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Gyanvapi Masjid: सिविल कोर्ट ने जिला जज को हैंडओवर की ज्ञानवापी केस की रिपोर्ट, SC ने दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सिविल कोर्ट ने वाराणसी जिला जज को ज्ञानवापी केस की रिपोर्ट हैंडओवर कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सिविल कोर्ट ने वाराणसी जिला जज को ज्ञानवापी केस की रिपोर्ट हैंडओवर कर दी है.

Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सिविल कोर्ट ने वाराणसी के जिला जज को रिपोर्ट सौंप दी है.सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद मामले को सिविल जज से वाराणसी के जिला जज को ट्रांसफर करते हुए कहा था कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

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वाराणसी. यूपी के वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सिविल कोर्ट ने जिला जज को रिपोर्ट सौंप दी है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद मामले को सिविल जज से वाराणसी के जिला जज को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था. इस मामले की 23 मई को अगली सुनवाई होगी. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को ऑर्डर 7 रूल 11 मामले की सुनवाई 8 हफ्ते में पूरी करने का आदेश दिया है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस पीएस नरसिम्ह की पीठ ने कहा कि वह वाराणसी दिवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) पर कोई आक्षेप नहीं लगा रही है, जो पहले से मुकदमे पर सुनवाई कर रहे थे.

बता दें कि इस मामले की सुनवाई वाराणसी जिला सिविल जज रवि कुमार दिवाकर कर रहे थे.उन्‍हीं के आदेश पर ही स्पेशल कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह, दूसरे कमिश्नर अजय मिश्रा और अजय प्रताप सिंह की टीम ने 14, 15 और 16 मई को ज्ञानवापी में सर्वे-वीडियोग्राफी की थी. इसके बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कही थी ये बात
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में निचली अदालत के 16 मई के उस आदेश रद्द कर दिया, जिसमें मस्जिद के एक बड़े इलाके को सील करने और सर्द 20 नमाजियों को नमाज पढ़ने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को उस आदेश पर रोक लगाते हुए कहा था कि सिर्फ उस जगह को सुरक्षित किया जायेगा जहा शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है. साथ ही ये भी कहा था कि नमाजियों के मस्जिद में जाने या नमाज पढ़ने की कोई पाबंदी नहीं होगी. किसी भी तादाद में नमाजी मस्जिद में जायेंगे. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, ‘वाराणसी जिला जज इस बात पर सुनवाई करेंगे कि हिंदू पक्षकारों की याचिका सुनने लायक है या नहीं. उसे स्वीकार किया जाना चाहिए या नहीं.’

Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी के वजू खाने में ‘शिवलिंग’ या फव्वारा? पढ़ें कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट

वहीं, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि हिंदू पक्ष की याचिका स्वीकार नहीं होनी चाहिए, क्योंकि धर्मस्थल कानून 1991 के अनुसार किसी धार्मिक स्थल का चरित्र जैसा 15 अगस्त 1947 में था वैसा ही रहेगा. ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 17 मई का जो अंतरिम आदेश था, जो एरिया सील किया गया है जहां शिवलिंग पाया गया है वो बरकरार रहेगा. ज्ञानवापी मस्जिद में वजू खाने के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी. जबकि सुप्रीम कोर्ट जुलाई के दूसरे हफ्ते में ज्ञानवापी मामले की सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने की.

Tags: Gyanvapi Masjid, Gyanvapi Mosque, Supreme Court, Varanasi news

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