उन्नाव गैंगरेप पीड़िता एक्सीडेंट: चाचा का आरोप, सुरक्षाकर्मी ही देता रहा विधायक को हर जानकारी

पीड़िता के चाचा की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में पुलिस ने बताया कि लड़की की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसके यात्रा प्लान की जानकारी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर और उसके सहयोगियों को दी है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 29, 2019, 10:54 PM IST
उन्नाव गैंगरेप पीड़िता एक्सीडेंट: चाचा का आरोप, सुरक्षाकर्मी ही देता रहा विधायक को हर जानकारी
पीड़ित परिवार का आरोप, सुरक्षाकर्मी ही आरोपी विधायक को देता रहा हर जानकारी. (फाइल फोटो)
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Updated: July 29, 2019, 10:54 PM IST
उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के एक्सीडेंट मामले में पीड़ित परिवार ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप लगाया है कि ‘कार एक्सीडेंट से लड़की को जान से मारने की साजिश थी’. पीड़िता के चाचा की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में पुलिस ने बताया कि लड़की की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसके यात्रा प्लान की जानकारी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर और उसके सहयोगियों को दी है. गौरतलब है कि रविवार को हादसे के समय लड़की की सुरक्षा में तैनात कोई भी पुलिसकर्मी उसके साथ नहीं था.

गनर का कुछ और ही है कहना

बता दें दुर्घटना के बाद से ही पीड़िता को मिली सुरक्षा के उसके साथ न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं मामले में पीड़िता का गनर सुरेश कुमार का कुछ और ही कहना है. रेप पीड़िता के गनर सुरेश कुमार ने कहा, 'जिस गाड़ी से वो लोग गए थे, वो छोटी गाड़ी थी. साथ चलने को लेकर मेरी उनसे जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है. पीड़िता और उनकी चाची ने कहा की कोई दिक्कत नहीं है, हम पांच लोग हैं और आप तीन लोग हैं. सभी गाड़ी में नही आ पाएंगे.'

पीड़िता के घर पर लगी थी होमगार्ड की ड्यूटी

गनर सुरेश कुमार का दावा है कि रेप पीड़िता के परिवार की तरफ से कहा गया कि आप लोग निश्चिंत रहें और हम शाम तक वापस आ जाएंगे. गनर सुरेश कुमार ने बताया कि हम तीन लोग है और होमगार्ड की ड्यूटी भी पीड़िता के घर पर लगी थी.

बता दें उन्नाव रेप पीड़िता के चाचा की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भी नाम दर्ज है. विधायक के भाई मनोज सिंह सेंगर और रिंकू पर भी नामजद एफआईआर दर्ज की गई है. विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई मनोज सिंह समेत कुल 25 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है.

आईपीसी की धारा 302, 307, 506, 120B के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है. मुकदमे में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र, हरिपाल मिश्र, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह और एडवोकेट अवधेश सिंह समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है. सड़क हादसे के बाद जहां एक ओर विपक्षी पार्टियां प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही हैं, वहीं पीड़िता के परिजन भी इसे हादसा नहीं मानते. उनका आरोप है कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर ही इस घटना को अंजाम दिया गया है.
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कुलदीप सिंह सेंगर


यह है मामला
उन्नाव के विधायक कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता, परिजनों समेत रविवार को रायबरेली में हादसे का शिकार हो गई. कार और ट्रक की टक्कर में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई, जबकि हादसे में वकील महेंद्र सिंह चौहान और रेप पीड़िता की हालत गंभीर है. वहीं प्रशासन ने ऐलान किया है कि दुर्घटना में घायल दोनों लोगों (रेप पीड़िता और उसके वकील) के इलाज के लिए राज्य सरकार सभी चिकित्सा खर्च वहन करेगी. बता दें, घायलों का किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है.

'विधायक की साजिश- पीड़िता और गवाह की हत्या'
पीड़िता की बहन का कहना है कि उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं. उनके ऊपर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था. विधायक की साजिश थी कि पीड़िता और गवाह की हत्या कर मामले को ही खत्म कर दिया जाए. उनकी मांग है कि दुर्घटना मामले की जांच सीबीआई से हो. इस बीच रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा ने लिखित तहरीर देते हुए इस मामले को भी मुख्य मामले के साथ जोड़कर सीबीआई को जांच सौंप दी जाए. हालांकि इस मामले में अभी तक विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके परिवारवालों की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन इस सड़क हादसे के बाद सीतापुर जेल में बंद विधायक कुलदीप सिंह सेंगर फिर चर्चा के केंद्र में हैं.

कौन हैं विधायक कुलदीप सिंह सेंगर?
मूल रूप से फतेहपुर जिले के रहने वाले बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की माखी गांव में तूती बोलती है. वे उन्नाव के अलग-अलग विधानसभा सीटों से चार बार से लगातार विधायक बने हैं. उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र के सराय थोक पर उनका ननिहाल है. वह यहीं आकर बस गए. कुलदीप सेंगर ने यूथ कांग्रेस से राजनीति की शुरूआत की और 2002 में भगवंतनगर से बीएसपी के टिकट पर विधायक बने. इसके बाद 2007 और 2012 में सपा के टिकट पर चुने गए. इसके बाद 2017 में बांगरमऊ से बीजेपी के टिकट पर चुनकर विधानसभा पहुंचे.

यूपी की सियासी हवा को भांपने में माहिर हैं सेंगर 
कुलदीप सिंह सेंगर के बारे में कहा जाता है कि वे यूपी की सियासत की हवा का रुख भांप लेते हैं. 1996 के चुनावों में 10 हजार वोटों से हारी हुई उन्नाव सदर की सीट से मायावती ने कुलदीप को उम्मीदवार बना दिया. इस चुनाव में कुलदीप ने कांग्रेस के प्रत्याशी शिव पाल को करीब चार हजार वोट से मात दे दी. इसके बाद से ही कुलदीप की छवि बाहुबली की बननी शुरू हो गई थी. इसके बाद 2007 में सपा के साथ हो लिए. सपा के टिकट पर वे 2012 में भी चुनाव जीत गए. लेकिन सपा का माहौल खराब हुआ तो 2017 में बीजेपी का झंडा पकड़ विधायक बन गए.

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First published: July 29, 2019, 10:37 PM IST
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