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15 सालों से एक भी चुनाव ना जीते पाने वाले अतीक अहमद ने क्यों चुनी वाराणसी सीट

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 29, 2019, 6:15 PM IST
15 सालों से एक भी चुनाव ना जीते पाने वाले अतीक अहमद ने क्यों चुनी वाराणसी सीट
अतीक अहमद लड़ेंगे वाराणसी से चुनाव

बीते 15 सालों से अतीक अहमद ने कोई चुनाव नहीं जीता. ऐसे में उसका वाराणसी से चुनाव लड़ना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है.

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सोमवार को बाहुबली अतीक अहमद ने पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल. फिलहाल अतीक प्रयागराज के नैनी जेल में बंद हैं. बीते दिनों ये खबर आ रही थी कि अतीक फूलपुर से चुनाव लड़ सकते हैं. पर जैसे ही कोर्ट ने अतीक कि पैरोल की अर्जी खारिज की वैसे ही अतीक के प्रतिनिधि शाहनवाज ने उनकी तरफ से पर्चा भर दिया.

बीते 15 सालों से अतीक अहमद ने कोई चुनाव नहीं जीता. ऐसे में उसका वाराणसी से चुनाव लड़ना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है. दरअसल, अतीक मुस्लिम समुदाय की जिस गद्दी बिरादरी का नेता है उसका प्रभाव सिर्फ इलाहाबाद और फुलपुर के आसपास ही है. फिर वाराणसी को चुनने के पीछे मात्र का कारण प्रतिद्वंदियों को राजनीतिक संदेश देना ही हो सकता है.

2004 के बाद नहीं जीते कोई चुनाव
इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले अतीक अहमद ने इस सीट से लगातार 5 बार (1989,1991, 1996, 2002, 2004) चुनाव जीता था. इस सीट पर अतीक अहमद का मजबूत प्रभाव माना जाता था. जिले की कई बड़ी अल्पसंख्यक आबादी वाले इस विधानसभा सीट में आते हैं. करीब डेढ़ दशक तक अतीक ने अजेय होकर इस सीट पर विजय पाई. उन्हें टक्कर देने की स्थिति में किसी भी दल का कोई प्रत्याशी नहीं था. 2004 के लोकसभा चुनाव में अतीक अहमद फूलपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने पहुंचे जहां उन्होंने जीत हासिल की. और यही वो आखिरी चुनाव था जब अतीक जीते. उसके बाद करीब पिछले 15 सालों से अतीक चुनाव में जीत के लिए तरस रहे हैं.


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राजू पाल हत्याकांड और राजनीतिक वर्चस्व
2004 में हुए विधानसभा के उपचुनाव में राजू पाल ने इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर अतीक अहमद के भाई अशरफ को चुनाव हरा दिया था. इसके कुछ ही समय बाद जनवरी 2005 में विधायक राजू पाल की बेहद निर्मम हत्या हुई थी जिसमें आरोपियों में अतीक अहमद भी शामिल थे. बाद में इस सीट पर राजू पाल की पत्नी पूजा पाल चुनाव जीती थीं. इस कांड की वजह से अतीक अहमद के वर्चस्व में तो मजबूती आई लेकिन उनका राजनीतिक करियर धीरे-धीरे कमजोर हुआ. 2009 में उन्होंने प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार मिली. 2014 का चुनाव अतीक अहमद ने श्रावस्ती लोकसभा सीट से लड़ा था लेकिन उनकी बुरी हार हुई थी.

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First published: April 29, 2019, 6:15 PM IST
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