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Ganesh Chaturthi 2022: काशी में बाल गंगाधर तिलक ने की थी गणेश उत्सव की शुरुआत, ये थी वजह

Ganesh Chaturthi 2022: भगवान भोले के शहर बनारस में महाराष्ट्र की तर्ज पर गणेश उत्सव को बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है. ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट: अभिषेक जायसवाल

वाराणसी. भगवान भोले के शहर बनारस में गणेश उत्सव की धूम है. महाराष्ट्र की तर्ज पर काशी में गणेश उत्सव को बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है. ऐसे में काशी में कई मराठी परिवार हैं जो अपनी संस्कृति और सभ्यता के हिसाब से इस उत्सव को मनाते हैं. काशी के पुरातन गणेश उत्सव समिति भी उनमें से एक है, जिसका इतिहास 125 साल पुराना है. महाराष्ट्र के पुणे के बाद बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने काशी में गणेश उत्सव की शुरुआत की थी.

समिति से जुड़े वेद प्रकाश रामचन्द्र वेदांती ने बताया कि देश की आजादी से पहले भारतीयों को इक्कठा होने की इजाजत नहीं थी. सिर्फ धार्मिक आयोजनों में ही लोग इक्कठा होते थे. ऐसे में भारतीय एक साथ हों इसके लिए 1898 में बाल गंगाधर तिलक ने इस गणेश उत्सव की शुरुआत की थी. फिर गणेश उत्सव के जरिए स्वतंत्रता सेनानी एक जुट होकर यहां रणनीति तैयार करने के साथ ही लोगों में आजादी की अलख भी जगाते थे. बाल गंगाधर तिलक खुद इसके लिए काशी आये थे.

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सात दिनों तक होती है पूजा
वाराणसी के ब्रह्मा घाट स्थित मंगल भवन में आज भी मराठा परिवार से जुड़े लोग यहां इस उत्सव को धूमधाम से मनाते हैं. पहले की तरह ही आज भी यहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित होती है और फिर सात दिनों तक पूजा अनुष्ठान चलता है. इस दौरान काशी में मराठा समाज की संस्कृति देखने को मिलती है.

सप्ताह भर सुनाया जाता है पद्यगान
वत्सल जनार्धन शास्त्री ने बताया कि 7 दिनों तक यहां गणपति बप्पा की षोड़शोपचार विधि से पूजा होती है. इसके अलावा हवन और गणेश वंदना भी की जाती है और फिर पूरे सप्ताह भर गणपति बप्पा को पद्यगान सुनाया जाता है.जिसके लिए बच्चे नाग पंचमी के पर्व से ही प्रैक्टिस करते हैं. इन तमाम आयोजनों के अलावा सात दिनों में नृत्य, संगीत और गणपति बप्पा पर आधारित चित्र प्रतियोगिता और भी ढेरों आयोजन किये जाते हैं.

Tags: Ganesh Chaturthi, Ganesh Chaturthi History, Varanasi news

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