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वाराणसी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा, अंतिम संस्कार के लिए लगी लंबी कतार

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 19, 2019, 4:27 PM IST
वाराणसी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा, अंतिम संस्कार के लिए लगी लंबी कतार
बाढ़ में डूबा विश्व प्रसिद्द मणिकर्णिका घाट, छतों पर हो रहा शवों का अंतिम संस्कार

मोक्ष के लिए प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) भी पानी में डूब गया है जिसकी वजह से लोगों को अंतिम संस्कार (Cremation) के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है. आलम यह है कि छतों और गलियों में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

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वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तीन साल बाद गंगा नदी (Ganga River) का जलस्तर खतरे के निशान (Danger Mark) को पार कर गया है. जिसकी वजह से आस-पास के तीस से अधिक गांव बाढ़ (Flood) की चपेट में आ गए हैं. यही नहीं शहर के कई इलाकों में भी पानी भर गया है. नतीजन 1200 से अधिक परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर ऊंचाई वाले स्थानों में जाना पड़ा है. इतना ही नहीं मोक्ष के लिए प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) भी पानी में डूब गया है जिसकी वजह से लोगों को अंतिम संस्कार (Cremation) के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है. आलम यह है कि छतों और गलियों में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

स्कूलों में बनाया गाया राहत शिविर

कई गांवों के स्कूलों को बंद कर उनमें राहत शिविर बना दिए गए हैं. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर फिलहाल 71.50 मीटर के ऊपर पहुंच गया. यह खतरे के निशान 71.26 मीटर से 24 सेंटीमीटर ज्यादा है. जबकि गंगा का जलस्तर बढ़ने की गति अब भी एक सेंटीमीटर प्रति घंटा है. हालांकि राहत की बात ये है कि पहले ये रफ्तार एक घंटे में तीन सेंटीमीटर थी. जल आयोग के अनुसार, वर्ष 2016 में भी गंगा ने खतरे के निशान को पार किया था. उधर, गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर इसकी सहायक नदियों पर भी पड़ा है और वरुणा व असि का पानी एक दर्जन से अधिक इलाकों में भर चुका है. बताया जा रहा है कि जब तक चंबल से यमुना में पानी आना कम नहीं होगा, तब तक बाढ़ के थमने के आसार कम हैं.

मोक्ष के लिए लगी है लंबी लाइन

गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण अब मोक्ष के लिए भी लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई है. जिसकी तस्वीर वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट पर देखी जा सकती है. बाढ़ से प्रभावित ये घाट पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है. वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट की मान्यता है कि यहां बाबा भोले नाथ (शिव भगवान) खुद तारक मंत्र देकर मोक्ष का आशीर्वाद देते हैं. यहीं कारण है कि यहां चौबीसों घंटे चिता में आग रहती हैं. लेकिन इन दिनों यहां आने वाली मृत शरीर को मोक्ष पाने (अंतिम संस्कार) के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. बाढ़ के पानी ने घाट को पूरी तरह से डुबो दिया है. इस दौरान अंतिम संस्कार के लिए एकमात्र सहारा बना है घाट पर स्थित मकान का छत. जहां शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो अंतिम संस्कार में शामिल होने आये हैं. घंटों इंतजार के बाद उनकी बारी आ पा रही है. अगर गंगा के पानी में इसी तरह बढ़ाव जारी रहा है तो छत पर जल रही इन लाशों को जलाने के लिए अब गलियों का सहारा लेना पड़ सकता है.

(रिपोर्ट: उपेंद्र द्विवेदी/ रवि पांडे)
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First published: September 19, 2019, 3:41 PM IST
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