सोन‍िया गांधी के संसदीय क्षेत्र में पार्टी के पूर्व सांसद के बेटे समेत कई नौकरशाहों के खिलाफ FIR,जानें क्‍या है कमला नेहरू ट्रस्‍ट को लेकर मचा बवाल

सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में उनकी ही पार्टी की पूर्व सांसद शीला कौल के पुत्र विक्रम कौल, तत्कालीन एडीएम, कमला नेहरू ट्रस्ट के सचिव सुनील देव एवं गवाह सुनील तिवारी समेत कई लोगों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज हुई है.

Uttar Pradesh News: रायबरेली-प्रयागराज एनच 30 पर सिविल लाइंस पर करोड़ की कीमत की जमीन पर लंबे समय से बड़े-बड़े लोगो की नजरें लगी थी, जिसको पाने के लिए लंबे समय से राजनीतिक नेताओं ने अपने-अपने दांव चले.

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सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में उनकी ही पार्टी की पूर्व सांसद शीला कौल के पुत्र विक्रम कौल, तत्कालीन एडीएम एफआर मदन पाल आर्य, सब रजिस्ट्रार घनश्याम, प्रशासनिक अधिकारी विंध्यवासिनी प्रसाद, नजूल लिपिक राम कृष्ण श्रीवास्तव और कमला नेहरू ट्रस्ट के सचिव सुनील देव एवं गवाह सुनील तिवारी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज हुई है. डीएम के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद कांग्रेस खेमे से लेकर प्रशानिक तंत्र में हड़कंप मच गया है. सभी आरोपियों पर कागजों में हेराफेरी करके नजूल की जमीन का फ्री होल्ड कराने का आरोप लगा है.

रायबरेली के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने शहर कोतवाली में एक दर्जन लोगों पर एफआईआर दर्ज करवाई है. शहर कोतवाली पुलिस ने कमला नेहरू एजुकेशन सोसायटी से जुड़े लोगों के साथ-साथ रायबरेली के पूर्व एडीएम एफआर मदनपाल आर्या सहित कांग्रेस की पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे विक्रम कौल समेत 12 लोगो पर आईपीसी की धारा 417, 420, 467, 468, 471, 474 समेत सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 4 व 5 में मामला दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है.

बता दें कि रायबरेली-प्रयागराज एनच 30 पर सिविल लाइंस पर करोड़ की कीमत की जमीन पर लंबे समय से बड़े-बड़े लोगो की नजरें लगी थी, जिसको पाने के लिए लंबे समय से राजनीतिक नेताओं ने अपने-अपने दांव चले. कांग्रेस की पूर्व सांसद शीला कौल इस ट्रस्ट की फाउंडर सदस्यों में एक रहीं, उनके बेटे विक्रम कौल ने ट्रस्ट के नाम जमीन हथियाने के लिए तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर अभिलेखों में छेड़-छाड़ कर फ्रीहोल्ड करवाया, लेकिन करोड़ों की जमीन पर कब्जा नही मिल सका, क्योंकि इस जमीन पर दशकों से सैकड़ों परिवार काबिज होकर जीवन यापन कर रहे थे. पूर्व सपा सरकार में ट्रस्ट के सचिव और विक्रम कौल ने पूर्व सपा सांसद बाल कुमार के साथ करोड़ों रुपये का एग्रीमेंट किया, लेकिन फिर भी कब्जा नही पा सके और एग्रीमेंट कैंसल हो गया.

इसके बाद एक बार फिर कमला नेहरू एजुकेशनल सोसायटी के ट्रस्टियों ने कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए दिनेश सिंह के भाई ब्रजेश सिंह से 9 करोड़ रुपये से ज्यादा में एग्रीमेंट उस वक्त किया जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन चल रहा था. कोर्ट ने बीते साल इस जमीन को खाली करवाने के आदेश दिए, जिसके बाद लंबे जद्दोजहद के बाद बीती 16 दिसंबर 2020 को जिला प्रशासन ने जमीन को खाली करवा कर अपना बोर्ड लगा दिया और कार्रवाई शुरू कर दी. जिला प्रशासन ने मामले की बारीकी से जांच की तो इस मामले में अपर जिलाधिकारी तक मानकों को दरकिनार कर फ्रीहोल्ड करवाने और अभिलेखों में छेड़छाड़ पकड़ में आई तो आज एडीएम एफआर प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने शहर कोतवाली में मामला दर्ज करवाया है. अभिलेखों से छेड़छाड़ करने के आरोप में तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण पाल सिंह, प्रभारी कानूनगो प्रदीप श्रीवास्तव, लेखपाल प्रवीण कुमार मिश्रा, नजूल लिपिक छेदी लाल जौहरी का नाम भी शामिल है. ट्रस्ट के पदाधिकारियों और पूर्व नौकरशाहों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के मामले पर एसपी श्लोक कुमार ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट की जांच के बाद एडीएम एफआर प्रेम प्रकाश उपाध्याय की तहरीर पर शहर कोतवाली में पूर्व एडीएम मदनपाल आर्या, सब रजिस्ट्रार घनश्याम, तहसीलदार कृष्ण पाल सिंह सहित 12 लोगों पर धोखाधड़ी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुचाने के मामले की एफआईआर दर्ज की गई है.

कमला नेहरू ट्रस्ट की ईओडब्ल्यू जांच की मांग करने वाली कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह ने एक बर्फ फिर कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि इस ट्रस्ट में कांग्रेस से जुड़े लोगों ने सरकारी अधिकारियों से मिलकर अभिलेखों में छेड़छाड़ की, जिस काम के लिए जमीन ली वह काम कभी किया ही नहीं. मैं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और रायबरेली के डीएम वैभव श्रीवास्तव को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने ऐसे लोगो पर एफआईआर दर्ज करवाई है.

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