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तो क्या ज्ञानवापी की मुख्य मस्जिद के नीचे है आदि विश्वेश्वर…, सर्वे टीम की रिपोर्ट के हवाले से दावा

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर सभी पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं.

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर सभी पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं.

ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने का दावा ज़रूर किया जा रहा है लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि ये असली आदि विश्वेश्वर शिवलिंग (ज्योतिर्लिंग) नहीं है. माना जा रहा है कि ये शिवलिंग तो उन सात शिवलिंगों में से एक हैं, जो ज्ञानवापी परिसर में स्थापित थे. दावे और नक़्शे के अनुसार ज्ञानवापी परिसर अष्टकोणीय है जिसमें एक में गौरी शृंगार स्थित है और बाक़ी में सात शिवलिंग और बीच में आदि विश्वेश्वर विद्यमान हैं.

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वाराणसी. धर्मनगरी काशी में सिविल कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर के आदेश और भारी विरोध के बावजूद ज्ञानवापी में सर्वे हुआ. इसके बाद दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने पक्ष में दावे किये. अब इस रिपोर्ट और दावों पर कोर्ट में सुनवाई चल रही हैं लेकिन बड़ा सवाल अभी भी यही है कि अगर ये शिवलिंग आदि विश्वेश्वर नहीं हैं तो फिर आदि विश्वेश्वर कहां हो सकते हैं. इसके लिए स्पेशल कोर्ट कमिश्नर एडवोकेट विशाल सिंह की सर्वे रिपोर्ट पर नज़र डालेंगे तो इस सवाल का जवाब भी मिल सकता है लेकिन इस पर कोर्ट का क्या रूख रहता है वो भविष्य में ही पता चलेगा. 18 वीं शताब्दी में जेम्स प्रिंसेप ने जिस ओल्ड टेंपल ऑफ विश्वेश्वर का ज़िक्र अपनी पुस्तक में किया है. बिल्कुल उसी तरह का नक़्शे का ज़िक्र कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने अपनी रिपोर्ट में किया है.
कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने लिखा है कि, प्रो. एएस अल्टेकर ने हिस्ट्री ऑफ बनारस और जेम्स प्रिन्सिपे ने व्यू ऑफ बनारस नाम की किताब लिखी है. उसमें छपे पुराने आदि विश्वेश्वर मंदिर के ग्राउंड प्लान से पूरी तरह मिलता जुलता हुआ नक़्शा दोनों किताबों में दर्शाया गया है. वहीं मुख्य गुंबद के नीचे है, जहां नमाज़ अदा होती है. इस नक़्शे की फ़ोटोकॉपी मौक़े पर दी गई. उनके द्वारा इंगित किया गया कि मुख्य गुंबद के नीचे चारों दिशाओं में दीवालों के जिग-जैग कट बने हुए हैं. जो उतनी ही संख्या में हैं व शेप में हैं, जैसा किताब के नक़्शे में हैं. इसी तरह से दो दिशा उत्तर और दक्षिण के गुंबदों के नीचे नमाज़ अदा करने के स्थल की दीवालों के जिग-जैग कट की शेप और संख्या भी उस नक़्शे से मिलती है और इन्हीं में कुछ  मूल मण्डप भी स्थित हैं. मस्जिद के मध्य नमाज़ के हॉल तथा उत्तर व दक्षिण के हॉल के मध्य जो दरवाजा नुमा आर्क बना है उसकी लम्बाई और चौड़ाई भी नक़्शे के अनुरूप है.
इस रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद की छत पर बाहरी गुंबदों के अंदर त्रिशंकु शिखरनुमा आकृतियां इन्हीं जिग-जैग दीवारों व खम्भों पर ऊपर टिकी हैं. विशाल सिंह ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि इसका विरोध प्रतिवादी पक्के किया और इसको काल्पनिक बताया. लेकिन जानकार बताते हैं कि जब कोर्ट में इन तथ्यों को रखा जायेगा तो इसका नकारना आसान नहीं होगा. क्योंकि इस रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि जब फ़ोटोकॉपी नक़्शे से दीवारों की शेप का मिलान किया गया तो दोनों में पूरी समानता मिली और अंदर की दीवारों की कलाकृतियों व मोटिवतथा उसकी बनावट प्राचीन भारतीय शैली जैसी कुछ कुछ प्रतीत होती है.
सर्वे के दौरान एक दिलचस्प वाक्या भी सामने आया. सूत्रों की मानें तो जब सर्वे का आख़िरी दिन था और मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के मुंशी एजाज़ अहमद के विरोध के बावजूद स्पेशल कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह के अड़ने पर वजूखाने का पानी निकाल कर सर्च किया गया. दावे किये जा रहे हैं कि शिवलिंग का सच सामने आया और उसके बाद भी वहां मौजूद एजाज़ और उसके सहयोगी विरोध करते रहे, लेकिन जब तथाकथित फव्वारे और दावा किये जा रहे शिवलिंग पर एजाज़ ने जैसे ही पैर रखा तो स्पेशल कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह और वहां पर मौजूद सीनियर पुलिस ऑफ़िसर सुरक्षा इंचार्ज चक्रपाणि त्रिपाठी ने तुरंत कड़ी चेतावनी देते हुए उसको वहां से हटाया. वहां मौजूद लोगों ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि ऐसा लगा जैसे किसी ने उनके अपने सीने पर पैर रख दिया हो.
काफ़ी समय से कई इतिहासकार दावा करते रहे हैं कि ज्ञानवापी की मुख्य मस्जिद के नीचे ही आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग है तो इस सर्वे रिपोर्ट से इस पर मुहर लगती दिखाई दे रही हैं और यदि कोर्ट भी भविष्य में इस पर अपनी मुहर लगाता है तो ये काशी ही नहीं पूरे देश के लिए एक बड़े खुलासा जैसे होगा.

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Tags: Gyanvapi Masjid Controversy, Kashi Vishwanath

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