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Varanasi News:काशी के घाटों पर सिर्फ पांच दिनों तक होती है भीष्म की पूजा,जानिए क्या है मान्यता

Varanasi News:काशी के घाटों पर सिर्फ पांच दिनों तक होती है भीष्म की पूजा,जानिए क्या है मान्यता

वाराणसी

वाराणसी में पांच दिनों तक होती है भीष्म की पूजा

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (Kashi) अपनी परम्पराओं के लिए दुनियाभर में मशहूर है. इन्ही परम्पराओं में से एक है गंगा पुत्र भीष्म (Bhishma Puja) की पूजा जो सिर्फ और सिर्फ काशी में होती है. काशी के घाटों पर पांच दिनों तक महिलाएं गंगा स्नान के बाद खास तरीके से भीष्म की पूजा करती हैं.

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    बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (Kashi) अपनी परम्पराओं के लिए दुनियाभर में मशहूर है. इन्ही परम्पराओं में से एक है गंगा पुत्र भीष्म (Bhishma Puja) की पूजा जो सिर्फ और सिर्फ काशी में होती है. काशी के घाटों पर पांच दिनों तक महिलाएं गंगा स्नान के बाद खास तरीके से भीष्म की पूजा करती हैं.ऐसी मान्यता है कि प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक गंगा स्नान के बाद भीष्म की पूजा से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती हैं.

    गंगा पुत्र भीष्म की पूजा के लिए वाराणसी (Varanasi) के तमाम घाटों पर गंगा की मिट्टी से अस्थायी मूर्ति बनाकर पांच दिनों तक उनकी पूजा की जाती हैं. वाराणसी के तुलसी घाट,केदार घाट,रामघाट,पंचगंगा घाट के अलावा अन्य महत्वपूर्ण घाटों पर ये पूजा होती है.मान्यता ये भी है कि गंगा पुत्र भीष्म के शरीर के अलग-अलग अंगों को छूने से अलग-अलग फल की प्राप्ति होती है.

    सैकड़ों साल से चली आ रही परम्परा
    वाराणसी में गंगा पुत्र भीष्म के पूजा की परंपरा सैकड़ो साल पुरानी है. पांच दिनों तक भीष्म की पूजा करने से पूरे कार्तिक मास में गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है. यही वजह होती है कि घाटों पर भीष्म के पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ होती हैं.

    ये मिलता है फल
    केदार घाट पर भीष्म की पूजा कर रही सद्भावना सिंह ने बताया की भीष्म की पूजा से सभी तरह के फल मिकता है. पैर छूने से तीर्थ,हाथ छूने से दान,सिर छूने से बैकुण्ड, छाती छूने से नाती और पेट छूने से दलिद्र दूर होता है.

    Tags: Varanasi news

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