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UP Chunav: जनसंघ के जमाने से ही भगवा गढ़ रहा बरखेड़ा, क्या इस बार बीजेपी से यह सीट छीन पाएगी सपा

UP Chunav: जनसंघ के जमाने से ही भगवा गढ़ रहा बरखेड़ा, क्या इस बार बीजेपी से यह सीट छीन पाएगी सपा

यह क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यहां एकतरफा वोट मिलता दिखा था.

यह क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यहां एकतरफा वोट मिलता दिखा था.

UP Election 2022: पीलीभीत जिले की बरखेड़ा विधानसभा सीट (Barkheda Assembly Seat) पर समाजवादी पार्टी जहां मुस्लिम और छोटी-छोटी जातियों के साथ उम्मीदवार की बिरादरी मिलाकर चुनाव लड़ती है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी पूरे तरीके से हिंदुत्व के एजेंडे पर मैदान मारने में भरोसा करती है. बीते चार विधानसभा चुनाव में बीजेपी-सपा के बीच ही यहां मुकाबला रहा है.

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    क़याम रज़ा
    पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की बरखेड़ा विधानसभा सीट (Barkheda Assembly Seat) पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश की विधानसभा कही जा सकती है. पीलीभीत, बीसलपुर, पूरनपुर के मध्य का सारा ग्रामीण क्षेत्र इसी विधानसभा सभा (UP Chunav 2022) क्षेत्र में आता है. बरखेड़ा विधानसभा में बरखेड़ा के नाम से एक नगर पंचायत है. यहां की जनसंख्या में लोध किसान बिरादरी ज्यादा हैं. लोग मुख्यता खेती-किसानी से अपनी जीविका चलाते है. धान, गेंहू और गन्ना यहां की मुख्य फसल है. इस क्षेत्र की राजनीति भी लोध किसान नेताओं पर टिकी है. सभी पार्टियों से लोध किसान बिरादरी के नेता ही टिकट मांगने में जुटे हैं.

    यह क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यहां एकतरफा वोट मिलता दिखा था. इतना ही नहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में मंडल की सबसे बड़ी जीत बीजेपी के उम्मीदवार को मिली थी. हालांकि इस बार विधानसभा चुनाव में सपा यह सीट बीजेपी से छीनने की पूरी कोशिश कर रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी सांसद वरुण गांधी को सबसे ज्यादा वोट मिला था, इसलिए उनके लिए यहां बीजेपी उम्मीदवार को जिताकर भेजने की चुनौती होगी.

    बरखेड़ा विधानसभा का इतिहास
    1967 में परिसीमन होने के बाद पहला चुनाव हुआ और जनसंघ पार्टी ने अपना विधायक बनाया. इसके बाद वर्ष 1967, 1969 और 1974 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ पार्टी के किशोरी लाल लगातर तीन बार विधायक बने. वर्ष 1977 में भी किशोरी लाल लगातार चौथी बार विधायक बने, लेकिन इस बार वह जनता दल के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे. इसके बाद 1980 में कांग्रेस (आई) ने खाता खोला और यहां से बाबूराम ने जीत दर्ज की. हालांकि वर्ष 1985 के विधानसभा चुनाव में किशन लाल फिर बीजेपी के टिकट पर एमएलए बने. इसके बाद 1989 सन्नू लाल निर्दलीय जीते और फिर 1991 और 1993 में लगातार दो बार फिर बीजीपी से किशन लाल को जनता ने चुना. वहीं वर्ष 1996 और 2002 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार पीतमराम यहां जीत कर आये. इसके बाद 2007 में सुखलाल बीजेपी से जीत कर विधायक बने और फिर वर्ष 2012 में हेमराज वर्मा चुनाव जीते और सपा सरकार में मंत्री भी बने. वहीं वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते बीजेपी के किशन लाल राजपूत भारी मतों से जीत कर विधायक बने.

