141 दिन बाद खुला काशी के कोतवाल काल भैरव का मंदिर, भव्य आरती के साथ दर्शन शुरू
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141 दिन बाद खुला काशी के कोतवाल काल भैरव का मंदिर, भव्य आरती के साथ दर्शन शुरू
काशी के कोतवाल काल भैरव का मंदिर खुल गया है.

फिलहाल काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) में गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश अभी पूरी तरह से बंद है. महंत नवीन गिरी ने बताया कि डिस्टेंसिंग, थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजेशन से जुड़े नियमों का पूरा पालन कराया जा रहा है.

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वाराणसी. कोरोना संक्रमण (COVID-19) की वजह से बंद चल रहे काशी के कोतवाल काल भैरव (Kaal Bhairav) का मंदिर भक्तों के लिए शुक्रवार से खुल गया. 141 दिन बाद बाबा के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे. वाराणसी (Varanasi) में काशी के कोतवाल (Kashi Ke Kotwal) की बड़ी महिमा है. मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ काल भैरव का दर्शन भी अनिवार्य होता है. खुद पुलिस की कोतवाली में कोतवाल की कुर्सी पर इंस्पेक्टर नहीं बल्कि काल भैरव विराजते हैं.

22 मार्च को बंद हुआ था मंदिर

धार्मिक मान्यता है कि यहां का न्याय कोतवाल की चौखट पर ही होता है, इसलिए यहां पीएम नरेंद्र मोदी ने भी काल भैरव के दर्शन करने के बाद ही अपना चुनावी नामांकन कराया था. मंदिर के पट वैश्विक महामारी कोरोना के कारण 22 मार्च को बंद हुए थे. जब से कोरोनाकोरोना संक्रमण (COVID-19) की वजह से बंद चल रहे काशी के कोतवाल काल भैरव (Kaal Bhairav) का मंदिर भक्तों के लिए शुक्रवार से खुल गया. 141 दिन बाद बाबा के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे.



मान्यता: बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ काल भैरव के दर्शन अनिवार्य
वाराणसी (Varanasi) में काशी के कोतवाल (Kashi Ke Kotwal) की बड़ी महिमा है. मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ काल भैरव का दर्शन भी अनिवार्य होता है. खुद पुलिस की कोतवाली में कोतवाल की कुर्सी पर इंस्पेक्टर नहीं बल्कि काल भैरव विराजते हैं. संक्रमण काल शुरू हुआ, तब से काल भैरव का मंदिर बंद है. बीच में जब श्री काशी विश्वनाथ समेत अन्य मंदिर खोलने की स्वीकृति भी प्रशासन से मिल गई, तब भी काशी के कोतवाल काल भैरव का मंदिर नहीं खुल सका. वजह थी कि तंग गलियों में सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन न हो पाना.

दूसरा मंदिर के मुख्य द्वार के दोनों ओर दुकानें होने की वजह से रास्ता भी तंग हो जा रहा था. इसी के चलते बीते 141 दिनों से कोतवाल का दरबार बंद था लेकिन शुक्रवार को 141 दिन बाद प्रशासनिक स्वीकृति से बाबा का दरबार आम भक्तों के लिए खोल दिया गया.

मंगला आरती के बाद भक्तों को हुए दर्शन

भोर में सुबह 5 बजे बाबा की भव्य आरती के साथ कपाट खुल गए. मंगला आरती के बाद शुक्रवार को बाबा कालभैरव ने अपने भक्तों को दर्शन दिए. इस दौरान दौरान महामारी एक्ट और कोविड-19 से जुड़े नियमों का अनुपालन का पूरी तरह से पालन होते दिखा. गेट पर ही बाबा विश्वनाथ की तर्ज पर भक्तों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई. इसके साथ ही गेट पर सैनेटाइज भी किया गया.

फिलहाल गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश अभी पूरी तरह से बंद है. महंत नवीन गिरी ने बताया कि डिस्टेंसिंग, थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजेशन से जुड़े नियमों का पूरा पालन कराया जा रहा है.
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