करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोपी UPSIDC का चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा गिरफ्तार

चीफ इंजीनियर की गिरफ्तारी के  बारे में जानकारी देते पुलिस अधिकारी.
चीफ इंजीनियर की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी देते पुलिस अधिकारी.

कानपुर (Kanpur) की चकेरी थाने की पुलिस (Police) ने करोड़ों रुपये के घोटाले (Scam) के आरोपी UPSIDC के चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा को गिरफ्तार किया है. कल आरोपी को लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट (Corruption prevention court) में पेश किया जाएगा.

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  • Last Updated: October 27, 2020, 12:09 PM IST
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कानपुर. कानपुर पुलिस (Kanpur Police) ने यूपीएसआईडीसी (UPSIDC) के चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है. करोड़ों के घोटाले के मामले में अरुण मिश्रा की गिरफ्तारी की गई है. चकेरी थाना क्षेत्र के एक प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये के घोटाले का उन पर आरोप है. पिछले कई सालों से उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच चल रही है.

बता दें कि क्षेत्र कि चकेरी थाना क्षेत्र में चकेरी पाली रोड के निर्माण में घोटाले का मामला सामने आया था. 2012 में चकेरी में दर्ज मामले में अरुण मिश्रा सहित पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था, इसके बाद से अरुण मिश्रा फरार हो गये थे. गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस अरुण मिश्रा को लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश करेगी.

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इस घोटाले में आरोपी बनाए जाने के बाद अरुण मिश्रा को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन निलंबन के खिलाफ अरुण मिश्रा हाईकोर्ट चले गये थे. इस पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके खिलाफ पारित निलंबन आदेशों पर अंतरिम रोक दी थी. न्यायालय ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया यह स्थापित हो रहा है कि राज्य सरकार अरुण कुमार मिश्रा के खिलाफ दुर्भावना से कार्य कर रही है.
यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल सदस्यीय पीठ ने अरुण कुमार मिश्रा की याचिका पर दिया था. याचिका में 16 अप्रैल 2018 और 8 अक्टूबर 2018 के दो निलंबन आदेशों को चुनौती दी गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने समय दिए जाने की मांग करते हुए कहा था कि प्रकरण में उन्हें सरकार से समुचित दिशा-निर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं. इस पर न्यायालय ने कहा कि निलंबन आदेश 16 अप्रैल 2018 का है और अभी तक याची के खिलाफ विभागीय जांच पूरी करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है. इससे प्रथम दृष्टया यह स्थापित होता है कि सरकार याची के खिलाफ दुर्भावना से काम कर रही है.

बता दें कि अरुण कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ दायर एक अधिकार पृच्छा रिट याचिका हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2014 को मंजूर की थी. इस आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की जिस पर शीर्ष अदालत ने 29 सितम्बर 2018 को हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे दे दिया था.
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