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    सपा भी देती रही है भाजपा को टक्कर
    यहां बीते कई बार के चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच टक्कर देखने को मिलती रही है. यहां पर कभी भाजपा तो कभी समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार विधायक बना है. इस विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले सपा के कद्दावर नेता हाजी रियाज अहमद का दबदबा रहता था. हालांकि कोरोनाकाल में रियाज की मौत के बाद सपा का दबदवा कम हुआ है. इस क्षेत्र में बीजेपी नेता और सांसद वरुण गांधी तथा उनकी मां मेनका गांधी का दबदबा सभी चुनाव में देखने को मिलता है. यहां समाजवादी पार्टी जहां मुस्लिम और छोटी-छोटी जातियों के साथ उम्मीदवार की बिरादरी मिलाकर चुनाव लड़ती है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी पूरे तरीके से हिंदुत्व के एजेंडे पर मैदान मारने में भरोसा करती है. बीते चार विधानसभा चुनाव में बीजेपी-सपा के बीच ही यहां मुकाबला रहा है.

    सामाजिक तानाबाना
    इस विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक दृष्टिकोण की बात करें तो इसकी अपनी कोई तहसील नहीं है. सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और सपा दोनों ने तहसील बनाने की कवायद की, लेकिन अभी तक इस विधानसभा को अपनी तहसील नसीब नहीं हुई है. पीलीभीत मुख्यालय से बीसलपुर, पूरनपुर और उतराखंड जाने वाले रोड के किनारे इस विधानसभा का क्षेत्र पड़ता है. बरखेड़ा विधानसभा सीट पूरी तरह से ग्रामीण है, इसलिये यहां के लोग आर्थिक रूप से खेती किसानी से जुड़े हैं. धान, गेंहू और गन्ना यहां की मुख्य फसल है, यहां बंगाली समुदाय के लोग अपनी कॉलोनी बनाकर रहते हैं. इन लोगों का मुख्य व्यवसाय बीड़ी बनाना और चटाई बनाना है. वहीं मुस्लिम आबादी लकड़ी के फर्नीचर बनाने के व्यवसाय से जुड़ी है.

    बरखेड़ा की जातिगत संरचना
    वर्तमान में यहां मतदाताओं की संख्या 3 लाख 14 हजार 991 है, जिसमें 1 लाख 68 हजार 650 पुरुष हैं, जबकि महिला मतदाता 1 लाख 46 हजार 332 हैं. वहीं जातिगत संरचना की बात करें तो यहां लोध किसान राजपूत 1 लाख 11 हजार के आस-पास, मुस्लिम 35 हजार के आस-पास, 25 हजार के आस-पास बंगाली समुदाय, 20 हजार जाटव, 17 हजार कुर्मी वोटर्स और करीब 10 हजार के आस-पास सिख वोटर हैं.

    पिछले विधानसभा चुनाव का हाल
    वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव यहां एक तरह मोदी लहर की आंधी चलती दिखी थी, जिसमें बरखेड़ा सहित जिले की सभी सीटों पर बीजेपी की जीत हुई. पिछली बार बीजेपी उम्मीदवार किशन लाल राजपूत ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा को 57930 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. इसे मोदी मैजिक ही कहा जा सकता है कि लोध किसान बहुल बरखेड़ा सीट पर एक बाहरी उम्मीदवार को इतना अपार जनसमर्थन मिला.

    इस बार फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में किशनलाल राजपूत बीजेपी से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं. 62 साल के विधायक किशन लाल राजपूत सरकारी मुलाजिम रह चुके हैं. वह ग्राम विकास अधिकारी के रूप में रायबरेली, बड़ौत और बरेली अपनी सेवा दे चुके हैं. विधायक बनने के बाद लोध किसान बिरादरी में उनका दबदबा बन गया है. उनकी छवि एक सीधे-सादे विधायक के रूप में है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में जंगल में सोलर तार फेसिंग कराई, यात्री शेड, श्मशान शेड, सीसी रोड, बारात घर बनवाया और बरखेड़ा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज को मंजूरी भी इसी कार्यकाल में मिली है.

    आने वाले 2022 चुनाव में बीजेपी से मौजूद विधायक किशन लाल राजपूत के अलावा स्वामी प्रवक्तानंद टिकट की दावेदारी में हैं. वहीं सपा से पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा और बुद्धसेन वर्मा भी दावा ठोक रहे हैं. उधर बसपा से अभी कोई उम्मीदवार ठीक से नज़र नहीं आ रहा है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में बरखेड़ा के लोग किसे विधायक बनाकर भेजते हैं यह देखने वाली बात होगी.

    Tags: BJP, Pilibhit news, Samajwadi party, UP chunav, UP Election 2022

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