यूपी पंचायत चुनाव: पंचायतों में माननीयों के रिश्तेदारों का वर्चस्व, सीएम योगी ने कहा- अब कार्यकर्ता पहले

सीएम योगी ने कहा पंचायतों में कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए. (File)

सीएम योगी ने कहा पंचायतों में कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए. (File)

उत्तर प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जहां मंत्री, सांसद विधायकों के रिश्तेदारों का पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर वर्चस्व है या फिर सीधे काबिज़ हैं. शुक्रवार शाम हुई मीटिंग में सीएम योगी (CM Yogi) ने कहा कि पंचायतों में कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए. 

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की मीटिंग चर्चा में है. शुक्रवार शाम हुई मीटिंग में सीएम ने कहा कि पंचायतों में कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए. सीएम के इस फैसले के बाद ये चर्चा आम हो गई कि क्या पंचायतों में परिवारवाद का 'दि एंड' होने वाला है. दरअसल, यूपी के कई ऐसे जिले में जहां माननीयों के रिश्तेदार ब्लॉक प्रमुख से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक के पद पर काबिज हैं.

उत्तर प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जहां मंत्री, सांसद विधायकों के रिश्तेदारों का पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर वर्चस्व है या फिर सीधे काबिज़ हैं. मथुरा में कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण की पत्नी ममता चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर हैं जबकि भतीजा और भांजा सदस्य है. देवरिया में मंत्री सूर्य प्रताप शाही का बेटा सुब्रत शाही पथरदेवा ब्लॉक प्रमुख है. फतेहपुर में राज्यमंत्री रणवेन्द्र प्रताफ उर्फ धुन्नी सिंह का भतीजा ब्लॉक प्रमुख है जबकि बहू रेखा सिंह सदस्य क्षेत्र पंचायत हैं.

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 जानें पंचायतों का समीकरण
प्रतापगढ़ में कैबिनेट मंत्री मोती सिंह के भतीजे राकेश सिंह पट्टी के ब्लॉक प्रमुख हैं. गोंडा में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर काबिज केतकी सिंह सांसद बृजभूषण शरण सिंह की पत्नी हैं. कुशीनगर में बीजेपी सांसद विजय दूबे के पुत्र शशांक दुबे ब्लॉक प्रमुख हैं. आजमगढ़ में फूलपुर से बीजेपी विधायक अरुण कांत यादव की चचेरी भाभी अर्चना यादव ब्लॉक प्रमुख हैं. बहराइच जिले में महसी से विधायक सुरेश्वर सिंह की भाभी कृष्णावती देवी ब्लॉक प्रमुख हैं. रायबरेली में बीजेपी एमएलसी दिनेश सिंह के भाई अवधेश सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष हैं.

फेहरिस्त में कई ऐसे जनप्रतिनिधि शामिल हैं जिनके परिवार के लोगों और रिश्तेदारों का पंचायत के महत्वपूर्ण पदों पर रसूख है. समाजवादी पार्टी में तो यादव फैमिली से लेकर कई नेताओं के घरवाले जिला पंचायत सदस्य से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक हैं.  इटावा में मुलायम सिंह यादव के बहनोई अजंट सिंह बसरेहर के ब्लॉक प्रमुख हैं जबकि भतीजे दिवंगत रणवीर सिंह यादव की पुत्रवधू श्रीमती मृदुला यादव सैफई से ब्लॉक प्रमुख हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव इटावा जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं. कन्नौज के पूर्व सांसद प्रदीप यादव के भाई हरिओम यादव भरथना से ब्लॉक प्रमुख हैं जबकि आजमगढ़ में पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के भतीजे रंनू यादव  पल्हनी से ब्लॉक प्रमुख हैं. हमीरपुर में भी सपा नेता धर्मेन्द्र यादव के साले की पत्नी वंदना यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं हालांकि ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है. कन्नौज में एसपी विधायक अनिल दोहरे के छोटे भाई की पत्नी अनीता दोहरे गुगरापुर ब्लॉक प्रमुख है.

बीजेपी की खास रणनीति   



सियासी समीकरण के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में अब पंचायत चुनाव की तैयारी चल रही है. ऐसे में बीजेपी खास रणनीति बनाने में जुटी है वजह साफ है पंचायत चुनावों के बाद अगले साल विधानसभा के चुनाव भी होने हैं लिहाजा कार्यकर्ताओं का जोश हाई रहे इस बात पर फोकस किया जा रहा है. शुक्रवार को मंत्रियों के साथ हुई बैठक में सीएम योगी ने कहा पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिले. हालांकि इतिहास गवाह है कि यूपी में जिला पंयाचत अध्यक्ष के पदों पर सत्ताधारी पार्टी का ही वर्चस्व क़ायम रहा है.
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