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    स्टेशन के बाद अब रेल इंजन कारखाने का नाम पड़ा बनारस, जारी हुई अधिसूचना

    देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस कारखाने की नींव रखी थी.
    देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस कारखाने की नींव रखी थी.

    वाारणसी स्थित डीजल रेल इंजन कारखाने का नाम बदलकर बनारस रेल इंजन कारखाना (Banaras Rail Engine Factory) रखा गया है. यानी अब ये डीएलडब्ल्यू नहीं बीएलडब्ल्यू कहलाएगा. रेल मंत्रालय की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है.

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    वाराणसी. धार्मिक नगरी वाराणसी की एक पहचान यहां स्थापित डीजल रेल इंजन कारखाने से भी है. जिसे लोग पहले डीएलडब्लू के नाम से जानते थे. लेकिन अब इसकी पहचान भी बदल गई है. इसका नाम डीजल रेल इंजन कारखाने से बदलकर बनारस रेल इंजन कारखाना (Banaras Rail Engine Factory) हो गया है. यानी अब ये डीएलडब्ल्यू नहीं बीएलडब्ल्यू कहलाएगा. रेल मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद सरकारी औपचारिकताएं पूरी करने का काम शुरू हो गया है.

    इससे पहले बीते महीने मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस कर दिया गया. यानी जिस वाराणसी को पूरी दुनिया में आम बोलचाल की भाषा में लोग बनारस नाम से जानते थे, उस शहर में पहले बनारस नाम से कुछ भी नहीं था, लेकिन अब यहां रेलवे स्टेशन से लेकर इंजन कारखाना तक बनारस नाम से हो गया है.

    देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पूर्वी- उत्तर भारत को रोजगार से जोड़ने के लिए इस कारखाने की नींव रखी थी. जबकि वाराणसी के लाल और तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 3 जनवरी 1964 को इस कारखाने का लोकार्पण किया था. साल 1961 से अब तक यानी 58 साल के इस सफर में इस कारखाने ने कई डीजल रेल इंजन का उत्पादन किया. इस बीच समय के साथ कदमताल मिलाते हुए इस कारखाने में इलेक्ट्रिक रेल इंजन का भी निर्माण शुरू हो गया.



    पीआरओ अशोक कुमार ने बताया कि यहां के कर्मचारियों के हुनर के बदोलत ही इस कारखाने से आरडीएसओ रेलवे बोर्ड के जरिए 11 देशों में निर्यात होता है. यूं तो समय के साथ इस कारखाने ने अपने नाम कई रिकार्ड दर्ज किए, लेकिन मोदी सरकार में इस कारखाने ने रिटायर इंजनों से नए इंजन यानी विश्व के पहले कन्वर्जन इंजन बनाने का रिकार्ड बनाया. मार्च 2018 में पटियाला से आए 18 से 20 साल पुराने इंजन पर काम शुरू हुआ. जिसके बाद दस हजार हॉर्सपावर का कनवर्जन लोको तैयार करने का रास्ता खुला. बाद में तैयार हुए दो और कनवर्जन इंजन की 12 हजार हार्सपावर क्षमता रही.
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