यूपी पंचायत चुनाव को लेकर आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब क्‍या होगा? यहां जानें सारे अपडेट्स

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UP gram pradhan aarakshan list 2021: हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची फ‍िर से जारी होगी. इसके लिए कोर्ट ने राज्‍य चुनाव आयोग और प्रदेश सरकार को दस द‍िनों का समय द‍िया है.

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    उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद से स्‍थिति पूरी तरह से बदल गई है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के बाद से अब पंचायत चुनाव कराने में और समय लगेगा. वहीं कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया है क‍ि 25 मई तक नई व्यवस्था के तहत पंचायत चुनाव कराए जाएं. कोर्ट के इस फैसले से जहां कई लोग खुश है तो कई लोग दुखी हैं क्‍योंकि कई ग्राम पंचायतों के समीकरण भी अब बदल जाएंगे.

    क्‍या होगा हाईकोर्ट के फैसले का असर
    - पंचायत चुनाव के ल‍िए आरक्षण लिस्ट फिर से बनेगी.
    - इसके चलते कई ग्राम पंचायतों में चुनावी समीकरण बदल जाएंगे.
    - राजनीत‍िक दलों ने उम्‍मीदवारों को जो सूची तैयार कर ली थी उसमें बदलाव करने होंगे.
    - चुनाव में देरी होगी और नतीजे भी देरी से आएंगे.
    - बोर्ड एग्‍जाम के साथ हो सकता है चुनावों की तारीख का टकराव.



    क्‍या है हाईकोर्ट का आदेश
    - राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग से कहा कि 2015 को आरक्षण का बेस वर्ष मानकर काम पूरा किया जाए
    - पंचायत चुनाव का काम 25 मई तक पूरा करने का आदेश दिया है.
    - 27 मार्च तक आरक्षण लिस्ट भी फाइनल करने को कहा गया है.
    - पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कोर्ट ने 10 दिन का समय और बढ़ा दिया.

    क्‍या कहना था याच‍िकाकर्ता का कहना 
    अजय कुमार ने राज्य सरकार के 11 फरवरी 2011 के शासनादेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिका में कहा गया था कि इस बार की आरक्षण सूची 1995 के आधार पर जारी की जा रही है, जबकि 2015 को आधार वर्ष बनाकर आरक्षण सूची जारी की जानी चाहिए. इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अंतिम आरक्षण सूची जारी किए जाने पर रोक लगा दी थी.

    याचिकाकर्ता का कहना है कि साल 1995 के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था से जहां सामान्य सीट होनी चाहिए थी, वहां पर ओबीसी कर दिया गया और जहां ओबीसी होना चाहिए, वहां एससी के लिए आरक्षित कर दी गई है. इससे चुनाव लड़ने वालों में निराशा है. लिहाजा शासनादेश को रद्द कर वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए.

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