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Varanasi: यूपी STF ने 8 साल बाद लिया डिप्टी जेलर की हत्या का बदला, जेल में सख्ती से नाराज मुन्ना बजरंगी ने रची थी साजिश

यूपी STF ने 8 साल बाद लिया डिप्टी जेलर की हत्या का बदला (File photo)

यूपी STF ने 8 साल बाद लिया डिप्टी जेलर की हत्या का बदला (File photo)

Encounter And Revenge : बताया जाता है कि वाराणसी जेल में पदस्थ डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की सख्ती और गुर्गों की लगाम कसने से नाराज होकर सलाखों के पीछे से ही मुन्ना बजरंगी ने 2013 में डिप्टी जेलर की हत्या की साजिश रची थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 5, 2021, 12:45 PM IST
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वाराणसी. यूपी के प्रयागराज में गुरुवार को हुई मुठभेड़ में पुलिस ने वाराणसी के डिप्टी जेलर रहे अनिल त्यागी की हत्या का बदला ले लिया. मुठभेड़ में मारे गए दोनों कुख्यात अपराधियों अमजद अंगद उर्फ पिंटू और वकील पांडेय राजीव उर्फ राजेश ने ही अपने दो साथी बदमाशों के साथ मिलकर साल 2013 में मुन्ना बजरंगी के इशारे पर जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या करके पूरे पुलिस सिस्टम को चुनौती दी थी. करीब आठ साल बाद इस हत्या के आरोपियों को योगी सरकार की पुलिस ने उनके अंजाम तक पहुंचा दिया.

साल 2013 में जब पूर्वांचल में मुन्ना बजरंगी की तूती बोलती थी. जेल के अंदर बैठकर अपराधी यूपी में “गनतंत्र” के बदौलत सत्ता चलाते थे. अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद थे कि खाकी का खौफ भी उनके कदम नहीं रोक पाता था. उसी दौर में प्रयागराज की मुठभेड़ में मारे गए अमजद और वकील ने साथी शूटरों के साथ मिलकर वर्ष 2013 में वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी को मौत के घाट उतारकर पूरे प्रदेश में सनसनी पैदा कर दी.

डिप्टी जेलर की सख्ती से परेशान था मुन्ना बजरंगी


दरअसल, उन दिनों अमजद और वकील के गिरोह का सरगना मुन्ना बजरंगी वाराणसी जिला जेल में बंद था. डिप्टी जेलर त्यागी के सख्त रवैये से अपराधियों की जेल के अंदर पकड़ कमजोर होती जा रही थी. जेल के बंदी खौफ खाने लगे. उसी दौर में वाराणसी की जिला जेल में मुन्ना बजरंगी बंद था. त्यागी की सख्ती से मुन्ना बजरंगी समेत जेल में उससे मिलने आने वाले उसके गुर्गे भी परेशान हो गए थे. त्यागी की सख्ती का आलम ये था कि मुन्ना बजरंगी मोबाइल से अपने गुर्गों से बात भी नहीं कर पाता था. मुन्ना बजरंगी ने कई बार अलग-अलग तरीके से डिप्टी जेलर त्यागी पर दबाव बनाने की कोशिश की. लेकिन त्यागी पर कोई असर नहीं हुआ.

23 नवंबर 2013 को डिप्टी जेलर की हुई थी हत्या


बताया जाता है कि इस बात से नाराज होकर सलाखों के पीछे से ही मुन्ना बजरंगी ने डिप्टी जेलर की हत्या की साजिश रची. बजरंगी के इशारे पर सतीश उर्फ चंदन ने पहले अनिल त्यागी की रेकी शुरू की और रेकी पूरी होने के बाद 23 नवंबर 2013 को महावीर मंदिर के पास वारदात को अंजाम देने का दिन तय हुआ. डिप्टी जेलर अनिल त्यागी रोज की तरह जिम करके बाहर निकले ही थे कि सरेराह अंधाधुंध फायरिंग कर अमजद, वकील, राजेश चौधरी और रिंकू सिंह ने उनकी हत्या कर दी. इस वारदात को लेकर सात मई 2014 को कैंट थाने की पुलिस ने खुलासा किया कि मऊ निवासी रमेश सिंह काका सहित छह बदमाशों ने डिप्टी जेलर की हत्या की थी.


यूपी पुलिस को मिली थी बड़ी चुनौती


हालांकि 9 जुलाई 2017 को एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने खुलासा किया कि डिप्टी जेलर की हत्या मुन्ना बजरंगी ने अपने गुर्गों अमजद, वकील, राजेश चौधरी और रिंकू सिंह से कराई थी. प्रयागराज के अरैल इलाके में हुई मुठभेड़ में मारे गए इन दोनों बदमाशों में से वकील पांडे पर 50,000 का इनाम था. उस वक्त पुलिस पड़ताल में ये बात सामने आई थी कि डिप्टी जेलर की हत्या के लिए रिंकू और अमजद ने छह पिस्टल जुटाए थे. पूरी यूपी पुलिस को चुनौती मिली थी. बावजूद इसके, उस वक्त की पुलिस चार साल तक इस वारदात में शामिल अपराधियों की ठोस जानकारी सामने नहीं ला पाई थी. वारदात के बाद से ही पुलिस और एसटीएफ को इनकी तलाश थी. गुरुवार की सुबह में दोनों का एसटीएफ से आमना-सामना हुआ तो मुठभेड़ में वे ढेर कर दिए गए.
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