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उत्‍तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी की बढ़ रही परेशानी, नाराजगी कहीं भारी न पड़ जाए 

उत्‍तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी परेशानियों से घिरी हुई है. ( सांकेतिक फोटो)

उत्‍तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी परेशानियों से घिरी हुई है. ( सांकेतिक फोटो)

उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh ) की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की अपनी ही परेशानियां हैं. शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) नाराज हैं. जयंत चौधरी और अब्दुल्ला आजम की मुलाकात पर अखिलेश यादव ने जिस तरह टिप्‍पणी दी है उससे नाराजगी जाहिर है.

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ममता त्रिपाठी 

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh ) की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party)    की अपनी ही परेशानियां हैं जो कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. महान दल के नेता संजय चौहान अपनी नाराजगी जाहिर कर ही चुके हैं, शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav)  नाराज हैं. जयंत चौधरी और अब्दुल्ला आजम की मुलाकात पर अखिलेश यादव ने जिस तरह टिप्‍पणी दी है उससे नाराजगी जाहिर है. जयंत को लेकर चर्चा है कि विधानसभा चुनावों के नतीजे के बाद से ही वो सपा-बसपा को छोड़कर एक नए सियासी गठबंधन बनाने को लेकर उत्सुक हैं और उसी पर काम कर रहे हैं. कुछ ऐसा ही हाल सुभासपा को लेकर भी है, अपने ट्विवटर हैंडल से तस्वीर साझा करते हुए लिखा है कि…”हैं तैयार हम” जिसमें शिवपाल की तस्वीर भी शामिल है. तो ये माना जाए कि बड़े ही गाजे बाजे के साथ 2022 में जिस “उम्मीद की बायसिकिल” पर ये सारे दल सवार हुए थे वो सब अब उतर रहे हैं.

राजनीति के जानकार कहते हैं कि समाजवादी पार्टी का इतिहास सहयोगियों को लेकर बहुत अच्छा नहीं रहा है. चाहे वो सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव हों या उनके बेटे मौजूदा सपा मुखिया अखिलेश यादव हों. पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों को जोड़कर रख पाने में काययाब नहीं हो पाती है. 2012 से 2017 तक सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार रही और अखिलेश इसके मुख्यमंत्री रहे मगर 2017 के विधानसभा चुनावों में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, “दो लड़कों की जोड़ी” बनी मगर वो चुनाव के तुरंत बाद ही आरोप प्रत्यारोप के बाद टूट गई.

एकला चलो की नीति के साथ आगे बढ़ते हुए फिर अखिलेश ने 2019 के लोकसभा चुनावों में धुर विरोधी रहीं मायावती के साथ हाथ मिलाया और ये दावा किया कि दोनों दल मिलकर भाजपा के कमल के फूल को कुचल देगें. मगर नतीजे आने के बाद इस गठबंधन को महज 15 सीटें ही मिल पाईं थी. “बुआ-बबुआ” का बहुप्रचारित गठजोड़ टूट कर रेशा रेशा हो गया. राजनीतिक प्रयोगधर्मी अखिलेश यादव 2022 में फिर से गठबंधन की सियासी नैया पर चढ़ गए मगर इस बार जो साथी चुने वो सब सियासी कद में काफी छोटे थे सपा के मुकाबले. लेकिन नतीजों के बाद इतिहास ने खुद को फिर दोहराया और सपा गठबंधन में खटपट चालू हो गई है.

Tags: Samajwadi party, Shivpal singh yadav, उत्तर प्रदेश

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