लाइव टीवी

उन्नाव रेप पीड़िता ने MLA कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ न्याय की लड़ाई में चुकाई बड़ी कीमत

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 16, 2019, 5:07 PM IST
उन्नाव रेप पीड़िता ने MLA कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ न्याय की लड़ाई में चुकाई बड़ी कीमत
उन्नाव गैंगरेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर दोषी करार

एक रसूख वाले विधायक के साथ ढाई साल लंबी लड़ाई और न्याय के लिए पीड़िता को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. न्याय की इस जंग में जहां पीड़िता ने अपने पिता, चाची और मौसी को खोया, वहीं खुद एम्स के आईसीयू में एडमिट है.

  • Share this:
उन्नाव. 16 दिसंबर यानी जिस दिन दिल्ली की निर्भया के साथ हैवानियत हुई थी उसी दिन उन्नाव की 'निर्भया' को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) से न्याय मिला है. बांगरमऊ से चार बार के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को कोर्ट ने रेप व अपहरण के मामले में दोषी (Found Guilty) करार दिया. अब मामले में सजा का ऐलान 19 दिसंबर को होगा. एक रसूख वाले विधायक के साथ ढाई साल की लंबी लड़ाई और न्याय के लिए पीड़िता को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. न्याय की इस जंग में जहां पीड़िता ने अपने पिता, चाची और मौसी को खोया, वहीं खुद एम्स के आईसीयू में एडमिट है.

अप्रैल 2018 में मामला मीडिया में आया
8 अप्रैल 2018 में मामला तब मीडिया में आया जब पीड़िता ने न्याय न मिलते देख सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर खुद को आग लगाने की कोशिश की थी. दरअसल, पूरा मामला जून 2017 का है, जब पीड़िता ने विधायक सेंगर के खिलाफ रेप का आरोप लगाया. न्याय के लिए भटकती पीड़िता को जब पुलिस से कोई मदद नहीं मिली तो थक हारकर वह अप्रैल 2018 में आत्मदाह के लिए लखनऊ स्थित सीएम आवास पहुंची. पीड़िता का आरोप था कि विधायक के इशारे पर पुलिस उसे और उसके परिवार को परेशान कर रही है. इतना ही नहीं झूठे केस में पुलिस ने उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस बीच 9 अप्रैल को ही पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई. इसके बाद दबाव में आई योगी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी. कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.

अगस्त में बीजेपी ने सेंगर को पार्टी से निकाला

इस साल 28 जुलाई को रायबरेली के गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र में कार व ट्रक की टक्कर में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी. पीड़िता और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे. पीड़ित परिवार का आरोप है कि कुलदीप सेंगर ने ही यह एक्सीडेंट करवाया था. इस मामले में भी सेंगर व अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. मामले के तूल पकड़ने के बाद बीजेपी पर दबाव बढ़ा और अगस्त में सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.

न्याय की लड़ाई में अब तक काफी बड़ी कीमत चुकाई
पीड़िता ने अपने न्याय की लड़ाई में अब तक काफी बड़ी कीमत चुकाई है. आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से 18 साल पुरानी रंजिश में इस परिवार में अब तक कुल चार मौतें हो चुकी हैं. आलम ये है कि आज परिवार में मर्द के नाम पर सिर्फ दो बच्चे हैं. विधायक के डर से अन्य रिश्तेदार भी परिवार से दूरी बनाए हुए हैं.पड़ोसी हैं दोनों परिवार
पीड़िता के परिवार की विधायक से रंजिश और अब न्याय की इस लड़ाई को पूरी तरह समझने के लिए हमें 2002 में जाना होगा. दरअसल कहानी उन्नाव जिले के माखी गांव के सराय थोक मोहल्ला से शुरू होती है. यहीं पर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का परिवार अगल-बगल रहता है. 2002 तक इन दोनों परिवारों के बीच बहुत गहरा रिश्ता था. इतना ही नहीं कुलदीप सिंह सेंगर को पहली बार विधायक बनाने में पीड़िता के परिवार ने भी खूब साथ दिया था. आखिर इतनी गहरी दोस्ती अचानक गहरी दुश्मनी में कैसे तब्दील हो गई?

