Unlock 1.0: भांग वाली ठंडाई ने बदला बनारसियों का मिजाज, बोले- कोरोना को देंगे मात
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Unlock 1.0: भांग वाली ठंडाई ने बदला बनारसियों का मिजाज, बोले- कोरोना को देंगे मात
भांग वाली ठंडाई ने बदला बनारसियों का मिजाज

इस ठंडाई के प्रेमी रामनारायण दुबे बताते हैं कि यहां भांग नशे के रूप में नहीं बल्कि बाबा के प्रसाद के रूप में लिया जाता है. तो अनलॉक के तरफ बढ़ते हुए देश में बनारसियों को ठंडाई वाली ताजगी मिल गयी.

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वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) में लॉकडाउन-5 (Lockdown 5.0) के लिए जारी गाइडलाइंस के बाद ठंडाई की दुकानें अब खुल गईं है. जिसके बाद बनारसियों के चेहरे एक बार और खिल गए हैं. बनारसी पान के शौक रखने वाले बनारसियों को और राहत मिली जब इस गर्मी में उन्हें ठंडाई की ताजगी नसीब हुई. वाराणसी के गौदोलिया चौराहे पर खुली ये ठंडई की दुकानें बनारस में इसका शौक रखने वालों के लिए राहत दे रही हैं. क्योंकि इस तपती धूप में बनारसियों के लिए यही ठंडाई ताजगी पहुंचाती हैं. फिर चाहे वो ठंडाई केशर युक्त हो या फिर भांग युक्त. बनारसियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

इस ठंडाई के प्रेमी रामनारायण दुबे बताते हैं कि यहां भांग नशे के रूप में नहीं बल्कि बाबा के प्रसाद के रूप में लिया जाता है. तो अनलॉक के तरफ बढ़ते हुए देश में बनारसियों को ठंडाई वाली ताजगी मिल गयी. जिससे वो ताव से कह रहे हैं कि अब कलेजे को ठंडक पहुंची. पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े बादल कुमार बताते हैं कि ठंडाई के शौक रखने वालों के साथ ही इनके दुकानदारों को भी राहत मिली. क्योंकि इनके आजीविका का साधन भी बस यही रहा. लेकिन पूरे दो महीने के बाद इनके दुकान खुलने से जहां इन्हें आर्थिक दृष्टिकोण से राहत मिला तो दुकानों पर फिर से आई रौनक ने इन्हें कोरोना से लड़ने की हिम्मत भी दे डाली.

बनारस हमेशा ने अपने अनोखें मिजाज को लेकर जाना जाता है. इसी मिजाज को बनारसी अल्हड़ता कहते हैं जिसमें भांग का रस बेजोड़ शामिल रहता है. यहां कोई भी आपदा हो हर-हर महादेव के जयघोष के साथ उसे भांग के खुशबू में लपेट दिया जाता है.



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