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Gyanvapi Row: बीएचयू के प्रोफेसर ने किया बड़ा दावा- ज्ञानवापी मस्जिद को बताया शिवतीर्थ

जिला जज की अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही ज्ञानवापी मसले की सुनवाई के बीच बीएचयू के एक प्रोफेसर ने रिसर्च का हवाला देते हुए बड़ा दावा किया है.

जिला जज की अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही ज्ञानवापी मसले की सुनवाई के बीच बीएचयू के एक प्रोफेसर ने रिसर्च का हवाला देते हुए बड़ा दावा किया है.

Gyanvapi Masjid Controversy: जिला जज की अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही ज्ञानवापी मसले की सुनवाई के ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बीएचयू के धर्मविज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी की रिसर्च में कई बड़े दावे
जिला जज की अदालत में हिंदू पक्ष के वकीलों ने तहखाने की दीवारों को तोड़कर सर्वे की मांग की है

वाराणसी. ज्ञानवापी विवाद मामले पर वाराणसी जिला जज की अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच बीएचयू के एक प्रोफेसर ने रिसर्च का हवाला देते हुए बड़ा दावा किया है. उन्होंने जो चार दावे किए गए हैं उनमें ज्ञानवापी मस्जिद और खाली जगह को विश्वेश्वर मंदिर के दक्षिण में स्थित शिव तीर्थ बताया है. उनका दावा है कि ज्ञानवापी में वापी का अर्थ बावली या लघु जलाशय था, जिसमें चार घाट, सुंदर सीढ़ियों के साथ 12 सुंदर स्तम्भ थे. यहीं मस्जिद के ऊपर तीन गुंबद के नीचे तीन शिवलिंग हैं, जहां शिव के साथ ब्रह्मा और विष्णु भी विराजमान हैं.

गौरतलब है कि करीब एक साल पहले जिस दिन ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश हुआ, उसी दिन बीएचयू के धर्मविज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने रिसर्च शुरू किया, जो अब पूरा हुआ है. इसमें 13 ग्रंथों का अध्ययन और प्रसाद वास्तुशास्त्र को आधार मानते हुए जो दावा किया गया उसमें नागर शैली में यहां यानी ज्ञानवापी में तीनों मंदिर बताए गए हैं. ज्ञानवापी से उत्तर की ओर अविमुक्तेश्वर, मौजूदा वक्त में ज्ञानवापी परिसर को काशी विश्वेश्वर और स्वर्ण शिखर वाले मौजूदा काशी विश्वनाथ मंदिर का दावा किया गया.

परिसर की दिशाओं में देवी-देवताओं का दावा
मंडप का जिक्र करते हुए प्रोफेसर त्रिपाठी रिसर्च में दावा करते हैं कि ज्ञानवापी परिसर के बीच में शिवलिंग हैं. उत्तर में ऐश्वर्य मंडप है, जिसमें ब्रह्मा प्रधान देवता हैं. दक्षिण में मुक्तिमंडप है, जिसके प्रधान विष्णु हैं. पूरब में ज्ञानमंडप के प्रधान खुद शिव हैं और दक्षिण में श्रृंगार मंडप(रंगमंडप) है. ये श्रृंगार गौरी का श्रीपीठ है. प्रोफेसर त्रिपाठी के मुताबिक, दमन पर्व के बाद मंडराचल पर्वत से चलकर कई दिनों तक काशी भ्रमण के बाद जब भगवान शंकर ने यहां विराजने का निर्णय लिया तो श्रंगार गौरी यानी ज्ञानवापी परिसर के रास्ते यहां पहुंचे. उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में स्थित विश्वेश्वर महादेव का मंदिर नौ मंडप वाला रहा है, जिसको नष्ट किया गया है.

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अदालत में चल रही है सुनवाई
वाराणसी के जिला जज की अदालत में चल रही सुनवाई में भी हिंदू पक्ष के वकीलों ने पिछले दिनों हुए सर्वे को अधूरा बताते हुए दूसरे सर्वे की मांग की है. इस मांग में तहखाने की दीवारों और दरवाजों को तोड़कर और मलबा हटाकर सर्वे की मांग की गई है. करीब 39 पन्नों की रिपोर्ट में प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने भी यही दावा किया है, कि अगर तहखाने और मलबे को हटाया जाएगा तो कई और बड़े साक्ष्य मिल सकते हैं, जिससे तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी. प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा है कि अगर कोई उनसे उनकी ये शोध रिपोर्ट लेना चाहेगा तो वे अदालती कार्रवाई के लिए इसे दे भी सकते हैं.

Tags: Gyanvapi Masjid Controversy, Gyanvapi Masjid Survey, UP news, Varanasi news

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