटनाएं

मार्च 2018 में विधायक नाहिद हसन ने विधानसभा में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल उठाया था. सवाल के जबाव में जो आंकड़े आए वे बेहद चौंकाने वाले थे. महिलाओं और लड़कियों से छेड़खानी की घटनाएं एक साल में दोगुनी होने की जानकारी दी गई. वर्ष 2016-17 का आंकड़ा अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 में आते-आते करीब दोगुना हो गया. अपहरण की बात करें तो संबंधित अवधि में अपहरण की घटनाएं एक ही साल में तीन हजार बढ़ गईं.

एक साल में बढ़ गईं रेप की 761 घटनाएं

रेप के आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं हैं. संबंधित वक्त में रेप की घटनाएं एक ही साल में 761 तक बढ़ गईं. रेप की घटनाएं तीन हजार के आंकड़े को छू गई हैं. वहीं, दूसरी ओर रेप की कोशिश की घटनाओं में भी खासा इजाफा हुआ है. संबंधित अवधि से पहले यह आंकड़ा 8159 था, जो एक साल बाद ही आंकड़ा 11404 तक पहुंच गया. दहेज के लिए भी महिलाओं पर खूब जुल्‍म ढाए गए.



'एकतरफा इश्क का नतीजा हैं रेप और एसिड अटैक की घटनाएं'यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है, 'रेप-गैंगरेप और एसिड अटैक की घटनाएं उन युवकों की देन है जो एकतरफा इश्क के शिकार होते हैं. लड़की को सिर्फ और सिर्फ अपनी जागीर समझते हैं. लेकिन, इसके पीछे एक बड़ी कमी उन लोगों की भी है जिनकी जिम्मेदारी लड़कों को समय-समय पर टोकने की होती है. कुछ कमी पुलिस की ओर से भी है.'



कानून नहीं, पुलिस में है बदलाव की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अनस तनवीर इस बारे में बताते हैं, 'आज कानून में नहीं पुलिस में बदलाव की जरूरत है. उन्नाव रेप केस में भी पीड़िता के साथ पुलिस का रवैया ठीक नहीं रहा. रेप-गैंगरेप के ये आंकड़े बताते हैं कि किस तरह पुलिस पूरी तरह से नाकाम हो रही है. उन्नाव वाले केस में एक अच्छी बात यह हुई कि आरोपी जल्द ही पकड़ लिए गए.'

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First published: December 9, 2019, 11:45 AM IST
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