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एक कार्यक्रम में जब चाचा शिवपाल से मिले अखिलेश यादव तो छूए उनके पैर, पर...

रव‍िवार को सैफई मे अखिलेश यादव ने रिंग सेरीमनी मे शिवपाल सिंह यादव के पैर छूकर आर्शीवाद तो लिया है लेकिन बात कोई नहीं की

रव‍िवार को सैफई मे अखिलेश यादव ने रिंग सेरीमनी मे शिवपाल सिंह यादव के पैर छूकर आर्शीवाद तो लिया है लेकिन बात कोई नहीं की

Uttar Pradesh News: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सम्मान के मामले में कुछ राजनेताओं से बिल्कुल ही जुदा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने बड़ों का सम्मान करने से कभी पीछे नहीं रहते हैं.

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इटावा | भले ही अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से अलग हो अपने दल का सृजन कर चुके है लेकिन उनके सम्मान में कोई कमी नहीं आने देते है. इन सबसे बावजूद सैफई के लोग उन तस्वीरों को देखने के लिए व्याकुल बने हुए कि वो दिन कब आएगा जब अखिलेश यादव को आर्शीवाद देने की कड़ी मे शिवपाल सिंह अपने गले से लगाएंगे. पहला मौका नहीं है जब शिवपाल सिंह यादव के पैर अखिलेश यादव ने छुए है इससे पहले कई दफा अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह के पैर छूकर आर्शीवाद ले चुके है. रव‍िवार को सैफई मे अखिलेश यादव ने रिंग सेरीमनी मे शिवपाल सिंह यादव के पैर छूकर आर्शीवाद तो लिया है लेकिन बात कोई नहीं की.

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सम्मान के मामले में कुछ राजनेताओं से बिल्कुल ही जुदा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने बड़ों का सम्मान करने से कभी पीछे नहीं रहते हैं. रव‍िवार को सैफई में दीपाली की रिंग सेरेमनी के मौके पर जी बिल्कुल ही ऐसा देखा गया है, जहां समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव के पैर छुए. यह अलग बात है कि वो उनसे दूरी बना कर अपने दूसरे चाचा प्रो रामगोपाल यादव के साथ पंडाल में बैठे.

समाजवादी पार्टी में लंबे अर्से से चल रहे सत्ता संग्राम के बीच यह कोई पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव के चरण स्पर्श किए हो. इससे पहले भी कई दफा शिवपाल सिंह यादव के चरण स्पर्श अखिलेश यादव कर चुके हैं. जब-जब शिवपाल सिंह यादव को लेकर के अखिलेश यादव से सवाल पूछा जाता है तो उनकी तरफ से यही जवाब दिया जाता है कि वह मेरे चाचा हैं और आगे भी चाचा ही रहेंगे. यह बात अलग है कि वह अपना अलग दल बना चुके हैं.



दीपावली के मौके पर इटावा में सिविल लाइन स्थित आवास पर पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि जसवंतनगर निर्वाचन क्षेत्र चाचा की सीट है इसलिए इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कोई दावा नहीं रहेगा और अगर उत्तर प्रदेश में 2022 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो उनको कैबिनेट मंत्री भी बनाया जाएगा लेकिन इस ऑफर को शिवपाल सिंह ने यह कह कर के ठुकरा दिया कि उनकी स्थिति क्या एक सीट मात्र की है. इससे ऐसा प्रतीत होता हुआ दिखाई देता है कि वह अखिलेश यादव की बात से सहमत नहीं है और जसवंतनगर के अलावा कई और सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतारना चाहते है.
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में अब की बार छोटे दलों से गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहते हैं, जिसमें शिवपाल सिंह यादव की पार्टी से भी अखिलेश यादव का गठबंधन होना तय माना जा रहा है लेकिन अभी वार्ता किसी भी स्तर पर नहीं हो सकी है. इसको लेकर के दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच कहीं ना कहीं असमंजस की स्थिति बनी हुई है. पिछले साल सैफई में आयोजित होली कार्यक्रम के मंच पर अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव के चरण स्पर्श छूकर आर्शीवाद लिया था. अखिलेश यादव ने अपनी सादगी दिखाते हुए मंच पर चढ़ते ही चाचा शिवपाल के पैर तो छुए लेकिन बात करने से बचते रहे.

नोट: साल 2018 मे सैफई मे होली के अवसर पर शिवपाल सिंह यादव का पैर छूकर आर्शीवाद लेते अखिलेश यादव साल 2020 मे भी सैफई मे 2019 की तरह आर्शीवाद लिया गया .
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