पुलिस का मानवीय चेहरा, 85 साल के बिछड़े बुजुर्ग को घरवालों को सौंपा

शिलांग के रहने वाले 85 साल के बुजुर्ग जगदीश प्रसाद अग्निहोत्री अपने परिजनों के साथ 14 दिसंबर को डिब्रूगढ़ राजधानी से कानपुर जा रहे थे. आधी रात के करीब ट्रेन जब दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकी, तो बुज़ुर्ग गलतफहमी में स्टेशन पर उतर गए.

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 16, 2018, 5:40 PM IST
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Updated: December 16, 2018, 5:40 PM IST
चंदौली में पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला. दरअसल शहर के दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन में एक 85 साल के बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ गए. जीआरपी के जवानों ने दो दिन के अथक प्रयासों के बाद उनको खोजकर परिजनों को सौप दिया.

शिलांग के रहने वाले 85 साल के बुजुर्ग जगदीश प्रसाद अग्निहोत्री अपने परिजनों के साथ 14 दिसंबर को डिब्रूगढ़ राजधानी से कानपुर जा रहे थे. आधी रात के करीब ट्रेन जब दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकी, तो बुज़ुर्ग गलतफहमी में स्टेशन पर उतर गए.

उधर बाकी परिजनो की जब नींद खुली तो उन्होंने देखा कि जगदीश अग्निहोत्री अपनी सीट पर मौजूद नही थे. परिजनों ने इस बात की सूचना पुलिस को दी. सूचना मिलने के बाद दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन की जीआरपी के जवान हरकत में आये और दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद वाराणसी से इस बुजुर्ग को खोज निकाला.

पुलिस के इस मानवीय मदद के लिए परिजनों ने जीआरपी टीम को माला और शाल पहनाकर सम्मानित किया और उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया.  बुजुर्ग के परिजनों का कहना है कि जीआरपी के इस मानवीय पहलू ने पुलिस की छवि को बदलने का काम किया है. (रिपोर्ट-नितिन)

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First published: December 16, 2018, 5:03 PM IST
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