BHU बवाल: 6 महीने में 11वीं बार सुलगी महामना की बगिया, मगर प्रशासन के लिए रूटीन घटना

स्थिति तब और दयनीय हो जाती है जब बीएचयू प्रबंधन बवाल के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जगह मौन रहता है. बीएचयू प्रबंधन की यह संवेदनहीनता स्थिति को और बिगाड़ रही है.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 26, 2018, 12:46 PM IST
BHU बवाल: 6 महीने में 11वीं बार सुलगी महामना की बगिया, मगर प्रशासन के लिए रूटीन घटना
बीएचयू बवाल की फाइल फोटो
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 26, 2018, 12:46 PM IST
महामना मदनमोहन मालवीय द्वारा स्थापित शिक्षा की बगिया बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) पिछले एक साल से लगातार सुलग रही है. बीएचयू कैंपस में आए दिन हो रहे बवाल से जहां पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है, वहीं इसकी ऐतिहासिक छवि भी धूमिल हो रही है. स्थिति तब और दयनीय हो जाती है जब बीएचयू प्रबंधन बवाल के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जगह मौन रहता है. बीएचयू प्रबंधन की यह संवेदनहीनता स्थिति को और बिगाड़ रही है. बीएचयू प्रशासन के मुताबिक यह घटनाएं रूटीन हैं और कैंपस में ऐसी घटनाएं आम हैं.

इस साल अगर अप्रैल से बात करें तो बीएचयू 11 बार सुलग चुका है. जिसमें पांच बार तो सितंबर के महीने में ही वंपुस का माहौल हिंसक हो गया. जिसके बाद 28 सितंबर तक कक्षाओं को स्थगित कर हॉस्टल को खाली करने के निर्देश दिए गए.

इस साल की बड़ी घटनाएं

23 अप्रैल: विज्ञान संसथान निदेशक कार्यालय के पास रास्ता जाम, आगजनी

26 अप्रैल: छात्र परिषद चौराहे पर शास्त्री छात्र की पिटाई
27 अप्रैल: सामुदायिक भवन के पास बारात में तोड़फोड़
1 मई: सेमेस्टर परीक्षा का प्रवेश पत्र न मिलने के विरोध में रास्ता जाम
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5 मई: हिंदी विभाग के पास दिनदहाड़े चाकूबाजी, छात्र घायल
8 मई: एलबीएस और बिड़ला हॉस्टल के छात्रों में पथराव, आगजनी
2 सितंबर: जन्माष्टमी उत्सव के दौरान राजाराम छात्र की पिटाई
12 सितंबर: अय्यर हॉस्टल में घुसकर कई गाड़ियों में तोड़फोड़, 30 घंटे तक धरना
23 सितंबर: छात्रों के दो गुटों के बीच एमएमवी गेट पर जमकर मारपीट हुई. इसी दिन कृषि विभाग के समित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले एक बाहरी छात्र को कुछ छात्रों ने पीट दिया.
24 सितंबर की रात परिसर का माहौल फिर हिंसक हो उठा. सर सुंदरलाल अस्पताल में एक मरीज के तीमारदारों ने जूनियर डॉक्टर के साथ मारपीट की. इसके बाद धन्वन्तरी छात्रावास और बिड़ला छात्रावास आमने सामने आ गए. रात भर जमकर पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ हुई.
25 सितंबर की सुबह भी बीएचयू कैंपस शांत नहीं हुआ. मारपीट के विरोध में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए. जिसके बाद कक्षायें 28 सितंबर तक स्थगित कर दी गई. साथ होस्टलों को खाली करने का निर्देश जारी कर दिया गया.

आखिर क्यों बिगड़ रहा है माहौल?

दरअसल पिछले सभी घटनाओं पर गौर करें तो यह बात साफ़ है कि कभी हॉस्टल में मेस न चलने की समस्या तो कभी बिजली पानी की समस्या को लेकर छात्र आए दिन धरना-प्रदर्शन करते हैं.छोटी बात पर शुरू आंदोलन प्रबंधन की संवादहीनता से बवाल में बदल जाता है. आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हो जाती हैं.

कैंपस सूत्रों की मानें तो इसकी एक वजह प्रोफेसरों की गुटबाजी भी है. कैंपस में कई गुट हैं जो इस तरह के बवाल को शह देते हैं. दरअसल, परिसर का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रोक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों सहित अन्य अधिकारीयों के पास है. लेकिन गुटबाजी की वजह से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती. एक वार्डन ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वार्डन और प्रोक्टोरियल बोर्ड के बीच तालमेल नहीं है. उनका कहना था कि उनकी सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड हैं. अगर छात्र हिंसक हो गए तो हमारी सुरक्षा कौन करेगा.

इसके अलावा उपद्रवी छात्रों और उनके बाहरी दोस्तों के हौसलों का बुलंद होने के पीछे शासन का दिशा निर्देश भी अहम वजह है. सरकार छात्रों के साथ सख्ती से निपटकर विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा नहीं देना चाहती.

मामले में एसएसपी आनंद कुलकर्णी का कहना है कि छात्रों के मसले पर पुलिस का बार-बार हस्तक्षेप करना उचित नहीं है.आखिर वो छात्र हैं और अपना भविष्य बनाने के लिए यहां आए हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की गई है कि हॉस्टल के वार्डन के माध्यम से सकारात्मक माहौल बनाएं.

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First published: September 26, 2018, 12:27 PM IST
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