यूपी के इस गांव से था शीला दीक्षित का रिश्ता, आखिरी बार अपने ससुर के जन्मदिन पर आईं थी यहां

शीला दीक्षित के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख प्रकट किया हैं. सीएम योगी ने ट्वीट करके कहा,'कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित जी के निधन की खबर सुनकर अत्यंत दुःख हुआ.

News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 5:32 PM IST
यूपी के इस गांव से था शीला दीक्षित का रिश्ता, आखिरी बार अपने ससुर के जन्मदिन पर आईं थी यहां
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Updated: July 20, 2019, 5:32 PM IST
यूपी की राजधानी लखनऊ से कोई घंटे भर की दूरी पर एक जिला है उन्नाव. गांव ऊगू निवासी वरिष्ठ कांग्रेसी एवं पूर्व राज्यपाल उमाशंकर दीक्षित की बहू शीला दीक्षित का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और दो राज्यों के राज्यपाल रह चुके स्व. उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से शीला दीक्षित की शादी हुई थी. इमरजेंसी से पहले शीला दीक्षित का ज्यादा समय उन्नाव में ही गुजरता रहा था. आखिरी बार शीला 12 जनवरी 2008 को अपने ससुर उमाशंकर दीक्षित के जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने उन्नाव के ऊगू गांव आई थीं.

गांव मं पसरा सन्नाठा

बता दें कि दो साल पहले उनके सांसद पुत्र संदीप दीक्षित भी बाबा के जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. हालांकि वर्षों से परिवार का कोई भी सदस्य ऊगू में नहीं रह रहा है. उनके परिवार के करीबी जगदेव सिंह, उमाशंकर तिवारी कहते हैं कि गांव की बहु की मौत के बाद आज पूरा गांव उदास है. क्योकि शीला दीक्षित का ऊगू से गहरा लगाव था.



सीएम योगी ने जताया शोक

शीला दीक्षित के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख प्रकट किया हैं. सीएम योगी ने ट्वीट करके कहा,'कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित जी के निधन की खबर सुनकर अत्यंत दुःख हुआ.' मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को वे अपने श्री चरणों में स्थान दें.

शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर

1. पंजाब के कपूरथला में जन्मी शीला दीक्षित की शादी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से हुई. पंजाबी से ब्राह्मण बनीं शीला दीक्षित ने ससुर के राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला.

2. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में पहली बार शीला दीक्षित कन्नौज से लड़कर संसद तक पहुंची. गांधी परिवार की करीबी होने के नाते उन्हें राजीव गांधी के सरकार में संसदीय कार्य राज्यमंत्री और पीएमओ में मंत्री बनने का मौका मिला.

3. 1998 में सोनिया गांधी के राजनीति में आने बाद शीला दीक्षित को भी दुबारा राजनीति में सक्रिय होने का मौका मिला. सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली की बांगडोर सौंपी. जिसके बाद शीला दीक्षित ने पलट कर नहीं देखा. केंद्र में जाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की लेकिन दिल्ली में शीला दीक्षित ही सत्ता में रहीं.

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First published: July 20, 2019, 5:05 PM IST
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