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UP Polls 2022: इस BJP नेता पर जाति-धर्म का नहीं पड़ता कोई असर, लगातार 7 बार से हैं विधायक

UP Polls 2022: इस BJP नेता पर जाति-धर्म का नहीं पड़ता कोई असर, लगातार 7 बार से हैं विधायक

सतीश महाना पंजाबी हैं और जहां से चुनाव जीतते हैं उस सीट पर उनके समाज का वोट लगभग न के बराबर है.

सतीश महाना पंजाबी हैं और जहां से चुनाव जीतते हैं उस सीट पर उनके समाज का वोट लगभग न के बराबर है.

UP Assembly Election 2022: सतीश महाना बीते 30 वर्षों से लगातार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं. पांच बार कानुपर कैंट से लगातार विधायक चुने जाते रहे सतीश महाना को 2012 में परिसीमन के बाद सीट बदलनी पड़ी. अब वह कानपुर की महाराजपुर सीट से चुनाव लड़ते हैं.

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कानपुर/ममता त्रिपाठी: संगठन में कार्यकर्ताओं को कैसे जोड़ कर रखना है इस कला में सतीश महाना का कोई सानी नहीं है. सियासत की हर विधा में माहिर सतीश महाना जानते हैं कि कैसे विपक्ष के चक्रव्यूह को भेदना है. विपरीत परिस्थितयों में भी सतीश महाना भाजपा के टिकट पर कानपुर की महाराजपुर सीट से जीत कर विधानसभा पहुंचते रहें हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि सतीश महाना भाजपा के असली झंडाबरदार हैं, भाजपा के खराब दौर में भी वह पार्टी का दामन थामे रहे.

सतीश महाना बीते 30 वर्षों से लगातार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं. पांच बार कानुपर कैंट से लगातार विधायक चुने जाते रहे सतीश महाना को 2012 में परिसीमन के बाद सीट बदलनी पड़ी. अब वह कानपुर की महाराजपुर सीट से चुनाव लड़ते हैं. सतीश महाना के पिता राम अवतार महाना राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से लंबे समय तक जुड़े रहे जिसके चलते सतीश महाना बचपन से ही संघ की शाखा में जाने लगे थे.

लगातार 7 बार से विधायक सतीश महाना अब 8वीं बार की तैयारी कर रहे
उन्होंने बजरंग दल से राजनीति की शुरूआत की और संघ से नजदीकी के चलते भाजपा के टिकट पर 1991 में पहली बार विधायक बने और कल्याण सिंह की सरकार में उन्हें नगर विकास राज्य मंत्री का पद मिला. योगी सरकार में फिलहाल औद्योगिक विकास और अवस्थापना मंत्री हैं. कोविड महामारी के बाद हो रहे चुनाव में कैसी दिक्कतों का सामना आ रही हैं और किन मुद्दों को लेकर वह जनता के बीच जा रहे हैं इस सवाल के जवाब में सतीष महाना कहते हैं, मैं तो पूरे कोविड महामारी के दौरान अपने लोगों के बीच ही था. यहां के लोग मुझे भइया बोलते हैं, मैं उनके लिए परिवार हूं, नेता नहीं.

सतीश महाना कहते हैं, मैं जनता के विश्वास के चलते ही तो फिर से चुनावी मैदान में हूं. महाराजपुर विधानसभा सीट पर बहुत काम करना बाकी है. पिछले दो कार्यकाल में कोशिश की है जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की. जहां सड़क नहीं थी, जल निकासी की दिक्कत थी, वहां आज सड़क, बिजली, पानी सबकी व्यवस्था है. अगर आप काम नहीं करेगें तो जनता पांच साल बाद आपको घर बिठा देती है. कुछ तो वजह होगी ही कि जनता मुझे पिछले सात बार से लगातार जीता रही है.

सतीश महाना ने बताया कि मंत्री रहते उन्होंने यूपी के लिए क्या किया
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री हैं, कितनी नई फैक्ट्रियां लगी हैं प्रदेश में, कितना विदेशी निवेश आया है? इस सवाल का जवाब देते हुए सतीश महाना ने कहा, पिछली सरकारों में यह विभाग भ्रष्टाचार का पर्याय होता था. लोग डर की वजह से यूपी में निवेश के लिए नहीं आते थे. मगर अब हालात बदल चुके हैं. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी पहले देश में 16वें नंबर पर था अब दूसरे नंबर पर है. कानपुर के चमड़ा व्यवसायी खुद कह रहे हैं कि रमईपुर में बनने जा रहा मेगा लेदर क्लस्टर चमड़ा उद्योग के लिए संजीवनी की तरह है. डिफेंस कॉरिडोर के चलते काफी नौकरियां युवाओं को मिलेंगी. होजरी और रसोई के मसालों में कानपुर से किसी का कोई मुकाबला नहीं है.

सतीश महाना ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा ही नहीं है चुनाव में इसलिए बेकार की बातों में उलझाकर वोटरों को भ्रमित करना चाह रहे हैं. लेकिन वोटर काफी जागरूक हो चुका है. उसे पता है कि काम करने वाली सरकार कौन सी है. समाजवादी पार्टी ने सतीश महाना के खिलाफ फतेहबहादुर गिल को मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस पार्टी ने यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कनिष्क पांडे को टिकट दिया है. बसपा ने ओबीसी कार्ड खेलते हुए सुरेंद्र पाल को उम्मीदवार बनाया है.

सतीश महाना जहां से चुनाव जीतते हैं वहां उनके समाज का वोट न के बराबर
साल 2017 में सतीश महाना के खिलाफ सुरेंद्र पाल दूसर नंबर पर रहे थे. सतीश महाना पंजाबी हैं और जहां से चुनाव जीतते हैं उस सीट पर उनके समाज का वोट लगभग न के बराबर है. महाराजपुर विधानसभा सीट पर जातिगत आंकड़ो की बात करें तो ब्राह्मण वोटरों की संख्या 53 हजार है. पासी वोटर 40 हजार, जाटव 36 हजार, कुशवाहा 27 हजार, मुस्लिम 37 हजार, निषाद 24 हजार, यादव 26 हजार, पाल 30 हजार और क्षत्रिय वोटों की संख्या 40 हजार है. यानी सतीश महाना एक ऐसे नेता हैं जो जाति और धर्म के समीकरण से इतर अपनी लो​कप्रियता के दम पर चुनाव जीतते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान वह कभी लोगों को चाय बनाकर पिलाते हैं तो कभी इलेक्ट्रिक रिक्शा चलाने लगते हैं. उनकी पत्नी अनिता महाना भी महिलाओं की टोलियों के साथ घर-घर जाकर अपने पति के लिए वोट मांग रही हैं.

Tags: BJP, Kanpur news, UP Election 2022

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