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OMG! 84 साल की उम्र में अमलधारी सिंह ने BHU से हासिल की डी.लिट की उपाधि, बनाया ये बड़ा रिकॉर्ड

Banaras Hindu University: वाराणसी के रहने वाले 84 वर्षीय अमलधारी सिंह ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग से डी.लिट की उपाधि हासिल की है. इसके साथ वह देश के सबसे बुजुर्ग छात्र बन गए हैं.

    रिपोर्ट-अभिषेक जायसवाल
    वाराणसी. वाकई पढ़ाई लिखाई के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती है. इस बात को वाराणसी (Varanasi) के रहने वाले 84 वर्षीय अमलधारी सिंह ने साबित कर दिखाया है. दरअसल वह उम्र के इस पड़ाव में भी पढ़ाई कर देश के सबसे बुजुर्ग छात्र बन गए हैं. वाराणसी के गणेशपुरी कॉलोनी में रहने वाले अमलधारी सिंह ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (Banaras Hindu University) के संस्कृत विभाग से डी.लिट की उपाधि प्राप्त की है. आपको बताते चलें कि साल 2021 में अमलधारी सिंह ने डी.लिट की उपाधि के लिए विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रेशन कराया था और अब उन्होंने इसकी डिग्री भी हासिल कर ली है. इससे पहले केरल के रहने वाले वेल्लायाणी अर्जुनन ने 2015 में 82 वर्ष की उम्र में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से डी.लिट की उपाधि प्राप्त की थी.

    22 जुलाई 1938 को यूपी के जौनपुर जिले में जन्‍मे अमलधारी सिंह को बचपन से ही पढ़ाई लिखाई का शौक था और इस उम्र में भी उनका ये जज्बा कायम है.1966 में उन्होंने बीएचयू से पीएचडी की. वहीं, पीएचडी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने बीएचयू एनसीसी में वारंट ऑफिसर के पद पर चार साल अपनी सेवाएं भी दी थीं. इस बीच भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें 1963 में बेस्ट ट्रेनर अवार्ड में चैंपियन ट्राफी भी दी थी.

    काम करने में मिलता है आराम
    अमलधारी सिंह ने बताया कि इस उम्र में उन्हें काम करने में ही आराम मिलता है. यही वजह है कि वो निरन्तर अपने जीवन में खुद को व्यस्त रखते हैं. उन्होंने बताया कि जीवन में हमेशा सीखने और पढ़ने की ललक होनी चाहिए. वे इसी उद्देश्य से लगातार आगे बढ़ रहे हैं. शायद यही वजह है कि 84 की उम्र में अमलधारी सिंह पूरी तरह फिट हैं.

    जोधपुर यूनिवर्सिटी में थे प्रोफेसर
    बता दें कि 1967 में जोधपुर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात थे. 11 साल वहां सेवा देने के बाद उन्होंने रायबरेली के बैसवारा पीजी कॉलेज में काम किया और 1999 में रिटायर्ड हुए.उसके बाद वे बनारस चले आए थे. बनारस आने के बाद बीएचयू के वैदिक दर्शन विभाग में काम किया.

    बनी रहे ज्ञान की परंपरा
    अमलधारी सिंह के बेटे विक्रम प्रताप सिंह ने बताया कि उनके पिता के इस जोश और जज्बे से उनके पूरे परिवार को ऊर्जा मिलती है. हम ये चाहते हैं कि इस ज्ञान की परंपरा को वे लगातार आगे बढ़ाते रहे.

    Tags: BHU, Varanasi news

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