उन्नाव ट्रांस गंगा सिटी मामला: मुआवजे को लेकर उग्र किसानों का सब स्टेशन पर हमला, आगजनी
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उन्नाव (Unnao) में रविवार को एक बार फिर किसान (Farmers) उग्र हो गए और उन्होंने ट्रांस गंगा सिटी एरिया (Trans Ganga City Area) के करीब 1 किलोमीटर की परिधि में बने सब स्टेशन पर हमला कर दिया. उग्र किसानों ने वहां आग लगा दी.

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उन्नाव. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य औद्योगिक विकास निगम की ट्रांस गंगा सिटी परियोजना (Trans Ganges City Project) के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा (Compensation) न मिलने से नाराज हजारों किसान उन्नाव में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार को किसानों के पुलिस से झड़प और जमकर प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने सख्ती बरती और मामला शांत होने का दावा किया था. लेकिन, रविवार को एक बार फिर किसान उग्र हो गए और उन्होंने ट्रांस गंगा सिटी एरिया के करीब 1 किलोमीटर की परिधि में बने सब स्टेशन पर हमला कर दिया. किसानों ने सब स्टेशन के पास पड़े प्लांट के पाइपों को आग के हवाले कर दिया. आगजनी की इस घटना से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गई हैं.

उधर उन्नाव के डीएम ने कहा कि ये प्रदर्शन किसानों का नहीं, कुछ अराजक तत्वों का है. इन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है. इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. डीएम ने कहा कि इन लोगों ने कुछ पाइपों और एक गाड़ी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि फोर्स के साथ गांव-गांव घूमकर हम स्थिति सामान्य होने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

बता दें शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों ने जेसीबी और गाड़ियों पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को बुलाना पड़ा. मौके पर 12 थानों की पुलिस और पीएसी की टुकड़ी को भी तैनात किया गया है. एक किसान नेता ने बताया कि हम लोग दो साल से लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी बात को नहीं सुन रही.



उचित मुआवजा न मिलने से गुस्से में किसान



किसानों का आरोप है कि वर्ष 2005 में बगैर समझौते के उनकी जमीनों को अधिगृहित कर लिया गया था. लेकिन, बदले में उन्‍हें उनका मुआवजा नहीं दिया जा रहा, इसके विरोध में आक्रोशित किसान सड़क पर उतरे हैं.

2003 में बनी थी ट्रांस गंगा हाई टेक सिटी योजना
वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में ट्रांस गंगा हाई टेक सिटी योजना बनी थी. उस समय किसानों की जमीन का मुआवजा इतना कम था कि उन्होंने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली थी. बाद में साल 2007 में जब प्रदेश में बीएसपी की सरकार बनी तो मुआवजे की दर 2.51 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.51 लाख रुपये कर दी गई. लेकिन यूपीएसआईडीसी योजना के तहत भूमि अधिग्रहण का काम वर्ष 2012 तक नहीं कर पाई.

इसके बाद 2012 में जब यूपी में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो विभाग ने किसानों की जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया. इसके विरोध में किसान सड़क पर उतर आए. किसानों की मांग थी कि पूर्व में जो दरें लागू की गई थीं, वो वर्तमान में बहुत कम हैं. इसलिए मुआवजे की राशि को बढ़ाया जाए.

इनपुट: अनुज गुप्ता

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