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Noida News: ...तो क्या फिर खुल गई है नोएडा-ग्रेटर नोएडा को नगर निगम बनाने वाली फाइल!

तीनों ही अथॉरिटी ने देश ही नहीं विदेशों तक में एक खास पहचान बनाई है.

तीनों ही अथॉरिटी ने देश ही नहीं विदेशों तक में एक खास पहचान बनाई है.

ऐसा माना जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) से पहले इसका ऐलान किया जा सकता है.

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नोएडा. एक बार फिर यमुना-ग्रेटर नोएडा (Greater Noida Authority)  और नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) को नगर निगम बनाने की चर्चाएं शुरु हो गई हैं. हाल ही में सुपरटेक ट्वीन टावर केस में नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही कह लें या अनदेखी सामने आने के बाद इस तरह की चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि तीनों ही अथॉरिटी के काम करने के तरीके ने देश ही नहीं विदेशों तक में एक खास पहचान बनाई है. लेकिन बीते कुछ वक्त से अथॉरिटी की साख गिरती जा रही है. कई कोशिशों के बाद भी हालत सुधरने के बजाए और खराब होती जा रही है. कुछ तो कर्जदार भी हो गए हैं. बिल्डर्स भी अथॉरिटी का पैसा दबाकर बैठे हुए हैं. रेरा (Rera) बनाने के बाद भी तीनों अथॉरिटी की हालत में कोई खास सुधार नहीं आया है. फ्लैट बॉयर्स भी परेशान हैं. ऐसा माना जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) से पहले इसका ऐलान किया जा सकता है.

कैग, पीएम और सुप्रीम कोर्ट कर चुके हैं कमेंट

हाल ही में सुपरटेक के दो विवादित टावर के संबंध में आदेश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के बारे में बेहद तल्ख टिप्पणी की थी. लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं था जो किसी ने नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार को लेकर कमेंट किया हो.

2019 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान ग्रेटर नोएडा में एक जनसभा के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी ने अथॉरिटी में बड़ा भ्रष्टाचार होने का जिक्र करते हुए यूपी में बीजेपी सरकार आने के बाद भ्रष्टाचार कम होने की बात कही थी. सीएजी भी अपनी रिपोर्ट में खासतौर पर 5 साल के अंदर हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार होने की रिपोर्ट दी थी.

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यूपी सरकार तैयार करवा चुकी है रिपोर्ट

रेरा बनाने के बाद भी तीनों अथॉरिटी की हालत में कोई खास सुधार नहीं आया है. इसके बाद यूपी सरकार ने पूर्व चेयरमैन प्रभात कुमार को सरकार की ओर से एक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए कि “क्यों न इसे निगम बना दिया जाए.” इसके बाद अधिकारियों, कर्मचारियों और दूसरे लोगों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई.

रिपोर्ट सरकार को भी भेज दी गई. रिपोर्ट में कहा गया था कि अथॉरिटी का अपना एक सिस्टम है और उसकी देश ही नहीं विदेशों में भी पहचान है. इसलिए इसे निगम न बनाकर इसी सिस्टम में और सुधार कर दिए जाएं.

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