प्रधानी चुनाव में शुरू हुई रंजिश
दरअसल, सियासत में दोस्ती और दुश्मनी के कोई मायने नहीं है. अगर कुछ मायने रखता है तो वह है 'मौका'. उन्नाव के इस मामले में भी यही हुआ. 2002 के प्रधानी के चुनाव के दौरान इस दुश्मनी की नींव पड़ी. दरअसल पीड़िता के पिता तीन भाई थे. तीनों की इलाके में दबंग की छवि थी. लेकिन कुलदीप सिंह सेंगर के विधायक बनने के बाद किसी बात को लेकर दोनों परिवारों में अनबन हुई और सेंगर ने तीनों भाइयों से किनारा कर लिया. इसी बात से नाराज तीनों भाइयों ने प्रधानी के चुनाव में विधायक को सबक सिखाने की ठानी.

प्रधानी के चुनाव में पीड़िता के ताऊ ने दी विधायक की मां को चुनौती
प्रधानी के चुनाव में पीड़िता के ताऊ खुद मैदान में उतरे. दूसरी तरफ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मां चुन्नी देवी प्रधान का चुनाव लड़ रही थीं. कहा जाता है कि विधायक ने उस वक्त गुड्डू सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों को हथियार बनाया और पीड़िता के ताऊ की उम्मीदवारी खारिज करवा दी. इसके बाद पीड़िता के ताऊ ने अपने करीबी दोस्त देवेंद्र सिंह (सड़क हादसे में घायल पीड़िता के वकील महेंद्र सिंह के भाई और रेप मामले में सीबीआई के गवाह) की मां को सामने खड़ा किया.

परिवार में पहली हत्या ताऊ की
चुनाव प्रचार के दौरान ही पहली बार दोनों परिवारों के बीच हथियारों का इस्तेमाल हुआ. पीड़िता के चाचा और सेंगर के भाइयों के बीच झड़प हुई और गोलियां भी चलीं. इसमें कई लोग घायल हुए. विधायक की तरफ से पुलिस केस दर्ज करते हुए पीड़िता के चाचा के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ. इसके बाद पीड़िता के परिवार में पहला क़त्ल हुआ. ताऊ की गांव में ही ईंट-पत्थरों से कुचलकर हत्या हो गई. उस वक्त भी परिजनों ने हत्या का इल्जाम विधायक पर लगाया था. इस हत्या के बाद पीड़िता का चाचा फरार हो गया. करीब 17 साल बाद वह 2017 में दिल्ली से गिरफ्तार हुआ. अब हत्या के प्रयास में वह रायबरेली जेल में 10 साल की सजा काट रहा है.

2017 से पीड़ित परिवार में तीन मौतें
4 जून 2017 को एक बार फिर इन परिवारों की रंजिश सामने आई. 17 वर्षीया पीड़िता ने आरोप लगाया कि विधायक सेंगर ने अपने घर में उसके साथ रेप किया. इस आरोप के बाद विधायक के भाई अतुल सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की बुरी तरह पिटाई कर पुलिस को सौंप दिया. मामले में पुलिस ने भी विधायक का साथ दिया और पिता को आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया. जहां दो दिन बाद उनकी मौत हो गई. यह परिवार में दूसरी मौत थी. इसके बाद रायबरेली सड़क हादसे में चाची और मौसी की मौत हो गई. चाची रेप मामले में सीबीआई की गवाह भी थीं. हादसे में खुद पीड़िता गंभीर रूप से घायल है.

अब परिवार में मर्द के नाम पर बस बच्चे
अब इस परिवार में मर्द के नाम पर पीड़िता का एक छोटा भाई और चाचा का एक बेटा है. चाचा खुद जेल में बंद हैं. पीड़िता हॉस्पिटल में है. घर में मां, दो बहनें और दो भाई ही हैं. विधायक के डर से कोई रिश्तेदार भी साथ नहीं दे रहा है.

यह भी पढ़ें :-

उन्नाव रेप केस में विधायक कुलदीप सेंगर दोषी करार, कल सुनाई जाएगी सजा
उन्नाव गैंगरेप : उठतीं अर्थियां और अस्पताल में मौत जंग, कब-कब क्या-क्या हुआ?
क्या अब चली जाएगी कुलदीप सेंगर की विधायकी, कितनी सजा होगी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए उन्नाव से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 16, 2019, 3:40 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर