UP: ई-स्टैम्पिंग करार के खिलाफ वेन्डर्स एसोसिएशन की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ई-स्टैम्पिंग करार के खिलाफ वेन्डर्स एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है. (File)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ई-स्टैम्पिंग करार के खिलाफ वेन्डर्स एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है. (File)

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी स्टैम्प वेन्डर्स एसोसिएशन की ई-स्टैम्प रूल्स 2013 के तहत अथराइज्ड कलेक्शन सेंटर बनाने पर रोक लगाने व स्टैम्प छापना बंद करने के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका (Petition) को खारिज कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2021, 9:53 PM IST
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इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने ई-स्टैम्प रूल्स 2013 के तहत अथराइज्ड कलेक्शन सेंटर बनाने पर रोक लगाने व स्टैम्प छापना बंद करने की आशंका को लेकर आल यूपी स्टैम्प वेन्डर्स एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के लाखों स्टैम्प वेन्डर्स को बड़ा झटका लगा है. वेन्डर्स एसोसिएशन (Vendors Association) को आशंका है कि सरकार ई-स्टैम्पिंग लागू कर स्टैम्प छापना बंद कर सकती है. इससे लाखों लोगों की आजीविका छिन जायेगी.

कोर्ट ने कहा कि स्टैम्प घोटाले को रोकने के लिए बनी ई-स्टैम्प नियमावली 13 के उपबंध याचियों के व्यापार व व्यवसाय सहित जीविकोपार्जन के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं करते. ई-स्टैम्पिंग करार रूल्स के तहत ही किये गये हैं. रूल्स की वैधता को चुनौती नहीं दी गई है और नये रूल्स से याचियों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता. ऐसा कोई आदेश नहीं हैं जिसमें सरकार ने स्टैम्प छापने पर रोक लगाई हो और कोर्ट सरकार को स्टैम्प छापने का आदेश नीतिगत मसला होने के नाते नहीं दे सकती.

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यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ के बीच मतभिन्नता के मुद्दे पर फैसला लेने के लिए गठित तीसरे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने दिया है. न्यायमूर्ति वर्मा ने न्यायमूर्ति केशरवानी के अभिमत का समर्थन किया है. न्यायमूर्ति भनोट ने याचिका को आजीविका व व्यापार के अधिकार के मुद्दे को विचारणीय मानते हुए सुनवाई के लिए केन्द्र व राज्य सरकार से जवाब मागा था. किन्तु न्यायमूर्ति केशरवानी ने याचियों के किसी अधिकार का उल्लंघन न होने के कारण याचिका खारिज कर दी थी.
मालूम हो कि प्रदेश में यूपी स्टैम्प रूल्स 1942 के तहत स्टैम्प विक्री लाइसेंसी वेन्डर्स द्वारा कमीशन पर की जाती है. लाखों वेन्डर्स प्रदेश में जिलाधिकारियों द्वारा नियुक्त हैं और कार्य कर रहे हैं. तेलगी स्टैम्प स्कैम के बाद केन्द्र सरकार ने ई-स्टैम्पिंग पर विचार शुरू किया और सरकार ने 2013 मे रूल्स बनाये, जिसके तहत स्टाक होल्डिंग कार्पोरेशन आफ इंडिया (,सेन्ट्रल रिकार्ड कीपिंग एजेन्सी) को अथराइज्ड कलेक्शन सेन्टर नियुक्त कर ई-स्टैम्प बिक्री की जिम्मेदारी दी गयी. यह व्यवस्था फर्जी स्टैम्प पर रोक लगाने के लिए की गयी है, जिसके तहत आनलाइन स्टैम्प जमा कराया जा रहा है.

याची एसोसिएशन की आशंका है कि इससे सरकार स्टैम्प छापना बंद कर देगी और उनके सदस्य बेरोजगार हो जायेगे. ऐसा करना अनुच्छेद 19(1)जी, अनुच्छेद 21व अनुच्छेद 38का उल्लंघन है. सरकार का कहना था कि व्यवसाय करना मूल अधिकार नहीं है. वेन्डर्स लाइसेंस की शर्तों के अधीन कार्य करते हैं. देश में 17हजार करोड़ के स्टैम्प मौजूद हैं, तो जीविका छिनने की आशंका गलत है. सरकार ने स्टैम्प छापने पर,रोक नहीं लगायी है. वेन्डर्स भी एसीसी नियुक्त हो सकते हैं. देश में इस समय तीन हजार अथराइज्ड कलेक्शन सेन्टर (ACC) हैं. यह व्यवस्था स्टैम्प स्कैम को रोकने के लिए जनहित मे लागू की गयी है, जिससे याची के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता.
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