चंद्रयान-2: बहुत दूर है, फिर भी हमसे जुड़ा है चांद, जानिए कैसे

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 8:21 PM IST
चंद्रयान-2: बहुत दूर है, फिर भी हमसे जुड़ा है चांद, जानिए कैसे
सबकी बातचीत में रहने वाले चांद का संबंध मन से है

पुराने भारतीय साहित्य और ज्योतिष में चांद का खूब जिक्र है, माना जाता है व्यक्ति के मन पर चांद का खूब असर होता है, अब वही भारत चंद्रयान 2 के जरिए नए तरीके से चांद को देखेगा.

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चंद्रयान मिशन तय हुआ, 2008 में पूरा भी हो गया. फिर चंद्रयान 2 का वक्त आ गया. आज सोमवार को चंद्रयान फिर से चांद पर रवाना हो गया है. कुछ नयी जानकारियां मिलेंगी. इन सबसे अलग भारतीय जनमानस में चांद को लेकर पहले से बहुत सी जानकारियां हैं. बचपन में चंदा मामा से भी अलग. ज्योतिषी लोग और ज्यादा जानते हैं. बताते हैं. बांचते भी हैं.

वैसे ऋग्वेद के पुरुषसुक्त में आता है- “चंद्रमा मनसो जायते”.

“चंद्रमा मनसो जायते” का मतलब होता है, चांद का जन्म विराट पुरुष के मन से हुआ है. वाराणसी के ज्योतिषाचार्य डॉ मंगल दत्त शास्त्री कहते हैं- “मन से जन्म लेने के कारण ही चंद्रमा मन की ही तरह अस्थिर रहता है.” मन की ही तरह चांद भी कभी घटता है, कभी बढ़ जाता है. कभी प्रसन्नता से चमक उठता है. तो कभी दुख से काला पड़ जाता है.
ज्योतिष को मानने वाले कहते हैं कि चंद्रमा की स्थिति से मन में भी उथल-पुथल होती है. धर्म और ज्योतिषि को मानने वाले कहते हैं पूर्णिमा को जब ‘चंद्रमा सारी कलाओं’ से परिपूर्ण होते हैं तो उस दिन मन अच्छा रहता है. अमावस्या को जब चंद्रमा ही काले पड़ जाते हैं तो बहुत से लोगो के मन अवसाद भर जाते हैं.


एक बंद कमरे में अपनी गद्दी लगाए और धर्म और ज्योतिष में विश्वास रखने वाले ये भी दलील देते हैं कि समुद्र के जल पर भी चंद्रमा की स्थितियों का फर्क पड़ता है. वैसे आज के विज्ञान में भी यही माना जाता है कि चंद्रमा और पृथ्वी की गति और उनकी स्थितियों से समुद्र में ज्वार भाटा आता है.

चांद का संबंध मन से भी है, Mood is related to Moon
सबकी बातचीत में रहने वाले चांद का संबंध मन से है


जड़ चीजों पर चांद का असर
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अब मन और समुद्र पर चंद्रमा के पड़ने वाले प्रभाव के कारण और उनकी व्याख्या तो धर्म-कर्म का शोध करने वालों का विषय है. विज्ञान के शोधों की बात की जाय तो बहुत से ऐसे शोध सुनने-पढ़ने में आए हैं, जिनमें कहा जाता है कि मानसिक रोगों से परेशान लोग पूर्णिमा को सामन्य हो जाते हैं. जबकि अमावस्या को अधिक परेशान हो जाते हैं.

ये अलग बात है कि मानसिक रोगियों के बारे में इन शोधों को मेडिकल सांइस का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला है. फिर भी जब तक इस बारे में चर्चा होती रहती है.

साहित्य और लोक में चांद

इन सबसे अलग अगर दुनिया भर के साहित्य को देखा जाय तो जब कभी भी कोई करैक्टर खुश रहता है तो अपनी खुशी चांद के साथ बांट लेता है. लगता है उसे चांद मिल गया है. शास्त्रीय साहित्य ही क्यों लोक में भी चांद ही चांद है.

किसी का मिलना बहुत मुश्किल हो गया हो तो कह देते हैं – दूज के चांद हो गए हैं. कहीं चांद सी बिटाया होती है, तो किसी की दुल्हन चांद सी होती है.

मतलब ये है कि वेद से लेकर जीवन तक चंद्रमा किसी न किसी रूप में जुड़ा है. साहित्य से लेकर लोक तक हर तरफ उसका जिक्र रहता ही है. वैज्ञान की इस दुनिया में हमारे कहे सुने को कम मानने वालों को तो चंद्रायान-1 से ही हमारे देश के वैज्ञानिकों ने बता दिया था कि उनके पास अद्भुत मेधा है. उस मिशन के बाद भी हम उन देशों में शामिल नहीं हुए थे, जो चांद पर साफ्ट लैडिंग कर सके थे. उस वक्त क्रैश लैडिंग हुई थी. अब चंद्रायन-2 के जरिए हम उन देशों में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने साॅफ्ट लैंडिंग कराई है. आखिर चांद से हमारा मन का रिश्ता है.

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First published: June 7, 2019, 7:15 PM IST
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