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UP: 'तीसरी आंख' के पहरे में रहेगी काशी, इस खास तकनीक के जरिए अपराधी की पहचान करेगी पुलिस

अपराधियों की पहचान करने के लिए यूपी पुलिस अब तकनीकी का इस्तेमाल करेगी.
अपराधियों की पहचान करने के लिए यूपी पुलिस अब तकनीकी का इस्तेमाल करेगी.

उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर लगाम लगाने अब पुलिस फेस रिकग्निशन सिस्टम (Face recognition system) वाले कैमरे का इस्तेमाल करेगी. अपराधी जैसे ही कैमरे में कैद होगा ये खास सिस्टम उसकी पहचान कर पुलिस को अलर्ट करेगा.

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वाराणसी. उत्तर प्रदेश की शिव की नगरी काशी में अब पुलिस की तीसरी आंख से बचना अपराधियों के लिए मुश्किल काम होगा. वाराणसी की सीमा में घुसना और फिर यहां छिपना नामुमकिन सा होगा. ऐसा मुमकिन होगा वाराणसी में लग रहे फेस रिकग्निशन कैमरों के जरिए. वाराणसी में 'फेस रिकग्निशन सिस्टम'(Face recognition system)  वाले ऐसे कैमरे  लगने जा रहे हैं जो किसी भी अपराधी को खुद पहचान कर पुलिस को बता देंगे. ये कैमरों का कमाल ये होगा कि किसी अपराधी की सालों पुरानी फोटो की पहचान न केवल चुटकियों में हो जाएगी बल्कि अगर अपराधी ने अपना भेष भी बदल लिया है तो भी इन कैमरों की जांच में उसके झूठा से नकाब उतर जाएगा.

यही नहीं, लाखों की भीड़ के बीच में अपराधी हो या घने कोहरे की धुंध से वो गुजर रहा हो, कोई भी परिस्थिति उसको बचा नहीं पाएगी. बता दें कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) योजना के तहत पुलिसिंग की ताकत और प्रभाव को बढ़ाने के लिए थाने स्तर पर एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली बनाना है.

पुलिस थानों को मजबूत करने की कोशिश



सीसीटीएनएस भारत सरकार की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत एक मिशन मोड प्रोजेक्ट (MMP) है. इसके तहत थानों से अपराधियों के डाटा लिए जायेंगे(लिंक किया जायेगा ). साथ ही लोकल स्तर पर भी अपराधियों के डाटा फीड किया जाएगा जिससे अपराधियों की पहचान हो सके. वाराणसी स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बताया कि भारतीय ,यूरोपियन  और अमेरिकन टेक्नॉलजी का प्रयोग करके इसे लगाया जा रहा है. 125 करोड़ की लागत से 500 किलोमीटर तक ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जायेगा और 700 अलग-अलग जगहों पर 3000 कैमरे लगाए जायेंगे ,जिसमें 22 कैमरे फेस  रिकग्निशन सिस्टम के लिए है ,जिसकी संख्या जरूरत के हिसाब से बढ़ाई भी जा सकती है.
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क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) योजना के तहत पुलिसिंग की ताकत और प्रभाव को बढ़ाने के लिए थाने स्तर पर एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली बनाना है.


शहर की अलग-अलग गतिविधियां रीयल टाइम रिकॉर्ड होगी जो सिक्योरिटी और सेफ्टी के लिए काफी अहम साबित होंगी. फेस अलॉगर्थिम  डाटा बेस  में मौजूद फ़ोटो का कैमरे से ली पिक्चर से मिलान करेगा और उसकी विशेष पहचान कोडिंग और नाम के माध्यम से बता देगा।. कैमरे करीब 7.5 मीटर की दूरी से अपराधियों की  पहचान कर लेगा और काशी इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल  सिस्टम  में बैठे एक्सपर्ट पुलिस कर्मियों को सूचना देगा ,जिसके फौरन बाद सम्बंधित थाना पुलिस के पुलिस कर्मी अपराधी को दबोच लेंगे. सर्विलांस सिस्टम जुलाई 2020 से शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट अप्रैल 2021 में बन कर तैयार हो जाएगा.  वाराणसी के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि  ये योजना क्राइम कंट्रोल की दिशा में बहुत कारगर साबित होगी.
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