कैसे बना मुख्तार अंसारी गैंग का मुख्य शूटर राकेश पांडेय उर्फ हनुमान, जानें अपराध की दुनिया की Inside Story

लखनऊ के सरोजिनी नगर में हुआ राकेश पांडे उर्फ हनुमान का एनकाउंटर
लखनऊ के सरोजिनी नगर में हुआ राकेश पांडे उर्फ हनुमान का एनकाउंटर

मुन्ना बजरंगी ने राकेश की मुलाकात मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) से करवाई. जेल में राकेश की सेवा से खुश होकर मुख्तार ने ही उसे हनुमान नाम दिया. भाजपा विधायक कृष्णा नंद राय की हत्या के बाद सुर्ख़ियों में आया. कहते हैं कि इस हत्याकांड के हमलावरों ने AK-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं.

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वाराणसी/लखनऊ. मुख्तार अंसारी गैंग (Mukhtar Ansari) के मुख्य शूटर हनुमान पांडे (Hanuman Pandey) उर्फ राकेश पांडे (Rakesh Pandey) के एनकाउंटर के बाद एक बार फिर 15 साल पुराना बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय (Krishnanand Rai) हत्याकांड सुर्ख़ियों में है. भाजपा विधायक कृष्णानंद राय के हत्याकांड का आरोपी राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया. ये इत्तेफाक ही है कि जिस लखनऊ शहर ने राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय की हिम्मत और हाथ खोले बल्कि उसे मुन्ना बजरंगी से मिलवाया, उसी लखनऊ में उसके जुर्म और दहशत की कहानी का अंत हो गया.

लखनऊ आने के बाद...
बताते हैं कि जो भी शख्स राकेश पांडेय को बचपन से जानता था, वो एक पल को यकीन नहीं कर पाता है  कि एक दिन वो इतना बड़ा अपराधी बनेगा. यूपी के चर्चित हत्याकांड का मुख्य आरोपी बनेगा और उस पर हत्या, समेत कई मुकदमे अलग-अलग जिलों में दर्ज होंगे. जी हां सुनने में अजीब लगे लेकिन राकेश पांडेय उर्फ हनुमान की कहानी कुछ ऐसी ही है. लखनऊ ने उसकी दिल में छिपी दबंगई की हसरत को मुकाम दिया. यहीं उसे मुन्ना बजरंगी का साथ मिला और फिर एक वक्त जब हमले के बाद मुन्ना बजरंगी का नाम जरायम की आग उगलती दुनिया में ठंडा पड़ा. तब मुख्तार का सिर पर हाथ पाने के बाद हनुमान का चेहरा बहुत तेजी से सुर्खियों में आया. मऊ जिले का कोपागंज थाना क्षेत्र गांव लिलारी भरौली का रहने वाला था राकेश पांडेय. पिताजी बलदत्त पांडेय सेना में थे. स्वभाव से पिताजी बहुत सख्त थे. घर में अनुशासित माहौल था. शायद इसीलिए स्वभाव से दबंग राकेश गांव में दसवीं तक की पढ़ाई करने के दौरान एक सीधा-साधा लड़का बनकर ही रहा. हाईस्कूल के बाद पॉलीटेक्निक करने के लिए राकेश पांडेय लखनऊ चला गया. बस यहीं से राकेश की जिंदगी ने यू टर्न लिया.

नवाबों के शहर ने राकेश के अंदर छिपी हनक को पूरा खुला आसमान ने दिया और कालेज से शुरू रंगबाजी धीरे-धीरे पूरे इलाके में नजर आने लगी. इसी दौरान लखनऊ में एक मर्डर होता है और उसमें राकेश पांडेय का नाम आता है. यहीं से जुर्म की किताब में राकेश पांडेय का न केवल नाम रजिस्टर्ड होता है बल्कि वो बाहुबलियों की नजर में भी आ जाता है. राकेश जेल चला जाता है. लेकिन इस केस के बाद भी जरायम की दुनिया में नाम से थर्राने वाली छवि राकेश पांडेय की नहीं बन पाती है. यहां तक कि उसके गांव वाले भी बहुत ज्यादा उसके बारे में नहीं जान पाते हैं. ये बात साल करीब 1998 की है. दिल्ली में हुई एक मुठभेड़ में मुन्ना बजरंगी को कई राउंड गोलियां लगती है. जिसके बाद कहा जाता है कि मुन्ना बजरंगी बहुत दिनों तक अस्पताल में मरणासन्न हालत में रहा. इस वजह से पूर्वांचल समेत पूरे देश में मुन्ना बजरंगी के गिरोह की जमीन कमजोर हो गई. जब मुन्ना ठीक हुआ तो उसने फिर से अपने गिरोह को खड़ा करने की कोशिशें तेज की. उसे जुर्म की दुनिया में कुछ ऐसे नौजवान की तलाश थी कि जो शातिर भी हों और अच्छे शूटर भी. इसी वक्त अभय सिंह जेल में बंद राकेश पांडेय की मुलाकात मुन्ना बजरंगी से कराता है. यहीं से राकेश पांडेय को मिलता है मुन्ना बजरंगी का साथ. बजरंगी का साथ पाकर राकेश पांडेय ताबड़तोड़ कई वारदातों को अंजाम देकर चर्चा में आ जाता है.
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की जघन्य हत्या


