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मकर संक्रांति तक रखी जाएगी श्रीराम मंदिर की नींव, नहीं होगी काशी-मथुरा की बात- चंपत राय

मकर संक्रांति तक रखी जाएगी श्रीराम मंदिर की नींव
मकर संक्रांति तक रखी जाएगी श्रीराम मंदिर की नींव

राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर की नीव में न तो लोहा है और न ही स्टील है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 1, 2021, 5:28 PM IST
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वाराणसी. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के महासचिव चंपत राय (Champat Ray) ने कहा कि मकर संक्रांति पर श्रीराम मंदिर के नींव की डिजाइन तैयार हो जाएगी. जनवरी माह के अंत तक निर्माण शुरू हो जाएगाा. इस मियाद से आगामी तीन साल के अंदर तक संतोषजनक मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जाएगा. मंदिर निर्माण की नींव की डिजाइन तैयार करने के लिए देश भर के तकनीकी विशेषज्ञ समर्पण भाव से जुटे हुए हैं.

इंग्लिसिया लाइन स्थित विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में चंपत राय ने कहा कि मकर संक्रांति तक राम मंदिर की एक अच्छी और मजबूत नींव की ड्रॉइंग तैयार हो जाएगी. राम मंदिर अब 360 फीट लंबा 235 फिट चौड़ा होगा, जबकि शिखर की ऊंचाई 160 फीट होगी. अयोध्या में बनने वाले तीन मंजिला मंदिर के निर्माण में कुल 4 लाख पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा.

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चंपत राय ने कहा कि हमारी कार्यकर्ताओं के साथ सभी को अपील है की रैली या मीटिंग में ऊर्जा नष्ट न करे बल्कि घर- घर संपर्क करे. राय ने बताया की मंदिर निर्माण कार्य शुरू होने के तीन वर्ष बाद मंदिर सम्पूर्ण हो जाएगा. काशी प्रांत के अंतर्गत 16 हजार गांवों के 50 लाख परिवारों में कार्यकर्ता जाएंगे. उन्होंने बताया कि इस अभियान के लिए तीन-तीन कार्यकर्ताओं की टीम बनाई जाएगी, जो अपने-अपने गांव-मोहल्ले के लोगों के घर जाएंगे और राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग मांगेंगे. इसके लिए 10, सौ और एक हजार रुपये के कूपन तैयार किए गए हैं. इससे ज्यादा दान देने वालों को रसीद काटकर दी जाएगी.
राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर की नीव में न तो लोहा है और न ही स्टील है. नींव में पत्थर, चूना या प्लेन कंक्रीट है. तांबे की कील और रॉड का इस्तेमाल पत्थरों को जोड़ने के लिए उपयोग किया जाएगा. उन्होंने दान करने वाले राम भक्तों से कहा कि मंदिर को चांदी नहीं चाहिए, धन चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जब तक एक मंदिर का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक काशी-मथुरा किसी की बात नहीं होगी.
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