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पीएम नरेन्द्र मोदी का सपना साकार कर रही हैं बनारसी महिलाएं, बना रही लकड़ी के खिलौने

बनारसी महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं.

बनारसी महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं.

नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) में घूंघट में रहने वाली महिलाएं अब पीएम (PM) का सपना साकार करने के लिए आत्मनिर्भर बन रही हैं.

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वाराणसी. नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) में घूंघट में रहने वाली महिलाएं अब पीएम (PM) का सपना साकार करने के लिए आत्मनिर्भर बन रही हैं. वो पीएम मोदी के उस सपने में अपना अहम योगदान देने की तैयारी कर रही हैं, जिस सपने में पीएम मोदी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लघु उद्योग में लकड़ी के खिलौनों को एक नई पहचान दी है. एक तरफ देश में लकड़ी के खिलौनों का मेला चल रहा है तो वहीं ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब इन खिलौनों के कारीगरी महिलाएं अपना नया रास्ता बनाने जा रही है. इसमें मुख्य भूमिका निभा रही है केंद्र सरकार की वो योजना, जिसके अंतर्गत महिलाएं अब शिल्पी महिलाएं बन रही हैं. अब लकड़ी के पर शिल्प की कारीगरी में महिलाओं का भी बड़ा योगदान होने जा रहा है, जिसकी शुरुआत वाराणसी से हो चुकी है. जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शिल्प कारीगरी बन रही हैं.

धर्म नगरी बनारस हस्तशिल्प कारीगरों का ऐसा शहर है जिनकी कारीगरी के चर्चे पूरे विश्व में है. ऐसी कारीगरी ने बनारस के लकड़ी के खिलौनों को एक विश्व में पहचान दिलाई और साथ ही पीएम मोदी को भी कायल किया. अब बनारस किस कारीगरी को निकाल रही हैं घर की यह महिलाएं जिन्होंने अब तक घुंघट के अंदर रहकर सिर्फ घर की रोशनी चलाई है, लेकिन अब यह कारीगरी के इस गुण को शीघ्र कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. यह महिलाएं अब लकड़ियों पर सिर्फ की ऐसी कारीगरी पेश कर रही हैं जो आने वाले समय में विश्व प्रसिद्ध बनेगा इनके लिए बकायदा इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह प्रशिक्षण जनवरी के मध्य में शुरू हुआ है और पूरे मार्च तक चलेगा.

प्रशिक्षण के साथ आय भी
प्रशिक्षक उदय राज कुन्देल ने बताया कि इस प्रशिक्षण के अंतर्गत महिलाओं को लकड़ी के सभी प्रकार के खिलौने बनाना सिखाया जा रहा है. वस्त्र मंत्रालय और डीआईओएस मिलकर इस प्रशिक्षण को शुरू किया है. इसके अंतर्गत यहां सीखने वाली महिलाओं को ₹300 प्रतिदिन भी प्राप्त होंगे. वाराणसी का कश्मीरी गंज, जहां लगभग 4:30 सौ परिवार लकड़ी के खिलौनों के कारोबार अपनी रोजी-रोटी चलाता है. अब तक इस मोहल्ले सिर्फ पुरुष कारीगर ही तैयार होते थे, लेकिन अब इनके घर की महिलाएं भी कारीगरी में हाथ आजमा रही हैं. लकड़ी के खिलौनों पर कारीगरी करना अब यह धीरे-धीरे सीख चुकी हैं.
बना रही ये खिलौने


लकड़ी की गुड़िया लकड़ी के पर माला सिंदूर दानी प्रतिमा अब इनके लिए बनाना आसान हो गया है. यह हाथों से रंग भरने के साथ ही अब मशीनों पर भी हाथ चलाना सीख गई है. तरह-तरह के आकर्षक लकड़ी के खिलौने तैयार कर रही हैं. इन्हें प्रशिक्षित करने वाले राज पटेल का कहना है कि जब यह पूरी तरीके से प्रशिक्षण हासिल कर लेंगे और पूर्ण कारीगर बन जाएंगी तो इन्हें अन्य पुरुष कारीगरों की तरह ही ऑर्डर दिए जाएंगे. आर्डर पर उन खिलौनों को तैयार करेंगे जिसका इन्हें पूरा मेहनताना दिया जाएगा. कश्मीरी गंज में अलग-अलग कारोबारियों किया यह शिविर लगाया गया है. लगभग 200 महिलाएं अलग-अलग टीम में यह प्रशिक्षण हासिल कर रही हैं. महिलाएं प्रत्येक दिन यहां 4 घंटे लकड़ी के खिलौने बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं.
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