कहा जाता है कि मुन्ना बजरंगी एक दिन राकेश की मुलाकात बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से करवाता है. जेल में अधिक भोजन करने और राकेश की सेवा से खुश होकर मुख्तार ने ही राकेश पांडेय को हनुमान नाम दिया. फिर आता है साल 29 नवंबर 2005 का दिन. गाजीपुर के मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के भांवरकोल ब्लॉक के सियाड़ी गांव में एक खेल प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहुंचे थे तत्कालीन मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय. उनके साथ कई सहयोगी भी थे. कार्यक्रम के बाद वह और उनके साथ के लोग एक काफिले में निकल पड़े. बासनिया छत्ती गांव से आगे बढ़ने पर एक गाड़ी अचानक उनके काफिले के आगे रुकी. जब तक कोई कुछ समझ पाता गाड़ी से निकले सात-आठ लोगों ने विधायक कृष्णानंद राय की गाड़ी पर फायरिंग शुरू कर दी. चारो तरफ से हुई गोलियों की बौछार में गाड़ी में सवार सभी सातों लोग मारे गए थे. मरने वालों में विधायक कृष्णानंद राय, गनर निर्भय उपाध्याय, ड्राइवर मुन्ना यादव, रमेश राय, श्याम शंकर राय, अखिलेश राय और शेषनाथ सिंह शामिल थे. कहते हैं कि हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं. मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गईं. पूर्वांचल की ये पहली वारदात थी, जिसमें एके-47 का इस्तेमाल हुआ. इस हत्याकांड के आरोपियों में राकेश पांडेय उर्फ हनुमान का नाम भी बाद में जोड़ा गया. बस यहीं से राकेश पांडेय उर्फ हनुमान जुर्म की दुनिया का बड़ा नाम हो गया.

हत्याकांड के वक्त पुलिस के पास राकेश पांडेय की कोई तस्वीर नहीं थी और राकेश पांडेय फरार हो गया. पुलिस भूखे शिकारी की तरह राकेश पांडेय को तलाश रही थी, तभी वाराणसी के एक होटल में राकेश पांडेय के होने की सूचना मिली. पुलिस ने जब होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो राकेश पांडेय नजर आ गया. हत्याकांड के एक साल बाद साल 2006 में राकेश पांडेय गिरफ्तार तो हो गया लेकिन बाद में जेल से बाहर आ गया. मुन्ना बजरंगी फरार चल रहा था, इसलिए राकेश पांडेय जेल से बाहर आने के बाद मुख्तार का सबसे करीबी और भरोसेमंद आदमी बन गया. 29 अगस्त 2009 का दिन था. मऊ जिले में गाजीपुर तिराहे पर पीडब्ल्यूडी के बड़े ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की हत्या होती है और नाम आता है राकेश उर्फ हनुमान पांडेय का. यहां से तय हो गया कि राकेश पांडेय ठेकेदारी में रसूख बनाने के लिए उतर चुका था. जुर्म की किताब से राकेश पांडेय का नाम यहीं खत्म नहीं हुआ. तत्कालीन एआरटीओ ऑफिस हकीकतपुरा पर मारे गए मन्ना सिंह के करीबी राम सिंह मौर्य और गनर सिपाही सतीश कुमार के दोहरे हत्याकांड में भी राजा चौहान सहित कई हत्यारों के साथ हनुमान पांडेय का नाम आया. हनुमान के खिलाफ मऊ जिले के दक्षिण टोला में मुकदमा दर्ज हुआ.

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जुर्म के ठेकेदार का अंत
बताया जाता है कि बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या होने के बाद राकेश पांडेय ही गिरोह के लिए शूटर तैयार कर रहा था. पिछले एक महीने से मुख्तार अंसारी गिरोह के खिलाफ पूर्वांचल में पुलिस एक्शन मोड पर है. पूर्वांचल के अलग अलग जिलों में मुख्तार अंसारी से जुड़े लोगों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही थी. इसी कड़ी में राकेश पांडेय की पत्नी सरोज लता पांडेय के खिलाफ आठ जुलाई 2020 को मुकदमा दर्ज किया गया था. जिस पर आरोप था कि तथ्यों को छिपाकर फर्जी शपथपत्र बनवाकर उन्होंने असलहे का लाइसेंस लिया था. बाद में राकेश पांडेय का नाम भी इसमें जुड़ गया. इसके एक महीने बाद रविवार को एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय की कहानी का अंत हो गया.
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