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Jivitputrika 2021: काशी में धूमधाम से मनाया जा रहा जीवित्पुत्रिका का पर्व,ये है मान्यता

Jivitputrika 2021: काशी में धूमधाम से मनाया जा रहा जीवित्पुत्रिका का पर्व,ये है मान्यता

Festival

Festival of Jivitputrika is being celebrated in Kashi

सात वार नौ त्योहार के शहर बनारस (Banaras) में जीवित्पुत्रिका का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. संतान की रक्षा और लंबी आयु की कामना के लिये महिलाएं करती हैं पूजा.

    वाराणसी: सात वार नौ त्योहार के शहर बनारस (Banaras) में जीवित्पुत्रिका (Jivitputrika Vrat) का पर्व भी धूमधाम से मनाया जा रहा है. संतान की रक्षा और लंबी आयु की कामना से महिलाएं इस खास दिन पर पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर कुंड और तालाबों पर पूजा-अर्चना करती है. इस दौरान व्रती महिलाएं गंगा और कुंड तालाबों के तट पर राजा जीमुतवाहन का कथा सुनती है.

    बिहार,झारखंड के अलावा महादेव की नगरी काशी (Kashi) में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन शहर के सभी कुंड,तालाबों के पास दिन चढ़ने के साथ महिलाएं आती है और पूजा अर्चन के साथ कथा सुनती हैं. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को पुत्र शोक नहीं होता है. दो दिवसीय इस व्रत की शुरुआत आश्विन कृष्ण अष्टमी से होती है. पहले दिन महिलाएं निर्जला व्रत रहती है और दूसरे दिन इसका पारण किया जाता है.

    व्रती महिला रंजना ने बताया कि इस व्रत में नदी या सरोवर के तट पर भगवान सूर्य व भगवती जगदंबिक के पूजन के बाद राजा जीमुतवाहन की कथा कहते और सुनते है. तालाब पर पूजन के बाद हाथ में दीप लेकर महिलाएं पुत्र के कल्याण की कामना के साथ घर जाती हैं. इस व्रत को लोकाचार में खर-जिउतिया नाम से भी जाना जाता है.

    तालाबों पर मेले जैसा माहौल
    इस पर्व पर वाराणसी के तमाम कुंड तालाबों पर मेले जैसा माहौल होता है. ढ़ोल नगाड़ो के थाप के बीच पूरे दिन यहां व्रती महिलाओं के आने का दौर जारी रहता है. वाराणसी के लक्ष्मीकुंड के अलावा शंकुलधारा,ईश्वरगंगी,कुरुक्षेत्र कुंड पर व्रत रखने वाली महिलाओं की भीड़ होती है.

    Tags: Varanasi news

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