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Varanasi News: काशी के 238 साल पुराने इस रामलीला का मंचन रद्द,भक्तों में मायूषी

Varanasi

Varanasi 238 year Old world Famous Ramanagar Ramleela cancelle

भोले की नगरी काशी (Kashi) में लगातार दूसरे साल भी रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का मंचन नहीं हो रहा है.

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    भोले की नगरी काशी (Kashi) में लगातार दूसरे साल भी रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का मंचन नहीं हो रहा है. कोरोना के कारण काशी राज परिवार के मुखिया कुंवर अनंत नारायण सिंह ने 238 साल पुराने रामलीला को रद्द कर दिया. लेकिन फिर भी प्रभु श्रीराम और इस लीला में श्रद्धा रखने वाले भक्त लीला देखने की लालसा से रामलीला स्थल पहुंच रहे हैं. लीलास्थल पर रामलीला का मंचन नहीं होता देख भक्त मायूष होकर वापस लौट रहे हैं.

    रामनगर की रामलीला (Ramnagar Ramleela) में चार पीढ़ियों से रामचरितमानस की चौपाई करने वाले जौहरी परिवार के मुखिया लखन लाल जौहरी ने बताया कि कोरोना के कारण इस बार रामलीला का मंचन नहीं हो रहा है, फिर भी हम लोग जिन जगहों पर लीला होती है वहां पूरे महीने भर आकर प्रभु श्रीराम का सिमरन करते हैं.
    पेट्रोमेक्स की लाइट में होता है मंचन
    21 वीं शताब्दी में भी रामनगर की रामलीला का मंचन पेट्रोमेक्स की लाइट में होता है. लीला में किसी तरह के लाउडस्पीकर और माइक का प्रयोग नहीं होता लेकिन फिर भी दूर तक बैठे भक्तों को इसकी आवाज सुनाई देती हैं. अनंत चतुर्दशी से शुरू होने वाले इस खास रामलीला का मंचन पूरे 30 दिनों तक होता है.

    1783 में शुरू हुई थी रामलीला
    सन 1783 में काशी नरेश उदित नारायण सिंह ने इस रामलीला की शुरुआत की थी. तब से ये लीला उसी अंजाद में चल रही है, जिस तरह से शुरू हुई थी. दुनिया की ये पहली ऐसी रामलीला है जिसका मंचन पांच किलोमीटर के क्षेत्र में होता है. अलग- अलग दिन अलग-अलग जगहों पर इसका मंचन किया जाता है. खास बात ये भी है कि लीला को देखने के लिए आज भी कुर्सी और सोफे नहीं लगाए जाते फिर भी हजारों श्रद्धालु इस रामलीला का मंचन देखने के लिए यहां आते हैं.

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