UP By Election: कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने से खाली पड़ी इस सीट पर जनता अब किसे पहनाएगी ताज, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

लगभग साढ़े तीन लाख मतदाताओं वाली इस मुस्लिम बाहुल्य सीट पर सपा और बसपा में ही आमने- सामने की टक्कर होती रही है. (फाइल फोटो)
लगभग साढ़े तीन लाख मतदाताओं वाली इस मुस्लिम बाहुल्य सीट पर सपा और बसपा में ही आमने- सामने की टक्कर होती रही है. (फाइल फोटो)

कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) के जेल जाने के बाद बांगरमऊ सीट पर राजनीतिक समीकरण काफी बदल गये हैं. यही वजह है कि भाजपा में भी कई अन्य टिकट के दावेदार उठ खड़े हुए हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में होने वाले उपचुनाव (By- Election) के लिए 3 नवम्बर को वोट पड़ेंगे. इनमें एक अहम सीट उन्नाव जिले की बांगरमऊ (Bangarmau) विधानसभा है. रेप कांड में दोषी करार दिये गये भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) की विधायकी जाने से ये सीट खाली हुई थी. 1967 में ही जनसंघ ने ये सीट जीती थी. लेकिन भाजपा को इसे जीतने में 50 साल लग गये. और किस्मत देखिये कि 2017 में मिली पहली जीत को भाजपा पूरे पांच साल भी संभाल नहीं पायी. इस सीट का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है. आंकड़े बताते हैं कि ये सीट ऐसी रही है जहां हमेशा राजनीति बदलती रही है. यहां की जनता ने न तो किसी कैण्डिडेट को और न ही किसी पार्टी को अपने सर पर बिठा कर रखा. अमूमन हर चुनाव में ताज बदलता रहा.

इसमें कोई दो राय नहीं कि इस हलके में कुलदीप सिंह सेंगर एक बड़ी राजनीतिक शक्ति रहे हैं. इस सीट पर सबसे ज्यादा मार्जिन से जीतने का रिकार्ड उनके नाम रहा है. फिर भी इस सीट के वोटरों ने सभी पार्टियों को सेवा का मौका दिया है. 1962 से अब तक कांग्रेस पांच बार, सपा तीन बार, बसपा दो बार और भाजपा एक बार इस सीट से विजयी रही है. बीच में दूसरी पार्टियों जैसे जनता दल, जनता पार्टी और भारतीय क्रान्ति दल को भी मौका मिला.

सेंगर के जेल जाने के बाद से राजनीतिक समीकरण काफी बदल गये हैं
कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने के बाद से राजनीतिक समीकरण काफी बदल गये हैं. यही वजह है कि भाजपा में भी कई अन्य टिकट के दावेदार उठ खड़े हुए हैं. ब्लॉक प्रमुख अरूण सिंह के नाम की चर्चा जोरों पर है तो दूसरी तरफ कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर भी भाजपा से टिकट की इच्छुक हैं. दूसरी तरफ सपा भी जीत के लिए गोट बिठा रही है. हालांकि, बसपा के उपचुनाव लड़ जाने से भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव की गुंजाइश बन गयी है.
सपा और बसपा में ही आमने- सामने की टक्कर


लगभग साढ़े तीन लाख मतदाताओं वाली इस मुस्लिम बाहुल्य सीट पर सपा और बसपा में ही आमने- सामने की टक्कर होती रही है. लेकिन सेंगर ने 2017 के चुनाव में भाजपा से लड़कर पार्टी को पहली बार जीत दिलाई थी. आईये जानते हैं कब कौन रहा विधायक.

1962 - पहली बार बनी ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. तब कांग्रेस के सेवा राम एमएलए चुने गये थे.
1967 - भारतीय जनसंघ के एस गोपाल
1969 - कांग्रेस के गोपालनाथ दीक्षित
1974 - भारतीय क्रांति दल के राघवेन्द्र सिंह
1977 - जनता पार्टी के सुंदर लाल
1980 - कांग्रेस (I) के गोपीनाथ दीक्षित
1985 - कांग्रेस के गोपीनाथ दीक्षित
1989 - जनता दल के अशोक कुमार सिंह
1991 - कांग्रेस के गोपीनाथ दीक्षित
1993 - सपा के अशोक कुमार सिंह बेबी
1996 - बसपा के रामशंकर पाल
2002 - बसपा के रामशंकर पाल
2007 - सपा के कुलदीप सिंह सेंगर
2012 - सपा के बदलू खान
2017 - भाजपा के कुलदीप सिंह सेंगर
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